विवि में सेवारत ठेका कर्मचारियों को साप्ताहिक-राष्ट्रीय अवकाश का नहीं मिल रहा लाभ

 ठेकेदार पर नियम विरूद्ध कटौती करके नकद वेतन देने सहित लगाये गंभीर आरोप

ग्राम भकुरा से पहुंचे ग्रामीणों ने कलेक्टर व श्रम पदाधिकारी को सौंपा शिकायत पत्र

अंबिकापुर। कलेक्टोरेट की सीढ़ियों में भरी गर्मी में छोटे बच्चों के साथ बैठे महिला-पुरूष संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय, ग्राम भकुरा परिसर में सुरक्षा गार्ड और स्वच्छक का काम ठेके पर कर रहे हैं, इन्हें 3 माह का वेतन अप्राप्त है। वेतन के लिए ठेकेदार का कई चक्कर काटने के बाद उन्हें सिर्फ मानसिक अशांति मिली। इनके द्वारा ठेका कंपनी के कर्ताधर्ता पर आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है, और कहा है कि ठेका संस्था ‘निर्भर इंटेलिजेंट सुपर सर्विसÓ द्वारा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, बंधुआ श्रम उन्मूलन जैसे नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। मंगलवार को कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों ने इसकी शिकायत सरगुजा कलेक्टर के जनदर्शन और श्रम पदाधिकारी से लिखित में की है। ग्रामीणों ने मांग की है, कि उन्हें विश्वविद्यालय प्रबंधन अपने अधीन किया जायेे, ताकि वे बिना किसी तनाव के अपना काम कर सकें।

कलेक्टोरेट पहुंचे ग्राम भकुरा के नीरज, लोकनाथ, मुकेश पैकरा, बजरंग सिंह, शिव प्रसाद, प्रदीप कुमार, तारामुनि, श्वेता सिंह, शबनम, महेश्वरी, अंजू पैकरा सहित अन्य ने बताया कि वे संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय के नवीन परिसर ग्राम भकुरा में सुरक्षा एवं स्वच्छता कर्मी के रूप में बाह्य स्त्रोत एजेंसी ‘निर्भर इंटेलिजेंट सुपर सर्विसÓ अंतर्गत सेवा दे रहे हैं। आरोप है कि ठेकेदार आरके शुक्ला के द्वारा श्रम मानकों व नियत कार्य अवधि का खुला उल्लंघन करते हुये उनसे 8 घंटे की जगह प्रतिदिन 12 घंटे की ड्यूटी ले रहा है। विगत 4 माह से उन्हें किसी भी प्रकार का साप्ताहिक अवकाश या राष्ट्रीय अवकाश प्रदान नहीं किया गया है, जो बंधुआ श्रम पद्धति उन्मूलन अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक संज्ञेय अपराध है। बताया गया है कि, संविदा श्रमिकों को विगत 3 माह से उनके द्वारा निष्पादित कार्य का वैधानिक पारिश्रमिक प्रदाय नहीं किया गया है, जिससे उनके समक्ष जीवन-निर्वाह को लेकर गंभीर स्थिति बन रही है।

पूर्व में कुलसचिव को भी कराया अवगत

ठेका कर्मचारियों ने बताया कि, ठेकेदार के द्वारा राज्य शासन द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी दरों को दरकिनार करके मात्र 6500 रुपये प्रतिमाह नकद भुगतान किया जाता है। इसके अलावा विधिक रूप से अनिवार्य बैंक खातों में भुगतान न करके, नकद लेन-देन किया जाता है। इन्होंने भविष्य निधि एवं कर्मचारी राज्य बीमा की राशि में भारी वित्तीय गबन का आरोप लगाते हुये पूर्व में कुलसचिव को भी लिखित में साक्ष्यों के साथ इससे अवगत कराया था। इन कर्मचारियों ने ठेका एजेंसी के वित्तीय व हाजिरी दस्तावेजों को जब्त करके ईपीएफ, ईएसआई तथा भर्ती के समय लिये गये 4000 रुपये की जांच करके विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

सेवा समाप्ति की मिलती है धमकी

सुरक्षा कर्मियों और स्वच्छकों का आरोप है कि, ठेकेदार द्वारा सीधे-साधे आदिवासी ग्रामीणों को नियोजन पर रखने तथा सेवा निरंतरता बनाए रखने के एवज में 4000 रुपये प्रति व्यक्ति लिया गया है। राशि लेने के बाद भी गई लोगों को सेवा में नहीं रखा गया। कई स्थानीय व पुराने कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के क्षतिपूर्ति राशि दिये बगैर सेवा से हटा दिया गया, जो औद्योगिक विवाद अधिनियम की प्रक्रियाओं के विरूद्ध है। जब भी उनके द्वारा विधिक पारिश्रमिक या न्यूनतम अधिकारों की मांग की जाती है, तो ठेका प्रबंधन द्वारा सेवा समाप्ति की धमकी दी जाती है। इन्हें शिकायत के बाद ठेकेदार के द्वारा सेवामुक्त करने का भय भी सता रहा है।

ठेका कर्मचारियों ने की यह मांग

विश्वविद्यालय में सेवा रहे सुरक्षा गार्डों और स्वच्छकों ने ठेका एजेंसी को विगत 3 माह का बकाया पारिश्रमिक शत-प्रतिशत भुगतान करने तथा भविष्य के समस्त वेतन भुगतान अनिवार्य रूप से श्रमिकों के बैंक खातों में करना सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके अलावा श्रमिकों से नियमानुसार 8 घंटे कार्य लेने, साप्ताहिक अवकाश बहाल करने, नियत अवधि से अतिरिक्त कार्य कराये जाने पर श्रम नियमों के तहत दोगुना दर से भुगतान करने व वैधानिक शिकायत दर्ज कराने पर बदले की भावना से किसी की छंटनी या सेवा समाप्ति जैसा कदम ठेका प्रबंधन न उठाये, इसके लिये अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने का आग्रह किया गया है। इसके अलावा पूर्व में जिन श्रमिकों को बिना किसी वैधानिक प्रकिया के सेवा से पृथक किया गया है, इन्हें सवेतन कार्य पर पुर्नबहाल करने की मांग की गई है।

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