दतिमा मोड़/सूरजपुर(अनुप जायसवाल)- बिजली, पानी ये हम इंसानो के लिए एक मुलभूत जरूरत है, इसकी आपूर्ति लगभग भारत के गांव-गांव, नगर-नगर पहुँच चुकी है हालांकि अभी भी कुछ ऐसे गांव है जिन्हें निरंतर असमानता का शिकार होना पड़ता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 भी यही बताता है कि किसी व्यक्ति को उसके जीवन और निजता की स्वतंत्रता है पर क्या भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 सूरजपुर विकासखंड के अंतर्गत कुन्दा बस्ती ग्राम पंचायत में स्थित बगिया डाढ़ में प्रयोज्य है, क्या मुलजरूरतो के लिए बगिया डाढ के निवासियों को अब भी इंतेज़ार करना होगा? गांव में बीते 30 सालों से पानी की कोई स्थाई सुविधा नही हुई है, गरीबी की मार इन पर इनके ही अधिकारों से इन्हें दूर करती जा रही है। बगिया गांव में 7 परिवार रहते है और 7 घरों में आज तक बिजली की कोई पुख्ता व्यवस्था नही है और पानी की भी कोई ठोस व्यवस्था न होने की वजह से मजबूरन इन 7 परिवारों को गांव में एक डबरा है उसी से पानी पीना पड़ता है, उस डबरा का पानी तो वहाँ के जानवर भी नही पीते है। अब आप अंदाजा लगा सकते है कि इन सातों परिवारों की स्वास्थ्य व्यवस्था कैसी होगी, इनके बच्चो को क्या अन्य बच्चो की तरह वो पोषण मिल रहा होगा क्योंकि इन 7 परिवारों में ज्यादा लोगो के पास राशन कार्ड भी नही है, जिससे वे अपने महीने के राशन को उठा सके, आज जब लॉक डाउन है काम बंद है तो इस समय बगिया गांव के निवासी कैसे अपना गुजारा कर रहे होंगे ? आज जब मूलजरूरतो पर लोगो का खासा ध्यान है वही दूसरी तरफ 30 सालो से बगिया डाढ़ के निवासियों के मूल अधिकारों पर क्यू न किसी सरकार का ध्यान गया, क्यू न किसी सरकारी तंत्र का ध्यान गया। क्या इसे हम सरकारों की विफलता कहे या इन निवासियों की बुरी क़िस्मत।

हालांकि इनके कष्टो के निर्वाण की थोड़ी सी आशा जगी थी, कुछ दिनों पहले गांव में पानी की व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए बोरवेल वाली मशीन आई थी पर वनविभाग के सिपाहियों द्वारा इस कार्य को बाधित किया गया। क्या वनविभाग को ये ख्याल नही आया होगा कि बोरवेल उन 7 घरों की 30 सालो से चली आ रही समस्या के निर्वाण के लिए अग्रसर था, बोरवैल ने आधा अधूरा काम कर उनके कष्टो पर नमक छिड़कने का काम किया। अब मजदूरी करने वाले लोग जो भारत के निर्माण और विकास में बढ़ चढ़ कर योगदान करते है, लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि उन्हें ही अपने मूलाधिकारों से दूर रखा जाता है, क्या उन्हें जीवन का अधिकार नही है? ये सवाल हमे अपने तंत्र व्यवस्था से जरूर पूछना होगा।

इस संबंध में सूरजपुर जिले के कलेक्टर श्री दीपक सोनी जी से बात की गई उन्होंने इस समस्या को जल्द से जल्द निराकरण करने की बात कही।

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