हंगामा के बीच प्रशासन की टीम ने कार्रवाई के लक्ष्य को किया पूरा

अंबिकापुर। शहर के गांधीनगर थाना क्षेत्र में स्थित ‘द कमोदा रिसॉर्टÓ के अतिक्रमित हिस्से को सोमवार को प्रशासन की टीम ने हटवाया। यहां करीब 45 डिसमिल शासकीय जमीन पर कब्जा करके रिसॉर्ट का निर्माण करने की शिकायत पर शनिवार को ही जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची थी। नापजोख के बाद रिसॉर्ट के संचालक द्वारा दो दिन का समय मांगा गया था, और टीम बिना अतिक्रमण हटाए वापस लौट गई थी। इस दौरान रिसॉर्ट के स्वामी ने अपने स्वामित्व की भूमि का अवलोकन करके स्वयं अतिक्रमण हटा लेने के लिए आश्वस्त किया था। इधर प्रशासन की टीम दो दिन का समय पूरा होते ही भारी-भरकम पुलिस बल के साथ बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची। इस दौरान हंगामा, विवाद की स्थिति भी बनी, लेकिन मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने अपनी कार्रवाई के लक्ष्य को पूरा किया। इस दौरान पट्टे की भूमि में बने किराए के मकानों को तोड़ देने जैसे आरोप लगे हैं।

बता दें कि, द कमोदा रिसॉर्ट का निर्माण निजी भूमि के साथ ही शासकीय भूमि में अतिक्रमण करने के मामले में अक्टूबर 2025 में तहसील न्यायालय ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें 45 डिसिमल शासकीय जमीन में अतिक्रमण करके निर्माण करना बताया गया है। इसके बाद रिसॉर्ट संचालक को नोटिस जारी करके अतिक्रमण हटाने कहा गया था, लेकिन अतिक्रमण हटाने के लिए रिसार्ट संचालक ने अपनी तरफ से कोई पहल नहीं की। इसके बाद बीते शनिवार को एसडीएम अंबिकापुर बन सिंह नेताम के नेतृत्व में तहसीलदार और राजस्व विभाग के कर्मचारी एक्सीवेटर लेकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए पहुंचे थे। शाम 4 बजे तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई विरोध और हंगामा के बीच पूरी नहीं हो पाई। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भी रिसॉर्ट संचालक के बुलाने पर मौके पर पहुंचे थे, और एसडीएम सहित प्रशासनिक अमले से चर्चा के बाद रिसॉर्ट संचालकों ने एसडीएम को आवेदन देकर दो दिन का समय मांगा था। प्रशासन की टीम भी इसके बाद अतिक्रमण हटाने के लिए जद्दोजहद नहीं की, और इनके आग्रह पत्र को स्वीकार करके वापस लौट गई थी। दो दिन की मियाद पूरी होने के बाद भी मौके से रिसॉर्ट के संचालक द्वारा स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाया गया था। सोमवार को सुबह 6.30 बजे ही अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल के साथ राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। सामने यह भी आया है कि रिसोर्ट का निर्माण जिस जमीन पर किया गया है, उसमें बंगाली शरणार्थियों की जमीन भी है, इसे रिसॉर्ट के संचालक ने वसीयतनामा के आधार पर प्राप्त करना और नियमानुसार रजिस्ट्री कराना बताया है। वहीं जमीन के क्रय-विक्रय, रजिस्ट्री को शिकायतकर्ता और भूमि विक्रेता से संबंध रखने वाले सवालों के घेरे में ले रहे हैं। इसकी शिकायत सरगुजा कलेक्टर से की गई है।

न्यायालय तहसीलदार का पारित आदेश दिनांक 25.03.2010

न्यायालय तहसीलदार अंबिकापुर के पारित आदेश दिनांक 25.03.2010 में उल्लेख है कि, पंजीकृत वसीयतनामा दिनांक 28.7.2007 के द्वारा आवेदकगणों को भूमि प्रदान की गई है। वसीयतकर्ता की मृत्यु 2.1.2008 को हो गई है। आवेदकों के द्वारा पंजीबद्ध वसीयतनामा के आधार पर राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया है। आवेदन पत्र के साथ भूमि का खसरा, बी-1, वसीयतनामा एवं मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रति प्रस्तुत की गई है। वहीं राजेश कुमार गुप्ता ने प्रकरण में अपने कथन में बताया है कि, बलाई कृष्ण राय आ. स्व. सुरेन्द्र नाथ राय, निवासी फुंदुरडिहारी का वृद्धावस्था में बीमारी का उन्होंने इलाज कराया एवं सेवा किया है, जिससे खुश होकर स्व. बलाई कृष्ण राय के द्वारा उनके पुत्र सौरभ केशरवानी एवं ऋषभ कुमार यादव के पक्ष में पंजीकृत वसीयतनामा दिनांक 28.07.07 को उप पंजीयक कार्यालय अंबिकापुर में निष्पादित एवं पंजीयन करा कर प्रदान किया गया है। उक्त भूमि को वसीयतनामा के आधार पर आवेदकों के नाम से नामांतरण करने कहा गया। वसीयतनामा के प्रारूपकर्ता, दस्तावेज लेखक रामानन्द गुप्ता आ. रामेश्वर गुप्ता ने प्रकरण में अपने कथन में बताया है कि, उनके पास 28.07.2007 को बलाई कृष्ण राय आया और बोला कि, उसे अपनी ग्राम लुण्ड्राकोरी में खसरा नम्बर 471/2 में से रकबा 0.041 हे. भूमि को सौरभ केशरवानी एवं ऋषभ यादव के नाम से वसीयत करना है, इनके बताये अनुसार भूमि का चौहद्दी खसरा एवं रकबा का वसीयतनामा तैयार किया गया और वसीयतकर्ता के गवाहों के सामने वसीयतनामा पर अपना हस्ताक्षर करके, पंजीयन कार्यालय में उसका पंजीयन कराया।

रिसॉर्ट के स्वामी ने कहा-शिकायतें झूठी और भ्राम

द कमोदा रिसॉर्ट के स्वामी राजेश कुमार गुप्ता ने एक दिन पूर्व अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि, उनकी निजी भूमि एवं व्यवसाय को गलत तरीके से विवादित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। संबंधित भूमि पर वर्ष 2005 से नगर निगम की स्वीकृति के आधार पर वैधानिक रूप से निर्माण एवं व्यवसाय संचालित है तथा सभी शासकीय कर एवं देनदारियों का उनके द्वारा नियमित भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने शासन के नियमानुसार डायवर्सन, नक्शा, ले आउट स्वीकृत कराने के बाद बैंक से लोन लेकर निर्माण करवाया है। कुछ लोगों के द्वारा दुर्भावनावश झूठी एवं भ्रामक शिकायतें करके और प्रशासन को गुमराह करके उनके परिवार, व्यवसाय और संपत्ति को अनावश्यक नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि मामला न्यायालयीन प्रक्रिया में विचाराधीन है। इसके बावजूद दबाव बनाकर कार्रवाई कराने की कोशिश की गई है। उन्होंने कार्रवाई से पहले इसकी निष्पक्ष और विधिसम्मत जांच कराने व सभी दस्तावेजों एवं तथ्यों का गंभीरता से परीक्षण कराने और झूठी शिकायत करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

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