सरगुजा पुलिस ने मोबाइलधारकों को सावधान करने शुरू की पहल
अंबिकापुर। मोबाइल चोरी की घटनाओं को संज्ञान में लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा ने जागरूकता उत्पन्न करने वीडियो संदेश जारी करके भीड़-भाड़ वाले इलाकों, सार्वजनिक परिवहन, बाजारों एवं विभिन्न आयोजनों में उपस्थित होने वाले ऐसे व्यक्तियों को सावधान किया है, जो अपने मोबाइल को शर्ट के ऊपरी जेब में रखते हैं और मोबाइल चोरी जैसी वारदातों का शिकार होते हैं। कई प्रकरणों में साइबर अपराध एवं विभिन्न प्रकार की ठगी का भी वे शिकार हो जाते हैं।
सरगुजा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने कहा है कि बाजारों से मोबाइल चोरी होने की घटनाएं और उनसे जुड़े साइबर अपराध एक गंभीर समस्या बन चुकी है। भीड़-भाड़ वाले इलाकों, सार्वजनिक परिवहन दौरान या सार्वजनिक आयोजनों में मोबाइल चोरी की घटनाएं एवं इनसे जुड़े साइबर अपराध की घटनाएं सुनने को मिलती हैं। आदतन मोबाइल चोर गिरोह अक्सर इस तरह की घटनाओं को अलग-अलग तरीकों से अंजाम देते हैं। भीड़ वाले बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों, बड़े आयोजनों, धार्मिक स्थलों पर उपस्थित भीड़ में मौकापरस्त लोग किसी को भी शिकार बना सकते हैं। ऐसे लोग संचार साथी पोर्टल के जरिए अपने नाम से जारी हुए सिम कार्ड की संख्या पता कर सकते हैं। मोबाइल चोरी होने पर बैंक को सूचित करने के साथ ही सीईआईआर पोर्टल का उपयोग मोबाइल ब्लॉक करने के लिए कर सकते हैं।
ऐसे गिरोहबाजों से रहें सावधान
जेबकतरों का गिरोह बहुत ही शातिर होता है, जो भीड़ में घुसकर बड़ी सफाई से लोगों की जेब से मोबाइल निकाल लेता है। झपट्टपामार गिरोह बाइक या स्कूटर पर सवार होकर चलते हैं और चलते-फिरते लोगों के हाथों से मोबाइल छीनकर फरार हो जाते हैं। कुछ अपराधी दुकानों से मोबाइल खरीदने का नाटक करते हैं और मौका मिलते ही मोबाइल लेकर भाग जाते हैं।
चोरी होने वाले मोबाइल से साइबर अपराध
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि चोरी किया गया मोबाइल सिर्फ भौतिक वस्तु नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के डिजिटल जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। चोर मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ उसे बेचने के लिए नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए करते हैं। अगर आपका फोन लॉक नहीं है या पासवर्ड कमजोर है, तो चोर आपके फोन में मौजूद यूपीआई ऐप्स, गूगल पे, फोन पे, पेटीएम या डिजिटल वॉलेट से पैसे निकाल सकते हैं। यदि आपके फोन में बैंक एप्स लॉग इन हैं, तो वे आपके बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं।
ओटीपी का दुरूपयोग
फोन चोरी होने पर, चोर आपके बैंक खाते या अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए आने वाले ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी कर सकते हैं। चोर व्यक्तिगत डेटा की चोरी और दुरुपयोग फोन में मौजूद फोटो, वीडियो, संपर्क, ईमेल और अन्य व्यक्तिगत डेटा से कर सकते हैं। वे मोबाइलधारक के डेटा का उपयोग कर सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बना सकते हैं और संबंधित के पहचान का दुरुपयोग कर सकते हैं। निजी तस्वीरों या वीडियो का इस्तेमाल करके ब्लैकमेल कर सकते हंै। फोन का उपयोग किसी अन्य अपराध धमकी भरे कॉल या मैसेज भेजने के लिए कर सकते हैं, जिससे पुलिस की जांच मोबाइलधारक तक पहुंच सकती है।
मोबाइल चोरी होने पर क्या करें
यदि मोबाइल चोरी हो जाता है, तो तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन पर इसकी सूचना दें। अगर एकाउंट डिटेल जैसे-डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड की जानकारी, इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन पासवर्ड लीक हुआ हो तो बैंक खाते ब्लॉक कराएं। अपने बैंक को सूचित करें और तुरंत अपने सभी बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट को ब्लॉक कराएं। आमनागरिक भारत सरकार के संचार साथी पोर्टल पर जाकर अपने नाम से जारी सिम कार्ड की संख्या पता करें, और सीईआईआर पोर्टल का प्रयोग मोबाइल ब्लॉक करने के लिए करें, जिससे उसका दुरुपयोग नहीं होगा। अपने ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य सभी महत्वपूर्ण खातों के पासवर्ड तुरंत बदल दें, उक्त मोबाइल अथवा नंबर से किसी प्रकार की साइबर अपराध घटित होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इन सावधानियों को अपनाकर मोबाइल चोरी के बाद होने वाले वित्तीय और व्यक्तिगत नुकसान से बचा जा सकता है।

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