अंबिकापुर। सरगुजा क्षेत्र रेल संघर्ष समिति अंबिकापुर से रेणुकूट रेल लाइन का लाभ लाखों लोगों को दिलाने के लिए संकल्पित है। झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश सरकार के तमाम मंत्रियों व विधायकों, से संपर्क करके उनका समर्थन प्राप्त करने के बाद समिति के कर्ताधर्ता रेल लाइन सरगुजा वासियों को मिले, इसके लिए अंतिम दम तक प्रयासरत रहने की ठान चुके हैं। अच्छी बात यह है कि संघर्ष समिति को दलगत भावनाओं से दूर हर किसी का समर्थन मिल रहा है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस रेल परियोजना के लिए प्रस्ताव भी पारित किया गया है, लेकिन वर्तमान सत्ताधीशों की हीलाहवाली के बीच अभी भी बरवाडीह रेल लाइन का जिन्न मंडरा रहा है। सर्वे के नाम पर लाखों रुपये फूंकने के बाद भी कुछ हासिल होने की स्थिति नहीं बन पाई है। इसे देखते हुए सरगुजा क्षेत्र रेल संघर्ष समिति ने मंगलवार को पदयात्रा निकालने के बाद शहर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करके अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन क्यों जरूरी है, इस विषयवस्तु पर प्रकाश डाला।
पत्रकारों से अपनी बातों को साझा करते हुए मुकेश तिवारी ने कहा कि आजादी के 78 वर्षों में 18 सरकारें और 41 रेलमंत्री देखे लेकिन अंबिकापुर को वृहत्तर रेल के नेटवर्क से जोड़ने की महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर अब तक काम नहीं हुआ है, जिस कारण इसे सबसे लम्बे समय से लंबित रेल परियोजना होने का गौरव प्राप्त है। इस दौर में मध्य प्रदेश में 14 और छत्तीसगढ़ में 3 मुख्यमंत्री बदल गए, 1935-36 से बरवाडीह रेलवे लाइन का संदिग्ध सर्वे चल रहा है। इस रेलवे लाइन को अभी तक किसी ने उपयोगी नहीं माना है। संसद में प्रश्नकाल के दौरान दर्जनों प्रश्न पर चर्चा की गई, जो लब्बोलुआब साबित हुआ। योजना आयोग ने तो 1960 के बाद इसे घाटे का प्रोजेक्ट मानकर कभी पंचवर्षीय योजना में शामिल ही नहीं किया। बात करें अंबिकापुर-रेणुकूट रेलमार्ग की, तो इस रेल लाइन को हर वर्ग के लोग उपयुक्त मान रहे हैं, इसका प्रत्यक्ष तौर पर लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। इसके बाद भी वर्ष 2024-25 के बजट में प्रावधान बनाने की कोशिश भी नहीं की गई। कोशिश है कि आगामी सत्र के बजट में इस रेलवे लाइन के लिए बजट में प्रावधान बने, इसके लिए नेताओं और जनप्रतिनिधियों को भी ईमानदार प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा बरवाडीह सिंगल रेलवे लाइन सर्वे सिर्फ भ्रमित करने का षड्यंत्र है, जबकि 12 बार से अधिक इस रेल मार्ग को लेकर सर्वे हो चुका है। आठ रेलमंत्री बरवाडीह रेल मार्ग को अलाभकारी बता चुके हैं, कोल इंडिया का भी इस रेल मार्ग को लेकर किसी प्रकार का इंट्रेस्ट नहीं है। बड़ी बात यह है कि इस इलाके के रेल थाना क्षेत्र में डकैती, लूट, चोरी, अपहरण, एसिड अटैक, हत्या, ट्रेन हाइजेक जैसे काण्ड हो चुके हैं, जिस पर पुलिस ने अपराध भी पंजीबद्ध किया है।
गुड्स ट्रेन है आय प्राप्ति का माध्यम
वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज तिवारी ने कहा कि सरकार के सामने विकल्प के तौर पर अंबिकापुर-बरवाडीह और अंबिकापुर-रेणुकूट रेल मार्ग है। सवारी गाड़ी से रेलवे की कमाई नहीं होगी, गुड्स ट्रेन आय प्राप्ति का माध्यम है। छत्तीसगढ़ में पर्याप्त मात्रा में खनिज सम्पदा है। रेणुकूट में एशिया का सबसे बड़ा हिंडाल्को एल्युमिनियम प्लांट है। ऐसे में रेणुकूट व्यापार का वहीं बनारस शिक्षा का हब है, जहां विदेशों से पढ़ने के लिए लोग आते हैं। चिकित्सा सुविधा, टूरिज्म के लिहाज से बनारस लोगों का आना-जाना होता है। धार्मिक दृष्टिकोण से भी लाखों की संख्या में लोग बनारस की यात्रा करते हैं। ऐसे में अंबिकापुर-रेणुकूट रेलवे के लिए तो फायदेमंद है ही, काराबारियों के आय का मार्ग भी प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि अभी तक पढ़ने वाले बच्चे रायपुर तक ही सीमित हैं, वे बनारस की ओर उच्च शिक्षा के लिए रूख कर सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड के नेता जब बड़ी मांग को राष्ट्रीय नेताओं के समक्ष रखकर मौके पर पूरा करा सकते हैं, तो सरगुजा के नेता अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन की मांग को क्यों नहीं पूरा करा सकते।
जनप्रतिनिधि मजबूती के साथ मांग उच्च स्तर पर रखें
बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी व विचारक, चिंतक प्रभुनारायण वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी तक लोगों की पहुंच आसान हो, इस ओर नेताओं को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज शिक्षा रायपुर, दुर्ग, भिलाई पर आश्रित है। अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन की सुविधा मिलने से चिकित्सा, शिक्षा, व्यापार के लिहाज से कई आप्शन लोगों के पास रहेंगे। कई लोग अपने स्वजन का अंतिम संस्कार बनारस ले जाकर करते हैं। इन सभी पहलुओं को देखते हुए बनारस से अंबिकापुर और छत्तीसगढ़वासियों का कनेक्टिविटी बनना जरूरी है। इससे जनसुविधा तो मिलेगी ही, रेलवे के लिए यह मार्ग घाटे का सौदा नहीं होगा। जनप्रतिनिधि मजबूती के साथ मांग उच्च स्तर पर रखें ताकि मौके पर ही अंबिकापुर-रेणुकूट रेलवे लाइन की स्वीकृति मिल सके। हम सबकी आवाज शक्तिशाली हो, ताकि प्रदेश स्तर से इस मांग को मजबूती मिल सके।
सरगुजा क्षेत्र रेल संघर्ष समिति ने अंबिकापुर-रेणुकूट रेलमार्ग की मांग को लेकर की पदयात्रा
सरगुजा क्षेत्र रेल संघर्ष समिति ने मंगलवार 8 जुलाई को अंबिकापुर-रेणुकूट रेलमार्ग की मांग जल्द से जल्द पूरी करने की मांग को लेकर शहर के महामाया चौक से घड़ी चौक तक पदयात्रा निकालकर रेलमंत्री के नाम, कलेक्टोरेट में ज्ञापन सौंपा। पदयात्रा में काफी संख्या में गणमान्यजनों की उपस्थिति रही। पदयात्रा में शामिल लोग अंबिकापुर-रेणुकूट रेल मार्ग की मांग पूरी हो, लिखी तख्तियां लेकर चल रहे थे। इस पदयात्रा में स्वस्फूर्त कई गणमान्यजन सहभागी बने।
पदयात्रा में चेम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश मंत्री गोपाल अग्रवाल, व्यापारी संगठन कैट के जिलाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज तिवारी, जनार्दन त्रिपाठी, अयोध्या हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत वेदांती महाराज, अभिषेक सिंह, कांत दुबे, मंगल पांडेय, प्रभुनारायण वर्मा, अजय तिवारी, कैलाश मिश्रा, कान्हा अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अमित बंसल, ऋषि अग्रवाल, एपी दीक्षित, विजय सोनी, शिवेश सिंह, प्रकाश साहू, जितेंद्र सिंह, विनीत सेठी, मुकेश तिवारी, वेदांत तिवारी, नगीना सिंह, परमानंद तिवारी, दीपक गर्ग, सुजीत सिंह, रमेश द्विवेदी, प्रियेश अग्रहरि, राहुल त्रिपाठी, अंचल ओझा, दिनेश तिवारी, निशिकांत भगत, सुभाष गुप्ता, पंकज चौधरी, राकेश शुक्ला, राघवेंद्र सिंह, प्रदीप शुक्ला, विमलेश, सक्षम गुप्ता, मनीषा सिंह, हनी गुप्ता, पूजा पांडेय, शुभांसी पात्रा, उज्ज्वल तिवारी, मनोज भारती, कैलाश ठाकुर, रवि तिवारी, योगेश सोनी, संजय सोनी, शुभम जायसवाल, अंशुल सिंह, विवेक श्रीवास, शिवराज सिंह, राहुल गुप्ता, अमन श्रीवास्तव, मुकेश दुबे, सुनील साहू, समित मुंडा, रमेश साहू, निशांत जायसवाल सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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