अंबिकापुर। नाबालिगों को सड़क दुर्घटनाओं से बचाने और विद्यार्थियों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल के दिशा-निर्देशन में सरगुजा पुलिस द्वारा जिले भर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला मुख्यालय समेत समस्त थाना/चौकी प्रभारियों को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को यातायात नियम, नवीन कानून और साइबर सुरक्षा की जानकारी देने के निर्देश दिए गए थे। जागरूकता अभियान आगे भी जारी रहेगा।

पुलिस टीम द्वारा हाई स्कूल दरिमा, हायर सेकेंडरी स्कूल रघुनाथपुर, हायर सेकेंडरी स्कूल सलका और हाईस्कूल सुन्दरपुर मणीपुर में जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बिना लाइसेंस और बिना हेलमेट वाहन नहीं चलाने की सख्त हिदायत दी गई। पुलिस ने सड़क सुरक्षा के महत्व को समझाते हुए यातायात नियमों का पालन करने पर जोर दिया। समझाइश के बावजूद वाहन लेकर स्कूल आने वाले छात्र-छात्राओं के स्वजनों को बुलाकर काउंसलिंग की भी जानकारी दी गई। इसके साथ ही पुलिस ने नवीन कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में बताया। महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े पोक्सो एक्ट, टोनही प्रताड़ना, नशे के दुष्परिणाम, साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी पर विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बाहरी अनजान लोगों से वित्तीय लेन-देन में सतर्क रहने की सलाह दी गई। पुलिस का उद्देश्य नाबालिगों की सड़कों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें दुर्घटनाओं से बचाना है।

 

ओटीपी से डिजिटल अरेस्ट तक की दी जानकारी  

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पुलिस लाइन अंबिकापुर में विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में साइबर वॉलंटियर्स और पुलिस मितान टीम ने विद्यार्थियों को तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों और उनसे बचाव के उपाय बताए। छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी साझा न करने, हनी ट्रैप, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएं, सोशल मीडिया धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग, फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल-मैसेज और बैंकिंग फ्रॉड के बारे में विस्तार से बताया गया। साइबर अपराध होने पर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया भी समझाई गई। छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए पेपर स्प्रे के सुरक्षित उपयोग की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम को संवादात्मक बनाने प्रश्नोत्तर सत्र रखा गया, जिसमें विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे। टीम ने सरल उदाहरणों से सभी शंकाओं का समाधान किया। इस दौरान स्कूल के प्रभारी प्राचार्य विकास जोशी, संजीव कश्यप, गीति सिन्हा, नेहा तिवारी, आशा लकड़ा, अल्का सिंह सेंगर, राकेश पाण्डेय, युगेश्वर पाण्डेय, सृजा नायर सहित विद्यालय परिवार के शिक्षक उपस्थित थे। साइबर वॉलंटियर एवं पुलिस मितान टीम से विभाश्री सिंह, आस्था गुप्ता, भार्गवी द्विवेदी, खुशी कन्नौजिया, अतुल गुप्ता, विक्की गुप्ता, बसंत श्रीवास्तव, अभिमन्यु विश्वकर्मा और विकेश रजवाड़े शामिल रहे।

नाबालिगों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों की होगी काउंसलिंग  

नाबालिगों को सड़क दुर्घटनाओं से बचाने और उन्हें यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए शासन के निर्देश पर यातायात और थाना गांधीनगर पुलिस सहित विभिन्न थाना-चौकी की टीमों ने प्रमुख स्कूलों के पास चेकिंग पॉइंट लगाकर सघन जांच की और छात्र-छात्राओं को अंडरएज ड्राइविंग के खतरों से अवगत कराया। पुलिस का यह अभियान सतत जारी रहेगा। पुलिस ने सभी अभिभावकों से कानून का पालन करने और नाबालिग बच्चों को किसी भी स्थिति में वाहन चलाने के लिए नहीं देने का आग्रह किया है।

अभियान का प्रमुख उद्देश्य सड़कों पर नाबालिग छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पुलिस टीम ने प्रमुख शिक्षण संस्थानों के आसपास विशेष चेकिंग पॉइंट बनाकर वाहन चलाते पाए गए नाबालिगों से ड्राइविंग लाइसेंस और हेलमेट के संबंध में पूछताछ की। इन्हें बिना लाइसेंस और हेलमेट वाहन नहीं चलाने की जानकारी देते हुए नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई। पुलिस ने विभिन्न संस्थाओं के प्राचार्यों से मिलकर रोजाना जागरूकता की जानकारी साझा करने के साथ ही स्पष्ट किया कि इस दौरान वाहन चलाते पाए जाने वाले नाबालिगों के अभिभावकों को बुलाकर काउंसलिंग की जाएगी और उन्हें कम उम्र में वाहन सौंपने के कानूनी परिणामों व मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों से अवगत कराया जाएगा।

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