अंबिकापुर। एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ राज्य एक नवंबर को अपना 22 वां स्थापना दिवस मानाने जा रहा है वहीं सरगुजा जैसे आदिवासी और वनांचल बहुल जिले का दुर्भाग्य है कि उपभोक्ताओं के न्याय के लिए 18 वर्ष पहले स्थापित अंबिकापुर जिला उपभोक्ता फोरम वर्तमान में रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर उपेक्षा का शिकार है। लगभग 20 माह से पीडि़त उपभोक्ताओं की यहां सुनवाई नहीं हो रही है। कई बार समाचार की सुर्खियों में पीडि़तों की व्यथा आई, सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: इसे संज्ञान में लिया। छत्तीसगढ़ में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में धीमी प्रक्रिया अपनाने को लेकर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बावजूद छत्तीसगढ़ के कई जिले के आयोगों में लगभग 20 माह से अध्यक्ष और सदस्य के पद रिक्त हैं, जिससे सरगुजा की भोली-भाली जनता न्याय के लिए परेशान है। वर्तमान में पीडि़तों की सुनवाई बंद है। उपभोक्ताओं सहित विधि व्यवसाय से जुड़े अधिवक्ता व आमजन भी परेशान हैं। इसे देखते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष योग सरगुजा अंबिकापुर के दो दिवसीय लिंक कोर्ट में बैकुंठपुर से शामिल होने आए अध्यक्ष को छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष के नाम सरगुजा सोसाइटी फॉर फास्ट जस्टिस के अध्यक्ष, ने ज्ञापन सौंपा है और जिले में हो रही उपभोक्ताओं की परेशानी से अवगत कराया है। इसकी जानकारी पंजीकृत डाक से देश के प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रेषित कर दी गई है, जिसमें 10 दिवस के भीतर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के माध्यम से नियुक्ति के आग्रह के साथ उक्त समय-सीमा में पूर्व की भांति नियमित सुनवाई प्रारंभ नहीं होने पर जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष विवश होकर धरना देने का उल्लेख किया गया है। उन्होंने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य के नियमित सुनवाई हेतु गठित जिला उपभोक्ता आयोग बिलासपुर, सरगुजा अंबिकापुर, राजनंदगांव एवं धमतरी सहित छह जिलों में लगभग 20 माह से सुनवाई नहीं हो रही है, जबकि अध्यक्ष और सदस्यों हेतु जनवरी 2022 में चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सभी चयनित अध्यक्ष और 13 में से 5 जिलों के लिए सदस्यों की नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए हैं परंतु सरगुजा सहित छह जिलों में नियुक्ति को प्राथमिकता नहीं देने से उपभोक्ताओं की लगातार उपेक्षा हो रही है।

अधिवक्ता ने प्रधानमंत्री से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के भर्ती की पद्धति और नियुक्ति की प्रक्रिया, नियम 2020 के नियुक्ति की प्रक्रिया कंडिका 6 में नियुक्ति आदेश जारी किए जाने हेतु समयावधि का प्रावधान करने की मांग की है, जिससे उपभोक्ता हितों का सकारात्मक उद्येश्य पूरा हो सके और नए कानून उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में उपभोक्ता के शिकायतों की सुनवाई हो ताकि उन्हें जल्द से जल्द न्याय मिल सके।


डेढ़ वर्ष से क्षतिपूर्ति प्राप्ति का इंतजार
जनवरी 2022 में साक्षात्कार के पश्चात सरगुजा सहित छह जिलों की नियुक्ति नौ माह से रुकी है, जिससे सरगुजा व बलरामपुर जिले के लिए एक मात्र जिला उपभोक्ता आयोग में पीडि़त उपभोक्ताओं के समक्ष गंभीर न्यायिक समस्या खड़ी हो गई है। क्षेत्राधिकार के कारण उपभोक्ता अन्य न्यायालय में भी मामले की सुनवाई हेतु आवेदन नहीं कर सकते हैं। डिक्री धारक, जिन्हें विरोधी पक्षकार से क्षतिपूर्ति प्राप्त करनी है, वे उपभोक्ता निष्पादन की कार्रवाई नहीं होने के कारण डेढ़ वर्ष से न्यायालय से क्षतिपूर्ति पाने के इंतजार में हैं। अंबिकापुर जिला उपभोक्ता आयोग में पूर्व से ही सैकड़ों मामले लंबित हैं, अब नए मामलों का अंबार सुनवाई के अभाव में बढ़ता जा रहा है। बिचौलिए न्याय व्यवस्था से अलग मामलों का निपटारा करने हेतु अनुचित दबाव पीडि़त उपभोक्ताओं पर बना रहे हैं। कई माह पूर्व से दो दिन के लिए लिंक कोर्ट अंबिकापुर में आयोजित होती है, उसमें केवल अध्यक्ष के होने से कोरम पूरा नहीं हो रहा है।

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