वन भूमि से अवैध घरों को वन विभाग गिराया तो बन गया राजनीतिक मुद्द

मनेंद्रगढ़ (एमसीबी)। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां क्षेत्र में ‘चंगाई सभा’ के नाम पर धर्मांतरण का धंधा खूब फल-फूल रहा है। हाल ही में कुछ दिन पहले वन विभाग ने जंगल की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके बने तीन घरों पर बुलडोजर चलाया था। ये तीनों परिवार पूर्व में ही ईसाई धर्म अपना चुके थे और जंगल के बीचो-बीच प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाकर रह रहे थे, जहाँ से वे आसपास के लोगों को धर्मांतरण के लिए उकसाते थे। इन अवैध घरों पर कार्रवाई होते ही अब इसे राजनीतिक का अखाड़ा बना लिया गया है और वन विभाग पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। वन विभाग की कार्रवाई के बाद से ही मुख्य विपक्षी दल के नेता इन लोगों के समर्थन में उतर आए हैं। पहले तो इन लोगों को स्थानीय मंत्री के गाँव में ले जाकर धरना-प्रदर्शन करवाया गया। अब वन विभाग पर दबाव बनाने के लिए वनमंडल कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की गई। हलाकि पुलिस की तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण प्रदर्शनकारी डीएफओ कार्यालय के मुख्य गेट तक नहीं पहुंच पाए। डीएफओ कार्यालय घेरने की मंशा पर पुलिस ने पानी फेर दिया। फर्जी पट्टा दिखाकर लोगों को बरगलाने की भी कोशिश कर वन विभाग पर कार्रवाई वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जिन घरों पर कार्रवाई हुई, वहां धर्मांतरण का काम चल रहा था। बाहर से आकर बसे ये लोग खुलेआम स्थानीय मंत्री के गाँव में ही चंगाई सभा करते थे और स्थानीय लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाते थे। वन विभाग का कहना है कि धर्मान्तरण से कोई लेना-देना नहीं है यह प्रशासनिक कार्यवाही है वन भूमि पर कब्जा कर अवैध रूप से बने घरों को गिराने की कार्यवाही की गई है। जिसे राजनीतिक रंग देकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। वन विभाग का कहना है कि पट्टे की जमीन में बने घर को तोड़ना पूरी तरह से झूठी बात है । अतिक्रमणकारियों को तीन बार नोटिस दिया गया है। वन विभाग द्वारा खड़गवां में राजेंद्र प्रधान, सुलेमान और रामप्रसाद का वन भूमि में अवैध रूप से बने दुकान और मकान को तोड़ने की कार्यवाही की गई है। राजेंद्र प्रधान, सुलेमान/नागेंद्र और रामप्रसाद को तीन तीन बार नोटिस जारी किया गया। पहला नोटिस 03 सितंबर 2024 को दूसरा 21अगस्त 2025 और तीसरा 17 सितंबर 2025 को दिया गया और बाकायदा रिसीविंग भी वन विभाग के पास मौजूद है । यह कहना बिल्कुल गलत है कि वन विभाग ने नोटिस नहीं दिया है। लेकिन जब उन लोगों के द्वारा बेजा कब्जा नहीं हटाया गया तो कार्यवाही करनी पड़ी और इस तरह की कार्यवाही के लिए और भी कई स्थान चिन्हांकित हैं जिसे आने वाले समय में कार्यवाही होगी।

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