प्रदेशभर से पहुंचे तहसीलदार, नायब तहसीलदार आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर अडिग

विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा-हड़ताल पर जाने की जरूरत नहीं, वे खुद अपनी गिरफ्तारी देंगे

अंबिकापुर। सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक की बहन से बदसलूकी का आरोप और राजापुर उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ की गई मारपीट की घटना सामने आने के बाद प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार, छत्तीसगढ़ कनिष्ठ सेवा प्रशासनिक संघ और छत्तीसगढ़ राजस्व निरीक्षक संघ के बैनर तले एकजुट हो गए हैं। इनकी प्रमुख मांग मारपीट की घटना में शामिल विधायक सहित समर्थकों की गिरफ्तारी है। इसे लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया है।

इधर सीतापुर विधायक ने संजीदगी का परिचय देते हुए शुक्रवार को सरगुजा रेंज के आईजी के समक्ष गिरफ्तारी देने की तैयारी की थी, और कहा था कि वे खुद अपनी गिरफ्तारी देंगे। राजस्व कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने की कोई जरूरत नहीं है। विधायक ने समर्थकों से किसी तरह का जमावड़ा या पैनिक नहीं होने की अपील की थी, लेकिन गिरफ्तारी देने के लिए निकले विधायक की बातों को उन्होंने अनसुना कर दिया। विधायक ने इसके पहले कहा था कि यह सुशासन की सरकार है, जहां उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने में भी कोई परेशानी नहीं हुई, इसलिए अब वे खुद गिरफ्तारी भी देंगे। कांग्रेस शासनकाल में ऐसा नहीं होता था। विधायक के द्वारा स्वयं गिरफ्तारी की बनाई गई मंशा के बाद इलाके का नजारा बदल गया। विधायक निकले तो समर्थक सड़क पर लेट गए और उनके काफिले को रोक दिया। काफी संख्या में विधायक समर्थक सड़क पर आकर नारेबाजी करने लगे। काराबेल के पास पुलिस ने भी वाहनों के लंबे काफिले को रोका, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर वाहनों की लंबी कतार लग गई, इस दौरान राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यातायात व्यवस्था बहाल करने पुलिस को ताकत झोंकनी पड़ी। इसके बाद विधायक रामकुमार टोप्पो कुछ दूरी तक पैदल ही आगे बढ़ते चले गए। इनके साथ सैकड़ों समर्थक भी नारेबाजी करते चल रहे थे, माहौल काफी तनावपूर्ण था। विधायक लगातार अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था प्रभावित नहीं करने की अपील कर रहे थे। अंतत: ग्राम मंगारी के पास समर्थकों ने विधायक का हाथ पकड़ लिया और उनसे वापस चलने का आग्रह किया, और इन्हें वापस लेकर आ गए।

कार्यकर्ताओं का सम्मान रखने वापस लौटा

विधायक ने वापस लौटने के बाद कहा कि कार्यकर्ताओं का सम्मान रखने के लिए मैं वापस रेस्टहाउस पहुंचा हूं, लेकिन किसी प्रकार का जांच बाधित नहीं होगा। उन्होंने पुन: कर्मचारियों और अधिकारियों से काम पर लौटने का आग्रह किया है, और कहा है कि आप लोगों का जो मांग है, वो पूरा होगा। कानून अपना काम करेगा, क्षेत्र की जनता को पेनिक होने की जरूरत नहीं है, इसके लिए कार्यकर्ताओं से मैं चर्चा करूंगा।

प्रदेशभर से पहुंचे तहसीलदार और नायब तहसीलदार, कार्यालयों में लटका ताला

शुक्रवार को प्रदेशभर में राजस्व विभाग का कामकाज ठप रहा। सरगुजा संभाग सहित मुख्यालय अंबिकापुर में भी तहसील और एसडीएम कार्यालय में ताला लटका रहा। काली पट्टी लगाकर प्रदर्शन का दौर भी चला। मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट के ओहदे से जुड़े नायब तहसीलदार से मारपीट का होने के कारण प्रदेश स्तर पर हलचल मच गई। छत्तीसगढ़ कनिष्ठ सेवा प्रशासनिक संघ के पदाधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया, और शुक्रवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश के सभी जिलों में पदस्थ तहसीलदार और नायब तहसीलदार अंबिकापुर पहुंच गए, जिससे प्रदेशभर के तहसील कार्यालयों का कामकाज ठप हो गया। सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर सहित जिले के तहसील व एसडीएम कार्यालय में ताला लटका रहा। पेशी व अन्य कार्यों से यहां पहुंचने वाले पक्षकारों को उल्टे पांव वापस लौटना पड़ा। इनके द्वारा विधायक व समर्थकों के गिरफ्तारी की मांग की गई। इनका कहना है कि, अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो काम बंद-कलम बंद हड़ताल जारी रहेगा। राजमोहिनी देवी भवन में विरोध के उठ रहे स्वर के बीच अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारियों की भी मौजूदगी रही। इनकी मांगों का लिपिकों ने भी समर्थन किया है। इधर सीतापुर में बनी स्थिति को देखते हुए पुलिस व जिला प्रशासन भी अलर्ट है। प्रदेश स्तरीय प्रशासिनक अधिकारियों का बड़ा समूह राजमोहिनी देवी भवन में आगे की रणनीति तैयार किया है।

हस्ताक्षर नहीं करने से बने ऐसे हालात

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की बहन सीमा धनकी, शाख शोध प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर कराने के लिए 27 मई को राजापुर उपतहसील पहुंची थीं। उन्होंने यहां पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक से शोध प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने कहा। आरोप है कि, नायब तहसीलदार ने उनकी फाइल फेंक दी और बदसलूकी करते हुए कार्यालय से बाहर निकल जाने कहा। इसके बाद नायब तहसीलदार के साथ विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों द्वारा सीतापुर एसडीएम फागेश सिन्हा के मौजूदगी में मारपीट का मामला सामने आया, और बवाल की स्थिति बन गई। घटना जिला प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर ने एसडीएम और नायब तहसीलदार को अंबिकापुर बुलाया था। वस्तुस्थिति सामने आने के बाद नायब तहसीलदार की ओर से कोतवाली थाना अंबिकापुर में घटना की जानकारी दी गई थी, जिस पर विधायक समेत उनके 10-12 समर्थकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। वहीं विधायक की बहन के रिपोर्ट पर सीतापुर थाने में नायब तहसीलदार के खिलाफ भी अपराध दर्ज है।

25 लाख से ऊपर शोध क्षमता प्रमाण-पत्र जारी करने का अधिकार कलेक्टर को-लहरे

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ सेवा प्रशासनिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे व जिला अध्यक्ष उमेश्वर सिंह बाज ने बताया कि नायब तहसीलदार को एक कार्यपालिक मजिस्ट्रेट का अधिकार प्राप्त है, उसके ऊपर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी रहती है। मारपीट की घटना शोध क्षमता प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर को लेकर हुई। दरअसल, महिला का पति हत्या के मामले में जेल में निरूद्ध हैं। इन्हें पेरोल में बाहर लाने के लिए 28 लाख 66 हजार रुपये से अधिक के स्वामित्व का शोध क्षमता प्रमाण पत्र चाहिए था, इसके लिए कुर्क योग्य संपत्ति का होना जरूरी है। राजस्व पुस्तक परिपत्र में राजस्व अधिकारियों को शोध क्षमता प्रमाण-पत्र देने के लिये जो हिदायतें दी गई हैं, उसमें तहसीलदार को 5 लाख तक, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को 25 लाख तक व कलेक्टर को 25 लाख से ऊपर के शोध क्षमता प्रमाण-पत्र जारी करने का अधिकार है। व्यक्तिगत प्रयोजनों या सामान्य उपयोग के लिए शोध क्षमता प्रमाण-पत्र नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में अपूर्ण दस्तावेजों के साथ कार्यालय आकर शोध क्षमता प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर करने के लिए नायब तहसीलदार पर दबाव बनाना गलत है। उन्होंने कहा कि, इस दस्तावेज को समुचित जांच-पड़ताल किए बिना किसी ख्याति प्राप्त व्यक्ति या अधिकारी के परिचित अथवा अधिक प्रभावशील व्यक्ति का चेहरा देखकर नहीं दिया जा सकता है।

आए दिन अधिकारियों को कर रहे अपमानित

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ सेवा प्रशासनिक संघ के प्रदेश स्तर से आए अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली की हत्या के प्रयास के विरोध में भृत्य से लेकर अपर कलेक्टर तक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहभागी हैं। एक जनप्रतिनिधि और उनके समर्थकों के द्वारा जिस प्रकार का कृत्य नायब तहसीलदार के साथ किया गया है, ऐसी घटना किसी के साथ भी घट सकती है, इसका भय सभी को है। सुशासन, निरीक्षण के नाम पर अधिकारियों को अपमानित किया जाता है। इन्होंने कहा हम सुशासन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अधिकारियों का भी आत्मसम्मान है, इसे बचाने और अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए आन्दोलन की राह पर अग्रसर रहेंगे।

राजस्व लिपिक संघ भी विरोध में आगे आया

राजस्व लिपिक संघ के जिला अध्यक्ष रमेश यादव व संरक्षक दिलीप सिन्हा ने नायब तहसीलदार के साथ मारपीट की हुई घटना की निंदा करते हुए कहा कि, घटना के विरोध में शुक्रवार को सभी राजस्व कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर हैं। शनिवार और रविवार को वैसे भी कार्यालयीन अवकाश रहेगा। मारपीट के जिम्मेदारों की गिरफ्तारी नहीं होने की स्थिति में आगामी प्रदेश व जिला स्तरीय जैसी भी रणनीति बनेगी, उसके तहत काम करेंगे। इन्होंने बताया कि कार्यालयीन दिवस में कामकाज ठप रहने से पेशी, जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, नामांतरण, बंटवारा, पुनरीक्षण जैसे कई कार्य प्रभावित हुए हैं। पक्षकारों के साथ ही अधिवक्ताओं को भी दिक्कत का सामना करना पड़ा है।

टीएस सिंहदेव और अमरजीत खुद के अंदर झांक कर देखें

छत्तीसगढ़ युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर ने विधायक की बहन से बदतमीजी के आरोप और नायब तहसीलदार की पिटाई के मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के बयानबाजी के बाद कहा है कि, इन्हें इस मामले में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। सिर्फ आरोप लगने पर हमारे विधायक के खिलाफ एफआइआर हो गया। टीएस सिंहदेव ने तो अंबिकापुर के गौरव पथ पर सबके सामने एक अधिकारी को थप्पड़ जड़ दिया था, इसके बाद एफआइआर तक नहीं हुआ। युवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा है कि नायब तहसीलदार के आरोप पर विधायक के खिलाफ भी एफआइआर दर्ज हो गया है। विधायक रामकुमार टोप्पो ने बयान जारी करके कहा है कि जांच में वे सहयोग देने तैयार हैं। सिर्फ आरोप पर विधायक पर एफआइआर दर्ज होना, इससे ज्यादा पारदर्शिता और सूचिता कहीं दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा है कि विधायक की बहन के साथ जो बद्तमीजी हुई, उसके भी गवाह वहां मौजूद हैं। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सरगुजा है साहब, हमारे विधायक पर आरोप लगे हैं और एफआईआर हो गया। कांग्रेस के नेताओं को खुद के अंदर झांक कर देखना चाहिए। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के संरक्षण में उनके कार्यकर्ता थाने में घुसकर पुलिसकर्मियों से मारपीट करते थे, ये सब सीसीटीवी कैमरे में भी दर्ज है, लेकिन उनके कार्यकर्ता जेल नहीं गए। ऐसे लोग विष्णु देव साय के सुशासन पर अंगुली उठाएंगे, ये सब जनता देख रही है।

नायब तहसीलदार को करें गिरफ्तार, एस.टी. एक्ट का मामला हो दर्ज

भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा सरगुजा ने कलेक्टर सरगुजा एवं पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर नायब तहसीलदार-कार्यपालिक मजिस्ट्रेट तुषार मानिक पर महिला के साथ अभद्र व्यवहार, जातिगत गाली-गलौज, अश्लील इशारे एवं धक्का-मुक्की करने के आरोप में कठोर कार्रवाई की मांग की है। महिला मोर्चा की ओर से द्वारा भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया, महापौर मंजूषा भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह, महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री फुलेश्वरी सिंह, जिला महामंत्री अरुणा सिंह एवं महिला मोर्चा जि़लाध्यक्ष शुभांगी बिहाड़े ने सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि ग्राम कोटछाल, जनपद पंचायत मैनपाट निवासी सीमा धनकी अपने शासकीय कार्य से उप तहसील राजापुर कार्यालय पहुंची थीं, जहां नायब तहसीलदार तुषार मानिक द्वारा उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया। इस घटना को महिला सम्मान एवं शासकीय गरिमा के खिलाफ बताते हुए महिला मोर्चा ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि थाना सीतापुर में एफ.आई.आर. दर्ज होने के बावजूद अब तक एस.टी. एक्ट नहीं लगाया गया है और न ही आरोपी की गिरफ्तारी की गई है, जिससे महिलाओं में भारी आक्रोश है। भाजपा महिला मोर्चा ने प्रशासन से मांग की है कि, आरोपी अधिकारी को तत्काल निलंबित कर एस.टी. एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की जाए, साथ ही अविलंब गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो इस विषय को उच्च स्तर तक उठाया जाएगा। इस दौरान भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

भाजपा विधि प्रकोष्ठ ने कहा-हड़ताल गैर-कानूनी एवं जनविरोधी

भाजपा विधि प्रकोष्ठ, सरगुजा ने राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा प्रस्तावित अनिश्चितकालीन और कलमबंद हड़ताल को पूर्णत: गैर-कानूनी, जनविरोधी एवं प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करने वाला कदम बताया है। जिला संयोजक, भाजपा विधि प्रकोष्ठ जन्मेजय पाण्डेय ने कहा कि, देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टी.के. रंगराजन बनाम तमिलनाडु राज्य (2003) प्रकरण में स्पष्ट किया जा चुका है कि, शासकीय सेवकों को हड़ताल पर जाने का कोई मौलिक अथवा वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद राजस्व अधिकारी एवं कर्मचारी सामूहिक रूप से कार्य बंद कर शासन एवं प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-6 का खुला उल्लंघन है। अधिवक्ता धनंजय मिश्रा, श्यामलाल गुप्ता, प्रकाशमणि त्रिपाठी, संदीप तिवारी, विवेक पाण्डेय, अश्विनी पांडेय, पीयूष त्रिपाठी, साक्षी सिंह, सुष्मिता चक्रवर्ती, शिवदत्त शर्मा, आशा जायसवाल, अरविन्द कन्नौजिया ने कहा है कि राजस्व विभाग आम जनता, किसानों, विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ विभाग है। ऐसे समय में कार्य बंद होने से नामांतरण, सीमांकन, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, भू-अभिलेख एवं अन्य आवश्यक सेवाएं पूरी तरह प्रभावित होंगी, जिससे आम नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। सीतापुर विधायक से संबंधित प्रकरण में शासन एवं जांच प्रक्रिया पर दबाव बनाने के उद्देश्य से इस प्रकार की हड़ताल की जा रही है, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं विधि शासन के विरुद्ध है। कलेक्टर से हड़ताल में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों, लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 तथा अत्यावश्यक सेवा संधारण अधिनियम के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए निलंबन एवं सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई तत्काल करने की मांग की गई है।

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