सहकारी समिति व बैंक से सीधे जुड़े अन्नदाता किसानों का विश्वास कैसे रहेगा अडिग, उठे सवाल  

भैयाथान। सहकारिता विभाग में नियमों के विपरीत चल रहे कार्य से न सिर्फ विभाग की साख खत्म हो रही है बल्कि इससे जुड़े किसान भी प्रभावित हो रहे हैं। सहकारिता विभाग से जुड़ी सेवा सहकारी समिति एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से अन्नदाता किसान सीधे जुड़े होते हैं और कृषि से जुड़ी सुविधाओं का लाभ प्राप्त करते हैं। बीते कुछ वर्षों में सहकारी बैंक भैयाथान व इसके अंतर्गत आने वाले विभिन्न सहकारी समितियों में हो रही गड़बड़ी के कारण किसान काफी चिंतित व परेशान हैं, इनका बैंक व समिति से विश्वास खत्म होता दिखाई पड़ रहा है।


मामला बीते वर्ष करोड़ों के फसल बीमा घोटाला से लेकर वर्तमान में पशु किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ऋण से जुड़ा है। करोड़ों के फसल बीमा घोटाला के कुछ जिम्मेदार आज भी जेल में हैं, वहीं कुछ दबंग आज भी बेदाग बने घूम रहे हैं और पशु क्रेडिट कार्ड ऋण में बड़ी गड़बड़ी को अंजाम दे रहे हैं। फसल बीमा घोटाला में जांच दल के समक्ष ऐसे दबंगों का नाम खुलकर सामने आया था, अगर तत्समय जांच दल के द्वारा इन पर कार्रवाई की गई होती तो पुन: पशु ऋण के नाम पर राशि बंदरबांट को ये अंजाम नहीं दे पाते।


शिकायत कर्ताओं में दबंगों का भय
हाल में सहकारी समिति शिवप्रसादनगर में नियम विरुद्ध कर्मचारी नियुक्ति व पशु किसान क्रेडिट कार्ड ऋण में फर्जीवाड़ा को लेकर एक युवक ने कलेक्टर से शिकायत करते हुये जांच की मांग की थी, साथ ही सोनपुर समिति अंर्तगत किसानों ने भी ऐसी शिकायत कलेक्टर के जनदर्शन में की थी, जिस पर कलेक्टर ने तत्काल चार सदस्यीय टीम गठित करते हुए जांच का आदेश दिया, इसकी जांच चल रही है और पशु किसान क्रेडिट कार्ड ऋण में हुए गड़बड़ी की पोल खुल रही है। परंतु एक वर्ग ऐसा है जिसे इस जांच का भय सताने लगा है। बताया जा रहा है कि नाम उजागर न हो इस भय से दबंग शिकायतकर्ता पर ऐसा दबाव बनाए कि वह शिकायत वापस लेने का आवेदन प्रस्तुत किया है।


सवालों के घेरे में, बैंक प्रबंधन
वर्ष 2021 में फसल बीमा घोटाले में भैयाथान सहकारी बैंक के तत्कालिक प्रबंधक सहित अन्य कर्मचारियों को जेल जाना पड़ा था, बावजूद इसके बैंक प्रबंधन को सीख नहीं मिली। फिर से ऐसे लोगों के हाथों बैंक की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जिन पर पूर्व में कई आरोप लग चुके हैं एवं कई मर्तबा बैंक से हटाए जा चुके हैं। यही कारण है कि वर्तमान में बड़े पैमाने पर पशु ऋण में गड़बड़ी की जांच चल रही है। सूत्र बताते हैं कि पशु ऋण में हुई गडबडी के कारण जिले के कलेक्टर ने भैयाथान सहकारी बैंक प्रबंधक को हटाने का पत्र बैंक प्रबंधन के उच्च कार्यालय को भेजा है परंतु बैंक प्रबंधन के द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिस कारण बैंक प्रबंधन की भूमिका संदेहास्पद है। एक पक्ष ऐसा भी है जो बैंक प्रबंधन पर पशु ऋण में लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहा है। कहना है कि एक मात्र समिति में लगभग 2.5 करोड़ रुपये बिना जांच-पड़ताल किए स्वीकृत कर भुगतान कर दिया गया है। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि ज्यादातर किसान तो बैंक राशि निकालने गए ही नहीं और उनकी राशि आहरण हो गई, इसकी पुष्टि जांच दल ने प्रारंभिक जांच में की है।


जांच प्रतिवेदन अनुसार होगी कार्रवाई
जिला सहकारी बैंक के सीईओ श्री वर्मा ने कहा कि शिवप्रसादनगर समिति में नियमानुसार पशु ऋण प्रदाय किया गया है। शाखा प्रबंधक के संबंध में कलेक्टर द्वारा जारी पत्र के बारे में उन्होंने कहा कि जांच चल रही है, उनके प्रतिवेदन अनुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।


दोषियों पर होगी कार्रवाई-रामदेव राम
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर के प्राधिकृत अधिकारी रामदेव राम ने कहा कि पशु ऋण के नाम पर एक ही समिति में इतनी बड़ी राशि जारी कर देना लापरवाही को दर्शाता है। मैं तत्काल अधिकारियों को भेजकर जांच करवाता हूं। अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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