लोगों के जान-माल की सुरक्षा का नियमानुसार प्रबंध नहीं होने के बाद भी रेवड़ी की तरह बंट रही एनओसी


अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के लगभग हर जिले में फायर सेफ्टी लगाने के नाम पर अस्पतालों में सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, जिसका खामियाजा असमय मरीज एवं उनके परिजनों, अस्पताल स्टॉफ को जान देकर चुकाना पड़ सकता है। सरगुजा संभाग मुख्यालय की ही बात की जाए तो यहां फायर एनओसी देने का खेल जम कर चल रहा है। शहर के कई अस्पताल ऐसे हैं, जिनके पास फायर एनओसी नहीं है, लेकिन बच्चे के पैदा होने से लेकर आखिरी सांस लेने वाले उम्रदराज तक का ईलाज धड़ल्ले से चल रहा है। अस्पताल प्रबंधक या स्वामी को इन सबसे कुछ लेना-देना नहीं है। इन्हें सिर्फ अपनी कमाई से मतलब है। आग लगने की स्थिति में तो ये सबसे पहले भाग खड़े निकलेंगे और अस्पताल के बाहर खड़े होकर फायर स्टेशन के कर्मचारियों द्वारा आग बुझाने व बचाव कार्य को निहारते नजर आएंगे, जनता मरती है तो मरे।
विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अग्निशमन यंत्र से लेकर फायर पाइप लाइन, फायर अलार्म सिस्टम के समस्त कार्य समस्त शासकीय एवं गैर शासकीय अस्पताल, बैंक, मॉल, होटल, गोदाम में करवाना अनिवार्य है। फायर सेफ्टी के सारे नियमों को दरकिनार कर सरगुजा संभाग से बाहर, रायपुर के एक फर्म संचालक द्वारा गुणवत्ताहीन कार्य बेखौफ कराया जा रहा है। उस फर्म के संचालक एवं फर्म के स्वामी को फायर डिपार्टमेंट के आला अफसरों का पूरा आशीर्वाद मिल रहा है, यह माना जा सकता है? फर्म संचालक के द्वारा फायर सेफ्टी जैसे महत्वपूर्ण कार्य को बड़े आसानी से आधा-अधूरा करवाने के बाद फायर सेफ्टी कार्य का एनओसी दिलवाने का दावा भी करने की बातें सामने आ रही है, जिससे फायर डिपार्टमेंट के अफसरों से जुगलबंदी जैसी बातें हो रही हैं। अस्पताल, होटल, मॉल, गोदाम में फायर सेफ्टी कार्य निमानुसार नहीं होने के बाद भी फायर डिपार्टमेंट के अधिकारी एनओसी जारी कर पंजीरी की तरह बांट रहे हैं। बात तो यहां तक हो रही है कि विभाग के अफसर सिर्फ दलाली और पैसे के दम पर अग्निशमन यंत्र लगे होने की बात कह कर पाइप लाइन, फायर अलार्म सिस्टम लगे होने का अनापत्ति प्रमाण पत्र देने में परहेज नहीं कर रहे हैं। कई अस्पताल में नियमानुसार फायर पाइप लाइन एवं फायर अलार्म सिस्टम लगाने की मात्र खानापूर्ति की गई है, इसके बाद भी अस्पताल के संचालक अपने राजनीतिक रसूख, पहुंच, पैसे के दम पर फायर एनओसी हासिल कर रहे हैं। बता दें विगत वर्षों में छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश में अस्पतालों में आगजनी की घटना से कई लोगों की मौत हो गई, जिसमें बच्चे से लेकर बड़े तक शामिल हैं, इसके बाद भी फायर सेफ्टी कार्य में नियमों को ताक में रखा जा रहा है। तीन से चार मंजिल की ईमारत में संचालित कई अस्पतालों मे आने-जाने के लिए एकमात्र लिफ्ट है, जो आगजनी जैसे हालत में उपयोग नहीं किया जा सकता है। कई अस्पतालों में फायर एग्जिट नहीं है और अस्पताल प्रबंधक बड़े आराम से पैसा छापने में लगे है। इस तरह के कई अन्य अस्पताल, होटल एवं मॉल को फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र नियमानुसार नहीं बल्कि पैसे के दम पर बांटने का लगातार खुलासा हमारे अखबार एवं न्यूज पोर्टल के द्वारा किया जाएगा।
बयान-
फायर सेफ्टी के कार्य समस्त बड़े संस्थानों में नियमपूर्वक होने चाहिए, अगर बिना नियम के कार्य किया जा रहा है तो जांच करवाएंगे और उचित कार्रवाई होगी।
नागेंद्र सिंह
फायर ऑफिसर

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