29 करोड़ साल पुरानी धरोहर को संरक्षित करने व संवारने हेतु दिल्ली में मिला डीएफओ मनीष कश्यप को नेक्सस ऑफ गुड अवॉर्

मनेन्द्रगढ़ का गोंडवाना मेरीन फॉसिल्स पार्क बना राष्ट्रीय मॉडल

मनेंद्रगढ़ (एमसीबी)। छत्तीसगढ़ के वनमंडल मनेंद्रगढ़ को वनमंडलाधिकारी मनीष कश्यप की कुशल कार्य क्षमता के कारण राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है। मनेन्द्रगढ़ वनमंडलाधिकारी मनीष कश्यप को उनके अभूतपूर्व नवाचार और संरक्षण कार्यों के लिए देश की राजधानी दिल्ली में प्रतिष्ठित नेक्सस ऑफ गुड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें विशेष रूप से गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क के संरक्षण और उसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए दिया गया है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बनाई है। यह सिर्फ एक अधिकारी का सम्मान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक विकास के मॉडल को मिली एक बड़ी स्वीकृति है। मनेंद्रगढ़ में विकसित 29 करोड़ वर्ष पुराने एशिया का सबसे बड़ा गोंडवाना मेरीन फॉसिल्स पार्क को संवारने और पहचान दिलाने हेतु आईएफएस मनीष कश्यप को नेक्सस ऑफ़ गुड फाउंडेशन अवॉर्ड्स 2025 से दिल्ली में सम्मानित किया गया। पिछले वर्ष भी अपने नवाचार “महुआ बचाओ अभियान “के लिए भी डीएफओ कश्यप को सम्मानित किया गया था। अवार्ड के लिए प्रतिभागियों का चयन यूपीएससी के रिटायर्ड चेयरमैन आईएएस दीपक गुप्ता के कमेटी द्वारा किया गया। नेक्सस ऑफ गुड फाउंडेशन रिटायर्ड आईईएस और आईपीएस अधिकारियों की संस्था है जो देश के अधिकारियों और संस्थाओं के नवाचार कामों को विभिन्न स्तर पर सराहने और हाईलाइट करने का काम करती है। इस वर्ष के अवार्ड सेरेमनी के चीफ गेस्ट बी. के. चतुर्वेदी ( रिटायर्ड आईईएस और भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी) रहे।इस वर्ष कुल 150 नवाचार कामों के लिए आवेदन आए।देश के कई अधिकारियों और संस्थाओं को हेल्थ, एजुकेशन, कृषि, प्रशासन, समाज सेवा, महिला उत्थान, इत्यादि के लिए कुल 26 नवाचार काम को अवार्ड के लिए चुना गया। मनेन्द्रगढ वनमंडल के डीएफओ मनीष कश्यप को पर्यावरण संरक्षण केटेगरी में स्थान मिला। पिछले वर्ष घटती महुआ संख्या के पुनरुत्पादन बढ़ाने के लिए “ महुआ बचाओ अभियान” के लिए भी डीएफओ मनीष कश्यप को अवार्ड से सम्मानित किया गया था। गोंडवाना मेरीन फॉसिल्स पार्क अब टूरिस्ट का पसंद बन रहा है । ज्ञात हो कि मनेंद्रगढ़ में स्थित गोंडवाना मेरीन फॉसिल्स पार्क एशिया का सबसे बड़ा मेरीन फॉसिल्स पार्क है और देश में ऐसे सिर्फ 5 स्थल है जहाँ मेरीन फॉसिल्स पाये जाते है। इसकी खोज 1954 में हुई थी पर इसको टूरिस्ट स्थल के रूप में पहचान नहीं मिल पायी थी। इस ऐतिहासिक धरोहर को वन विभाग ने संरक्षण के साथ साथ संवारने का काम किया। वहां प्राकृतिक रूप से मौजूद ग्रेनाइट के पत्थरों में पुरातन काल के 35 जानवरों और डायनासोरों की मूर्ति उकेरी गई।कैक्टस गार्डन, इंटरप्रिटेशन सेंटर और हसदेव नदी में बोटिंग चालू किया गया। आज यह पार्क मनेंद्रगढ़ ज़िले को पहचान दिला रहा है।अप्रैल 2025 में उद्घाटन के बाद अब तक इसे देखने 13 हज़ार से ज़्यादा टूरिस्ट आ चुके है।मध्यप्रदेश से भी पर्यटक इसके लिए आकर्षित हो रहे हैं। भविष्य में ये संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। सरगुजा संभाग में पर्यटक मैनपाट घूमने के लिए ही आते हैं, पर गोंडवाना मेरीन फॉसिल्स पार्क भी अब टूरिस्ट का पसंद बनते जा रहा है। डीएफओ मनीष कश्यप ने मनेंद्रगढ़ वन मंडल के तहत स्थित करोड़ों साल पुराने गोंडवाना मेरीन फॉसिल्स पार्क को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उनके नवाचार के परिणामस्वरूप, यह पार्क अब सिर्फ दुर्लभ फॉसिल्स के संरक्षण का केंद्र नहीं रहा, बल्कि एक तेजी से उभरता हुआ इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन भी बन गया है। फाॅसिल्स पार्क में अब तक 13 हज़ार से अधिक पर्यटक पहुँच चुके हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और सफल मॉडल को दर्शाता है। राष्ट्रीय स्तर पर डीएफओ मनीष कश्यप को मिला सम्मान इस बात का प्रमाण है कि फॉसिल्स पार्क में किया गया कार्य ‘संरक्षण के साथ विकास’ का बेहतरीन उदाहरण है। ​यह दूसरी बार है जब मनीष कश्यप को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। इससे पहले, उन्हें ग्रामीणों के हित में चलाए गए ‘महुआ बचाओ अभियान’ के लिए भी दिल्ली में सम्मान मिल चुका है। वर्तमान में, वे ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘लाख क्रांति अभियान’ चला रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वनमंडल के ग्रामीण लाख उत्पादन से जुड़कर स्थानीय रोज़गार प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। अवॉर्ड मिलने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए डीएफओ मनीष कश्यप ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ मेरे व्यक्तिगत प्रयास का फल नहीं है, बल्कि मनेंद्रगढ़ वनमंडल की पूरी टीम और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोगात्मक भावना का परिणाम है। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है कि प्रकृति और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करना और साथ ही वनोपज आधारित रोजगार के अवसर पैदा कर स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना। गोंडवाना मेरीन फॉसिल्स पार्क को मिली पहचान हमारे इस दृष्टिकोण को और मजबूत करती है कि सही दिशा में किए गए छोटे नवाचार भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़े बदलाव ला सकते हैं। ‘लाख क्रांति’ जैसे अभियान ग्रामीणों को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं, और यही हमारी सबसे बड़ी सफलता है। आगे की राह यह सम्मान न केवल मनेंद्रगढ़ वनमंडल, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणास्रोत है। यह दर्शाता है कि प्रशासनिक नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी से किस तरह संरक्षण, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक साथ मजबूत किया जा सकता है।

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