अंबिकापुर। शहर के रामानुजगंज नाका चौक पर बीते शनिवार की रात तेज रफ्तार ट्रक ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में कार्यरत वंदना मेहता को कुचल दिया। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद विभाग में शोक है, वहीं स्वजन में अधिकारियों के प्रति आक्रोश है।
मृतका केदारपुर निवासी स्वर्ण मेहता और मनीष मेहता की बहन थीं। शनिवार को शासकीय अवकाश था। विभागीय अधिकारियों के बुलावा पर वंदना कार्यालय आई थीं, इसके बाद घर नहीं लौटीं। मृतका के भाई स्वर्ण मेहता का आरोप है कि, दिनभर काम कराने के बाद शाम को अंधेरा होने के बाद उन्हें छोड़ा गया। ने सीधे तौर पर अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
बता दें कि, रामानुजगंज नाका चौक शहर का व्यस्ततम और खतरनाक चौक बन चुका है। शाम ढलते ही यहां अंधेरा पसर जाता है, स्ट्रीट लाइटें या तो बंद रहती हैं या रोशनी पर्याप्त नहीं रहती। इसी अंधेरे का फायदा उठाकर भारी वाहन तेज गति से गुजरते हैं। शनिवार शाम को वंदना कार्यालय से निकलकर ऑटो पकड़ने के लिए चौक पर खड़ी थीं, तभी तेज गति से आ रहे ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। ट्रक की रफ्तार इतनी अधिक थी कि चालक ब्रेक तक नहीं लगा सका।
विभागीय अफसरों की संवेदनहीनता के कारण हुई घटना
मृतका के भाई स्वर्ण मेहता ने आरोप लगाया कि यह घटना विभागीय अफसरों की संवेदनहीनता के कारण हुई है। एक तरफ शासन महिला सुरक्षा और सम्मान की बात करते नहीं थकती है, दूसरी तरफ महिला कर्मचारियों को अवकाश के दिन भी अंधेरे तक कार्यालय में रोक कर रखा जाता है। न तो उनके आने-जाने की कोई व्यवस्था की जाती है और न ही सुरक्षा का ख्याल रखा जाता है। जब शनिवार को अवकाश था, तो किस कार्य की इतनी अनिवार्यता थी कि एक महिला कर्मचारी को शाम तक रोकना पड़ा? स्वजन ने मामले की जांच की मांग की है।
