दतिमा मोड़। भैयाथान विकासखंड अंतर्गत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भटगांव के जर्जर भवन के कक्ष का प्लास्टर गिरने से एक छात्रा चोटिल हो गई। स्कूल में दस कमरे हैं, जिसमें से आठ कमरे पूरी तरह से बदहाल हैं। सभी कमरों के छत से आए दिन प्लास्टर गिरने जैसी घटनाएं होती हैं। कुछ दिन पहले भी एक कमरे के छत का प्लास्टर गिरने से छात्रा चोटिल हो गई है, इसके बाद भी इस ओर जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग का ध्यान नहीं गया है, जबकि यह विद्यालय स्कूल शिक्षा मंत्री के गृह जिले में आता है।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार को कक्षा 12वीं बॉयो की छात्रा दीपा गुप्ता पिता हरिहर प्रसाद गुप्ता स्कूल गई थी। लंच के बाद जैसे ही कक्षा प्रारंभ हुई, छत से प्लास्टर का मलबा छात्रा के ऊपर गिर गया, जिसमें वह चोटिल हो गई। यह खबर क्षेत्र के लोगों तक पहुंची और छात्राओं के स्वजन चिंतित हो उठे। विद्यालय प्रबंधन की ओर से स्कूल की जर्जर स्थिति के बारे में कई बार शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट लिखित में कराया गया है, इसके बाद भी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। विद्यालय की प्राचार्य पुष्पा खलखो ने बताया कि हायर सेकेंडरी स्कूल में 517 बच्चे अध्ययनरत हैं। नवमीं से 12वीं तक के बच्चे आठ कमरे में अध्ययन करते हैं। प्रतिवर्ष विद्यालय की ओर से मुख्य नगर पंचायत अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी और बीईओ को स्कूल की मरम्मत के लिए लिखित में आवेदन दिया गया है लेकिन बच्चों के सुरक्षा की परवाह नहीं की गई, जिससे आए दिन ऐसी घटना की आशंका बनी रहती है।शिक्षा मंत्री के गृह जिले का यह हालशिक्षा विभाग का स्लोगन है सब पढ़ें-सब बढं़े। इस ध्येय को साकार करने में बच्चों की भूमिका अहम है। बच्चों को शाला प्रवेश उत्सवी माहौल में कराया जाता है, इधर बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रतिदिन अपनी जान की बाजी लगानी पड़ रही है। शिक्षा मंत्री के गृह जिले के स्कूल की स्थिति यह है तो अंदाजा लगाया जा सकता है छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था की क्या स्थिति होगी।

ऐसी घटनाएं आए दिन सामने आने के बाद अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।बीते वर्ष भी गिरा था प्लास्टरबीते वर्ष भी कक्षा नवमीं की पढ़ाई के दौरान छत का प्लास्टर गिरा था। इस समय यहां बच्चे थे लेकिन वे बाल-बाल बच गए। किसी को चोट नहीं आई थी। शिक्षकों ने बताया कि स्कूल के कक्ष में प्रवेश के समय से ही हमेशा मन में डर बना रहता है, जिससे बच्चों का ध्यान पढ़ाई के बजाए छत की ओर रहता है।सिर्फ मेंटनेंस से जर्जर भवन का सुधार संभव नहींस्कूल शिक्षा विभाग सभी स्कूलों को नए शिक्षा सत्र के पहले पोताई-मरम्मत करके दुरूस्त कराता है। कई बार निर्माण एजेंसियों को इसकी जिम्मेदारी मिलती है। इस फंड से स्कूल भवन में कितना सुधार हो सकता है, यह तस्वीर स्कूल के छत से गिरते प्लास्टर के रूप में सामने आ रही है। यह स्कूल भवन काफी पुराना है, कई कक्षाओं का मरम्मत कार्य किया गया है लेकिन सीमित राशि होने से भवन की पूरी तरह से जर्जर स्थिति दूर करा पाना संभव नहीं है। पिछले साल मिली राशि से पोताई व मरम्मत कार्य हुआ था। चूंकि सरकारी स्कूलों में बच्चों से विकास शुल्क नहीं लिया जा सकता है, ऐसे में शाला प्रबंधन उक्त काम के लिए विभाग पर ही निर्भर रहता है।बयान-प्राचार्य के माध्यम से इस घटना की जानकारी प्राप्त हुई है मैं तत्काल स्कूल भवन का अवलोकन कराकर रिपोर्ट मंगाया हूं। जल्द ही मरम्मत कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटना ना हो।विनोद रॉयजिला शिक्षा अधिकारी, सूरजपुर

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