डेढ़ माह बाद प्रेमी पति के साथ बच्चों को लेने पहुंची बेवा महिला
पुलिस ने कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष महिला का बयान करा बच्चों को सौंपा
पूर्व में नर्स की मिलीभगत से जुड़वा बच्चों को बेचने के लग रहे थे आरोप


अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मातृ एवं शिशु अस्पताल में जन्म के बाद बच्चे को छोड़कर गई बेवा महिला डेढ़ माह बाद मासूम बच्चों को लेने पहुंची, तो पुलिस ने बच्चों को पालन कर रहे लोगों की खोजबीन शुरू की। बच्चों का पालन-पोषण कर रहे दंपती इसके बाद पुलिस चौकी पहुंचे और बच्चों की बरामदगी के बाद महिला का कार्यपालिक दंडाधिकारी के समक्ष बयान दर्ज करा उन्हें बच्चों को सुपुर्द कर दिया। दंपतियों को डेढ़ माह बाद बच्चे की किलकारी सुनने को नहीं मिलेगी, इसका भान नहीं था। पूर्व में अस्पताल की नर्स से मिलीभगत कर जुड़वा बच्चों को बेच देने जैसी बातें सामने आ रही थी, लेकिन इस कहानी का पटाक्षेप ऐसा हुआ कि पुलिस भी किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं कर सकी और न ही मामले में किसी प्रकार का अपराध महिला की ओर से दर्ज कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक जशपुर जिले के पत्थलगांव थाना क्षेत्र की एक बेवा महिला पति की मौत के बाद एक व्यक्ति के प्रेमजाल में फंस गई थी, दोनों के अंतरंग संबंध के बीच अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 25 मई को जुड़वा बच्चों को जन्म हुआ। बच्चों (लड़कों) को जन्म के बाद कमजोर होने की स्थिति में अस्पताल के एसएनसीयू में रखा गया था। बताया जा रहा है कि महिला का प्रेमी बच्चों को तत्समय साथ ले जाने के लिए तैयार नहीं था, ऐसे में ननद और भाभी बच्चों की देखभाल कर रहे थे। बच्चों के स्वस्थ होने के बाद जब उन्हें घर ले जाने की स्थिति बनने लगी तो उन्होंने बच्चों को जन्म देने वाली बेवा महिला को इसकी जानकारी दी। बात नहीं बनी तो उसकी सहमति से बच्चों को पालन-पोषण के लिए अंबिकापुर के गंगापुर मोहल्ले में व कोरबा के एक नि:संतान दंपती के सुपुर्द कर दिया। डेढ़ माह बाद बच्चों को जन्म देने वाली मां की ममता जागी और वह अपने प्रेमी के साथ अंबिकापुर आकर मासूम बच्चों को लेकर चली गई है, जिससे एक माह तक बच्चे का पालन-पोषण करते घर में किलकारी की गूंज सुनने की चाहत रखे दंपतियों की खुशियां काफूर हो गई। पुलिस ने कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष महिला का बयान दर्ज करवाया है।
रिपोर्ट दर्ज कराने से इन्कार की महिला
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में मामले की जांच में लगे मणिपुर पुलिस चौकी के प्रभारी सरफराज फिरदौसी ने बताया कि महिला स्थानीय स्तर पर थाने में किसी के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने तैयार नहीं थी। महिला का कहना था उसका प्रेमी, बच्चों के साथ उसे रखने के लिए तैयार है। बच्चे को बेचने-खरीदने की बात की स्वीकारोक्ति भी उसके द्वारा नहीं की गई है। बेवा महिला का कहना है कि प्रेमी तत्समय उसे अपनाने के लिए तैयार नहीं था, जिससे वह परेशान थी। इसके बाद वह एसएनसीयू में भर्ती बच्चों को छोड़कर चली गई थी, लेकिन अब ऐसी कोई बात नहीं है। बच्चों को उसकी सहमति से पालन-पोषण के लिए दंपतियों को देना उसने बताया है।
नियमपूर्वक बच्चे को नहीं लिया गोद
पुलिस ने बताया कोरबा के नि:संतान दंपति तक कांतिप्रकाशपुर में रहने वाली एक युवती के माध्यम से जुड़वा बच्चों को उसकी मां के द्वारा घर नहीं ले जाने की बात पहुंची थी, इसके बाद वे बच्चे को लेने अंबिकापुर आए। दंपती बच्चे की बेहतर परवरिश कर रहे थे, उन्हें क्या मालुम था कि एक माह तक जिस बच्चे की परवरिश वे सीने से लगाकर किए हंै, उससे इतनी जल्दी जुदा होना पड़ेगा। पुलिस के मुताबिक नि:संतान दंपती बच्चे को रखने के लिए तैयार थे, लेकिन नियमपूर्वक बच्चे को गोद नहीं लेने के कारण उन्हें बच्चे को उसकी वास्तविक मां के सुपुर्द करना पड़ा। अगर बच्चे की मां के द्वारा किसी प्रकार का आरोप लगाया गया होता, या बच्चे को बेचने की पुष्टि होती तो बच्चों का पालन-पोषण करने वालों के साथ रिश्तेदार व अस्पताल के स्टॉफ भी घेरे में आ सकते थे।

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