स्वर्गीय बिसाहू दास महंत की जयंती पर कांग्रेस जनों ने वृद्धा आश्रम में किया फल वितरण

मनेंद्रगढ़ (एमसीबी) । एमसीबी जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ में कांग्रेस जनों के द्वारा स्वर्गीय बिसाहू दास महंत की जयंती पर वृद्धा आश्रम में फल वितरण किया गया । कांग्रेस जनों ने स्वर्गीय बिसाहू दास महंत की छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की । इस दौरान भरतपुर सोनहत विधायक गुलाब कमरों, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राजकुमार केसरवानी, सांसद प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह मखीजा, वरिष्ठ कांग्रेसी हारून मेमन, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी शहर के अध्यक्ष राजेश शर्मा, प्रवक्ता शुध्दूलाल वर्मा, सौरभ मिश्रा, राजेश सिंह, संतोष अग्रवाल, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष हाफिज मेमन, संकेत शर्मा, राखी सिंह, शगुफ्ता बख्श, ममता सोनी, ज्योति मजमुदार सहित काफी संख्या में कांग्रेस जन उपस्थित रहे । इस अवसर पर भरतपुर सोनहत विधायक गुलाब कमरों एवं पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राजकुमार केसरवानी ने स्वर्गीय बिसाहू दास महंत के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्व. बिसाहू दास महंत का जन्म 01 अप्रैल 1924 को छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के ग्राम सारागांव में हुआ था। उनका जन्म छोटे किसान परिवार में हुआ था। जीवन संगिनी धर्मपत्नी जानकी देवी, दो पुत्र चरण दास महंत और राजेश महंत तथा चार बेटियों सहित संस्कारिक सुखी व समृद्ध परिवारिक विरासत थी। संत शिरोमणी कबीर साहेब के अनन्य अनुयायी रहे। जिसका गहरा प्रभाव उनके जीवन पर पड़ा। शिक्षा और संस्कार पर विशेष ध्यान और जोर देते थे। पढ़ने और लिखने का काफी शौक था। 1942 और 1947 के बीच अपने कॉलेज जीवन में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और इस वजह से सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और उनकी छात्रवृत्ति को भी खारिज कर दिया था। सामाजिक सरोकार उनके स्वभाव व जीवन का एक अभिन्न हिस्सा था । लोगों से मिलना जुलना उनके दुःख- सुख में शामिल होना अपने आसपास के लोगों की यथायोग्य मदद करना, अन्याय का सामूहिक ग्रामीण जन शक्ति के साथ विरोध करना, सामाजिक सरोकार को जीना उनके स्वभाव व जीवन का एक अभिन्न हिस्सा था। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी उनके आदर्श रहे। राष्ट्रीय स्वतंत्रता और समाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, चिंतन, विमर्श और चर्चा दैनिक जीवन चर्या थी। गांव और आसपास के लोग उनके व्यवहार, सदाचरण, सोच, बुद्धिमत्ता और सेवाभाव से बहुत प्रभावित थे। यही आचरण और व्यवहार ने बिसाहुदास महंत को उनका (ग्रामीण जनों का) एक स्वाभाविक जन नेता बना दिया था। बिसाहूदास महंत की राजनीति में कोई विशेष रुचि नहीं थी। लेकिन उनके व्यक्तित्व ने कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व को बहुत प्रभावित किया और देश की आजादी के बाद सन 1952 में पहलीबार नया बाराद्वार क्षेत्र से विधायक चुने गए। । तब से आजीवन 1978 तक विधायक और मंत्री रहे। सन 1967 से 1978 तक उनका चुनाव क्षेत्र चांपा रहा। 23 जुलाई 1978 को लगभग 54 वर्ष की उम्र में गृहनिवास सारागांव जिला जांजगीर चांपा में दीर्घ अस्वस्थता एवं हृदयाघात से निधन हो गया। सांसारिक जीवन को अलविदा कह गए। संत कबीर की वाणी को आत्म सात करते हुए बहुत ही शांत मुद्रा में अपनी करनी – रहनी को यहीं संसार में निर्लेप भाव से छोड़कर बिना किसी वाद विवाद, दाग या बुराई के “ज्यों कीं त्यों धर दीन्हीं चदरिया”। लेकिन आज भी उनका व्यक्तित्व और कृतित्व राजनीति व सामाजिक जगत के लिए पथ प्रदर्शक है। गौरवशाली धरोहर और विरासत है। स्व. बिसाहु दास महंत की विरासत को उनके सुपुत्र डॉ चरण दास महंत पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं और उसे समृद्ध कर रहे हैं। शांत, सरल और शालीन स्वभाव के चरण दास महंत पिता के संस्कार, आदर्श, अनुशासन, अध्यात्मिक ज्ञान, गुरू संत शिरोमणी श्री कबीर साहेब के प्रति संपूर्ण समर्पण, सामाजिक सरोकार,लेखन, पठन और छोटे बड़े सभी के प्रति समान आदर भाव, ‘ न काहू से दोस्ती न काहू से बैर ‘ (कोई विरोधी नहीं, कोई शत्रु नहीं ) सभी के प्रति मित्रवत व्यवहार उन्हें अतिशीघ्र एक आदर्श और सफल राजनेता के रूप स्थापित कर दिया। इसी सदाचरण और व्यवहार से लोग उनमें उनके पूज्य पिताश्री स्व. बिसाहु दास महंत की छवि देख सुखद स्मृतियों का अहसास करते हैं। सुपुत्र डॉ चरण दास महंत छत्तीसगढ़ विधान सभा के अध्यक्ष पद पर आसीन हैं। कुलवधु श्रीमती ज्योत्सना महंत कोरबा लोकसभा सांसद हैं।

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