गिरजा ठाकुर


छत्तीसगढ़ के रोबोटिक सर्जन डॉ.संदीप दवे ने निश्शुल्क सर्जरी कर 10 पीडि़तों को दी राहत
होलीक्रॉस अस्पताल में सर्जरी के साथ कार्यशाला में पहुंचे विभिन्न संस्थाओं के चिकित्सकों के सवाल का लाउड सिस्टम से देते रहे जवाब
अंबिकापुर। आइएमए अंबिकापुर व रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वाधान में 16 जुलाई, शनिवार को होलीक्रॉस अस्पताल के सभागार में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के लाइव कार्यशाला का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ के पहला फोर्थ जेनरेशन दा विन्सी सर्जिकल रोबोट, रामकृष्ण केयर अस्पताल रायपुर के जाने-माने लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ.संदीप दवे ने सर्जरी के लाइव दौरान उपस्थित चिकित्सकों से संवाद का क्रम लाउड सिस्टम के माध्यम से बनाए रखा और उनके द्वारा किए जा रहे सवालों का जवाब दिया। इस मौके पर उन्होंने दस जटिल आपरेशन लेप्रोस्कोपिक से निश्शुल्क किए। चार माह पूर्व ब्याही एक नवविवाहिता की उन्होंने सर्जरी की, उन्होंने बताया कि महिला को इस ऑपरेशन के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च करना पड़ता। जटिल सर्जरी के परिदृश्य को सभाकक्ष में मौजूद विभिन्न अस्पतालों के चिकित्सक व नर्सिंग स्टॉफ बड़े पर्दे पर देख रहे थे।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बीच चल रहे संवाद के सिलसिले को उन्होंने नहीं रोका बल्कि हर प्रश्न का समाधानकारक जवाब देते नजर आए। डॉ.दवे छत्तीसगढ़ के प्रथम रोबोट के माध्यम से सफल शल्य क्रिया करने वाले चिकित्सक हैं। उनके साथ डॉ.सिद्धार्थ तमस्कर, साढ़े तीन दशक से ओटी टेक्नीशियन के रूप में जुड़े परमानंद यादव, सिस्टर रंजीता व जीजो सहयोगी के रूप में उपस्थित रहे। जटिल ऑपरेशन के बीच कुछ पल के लिए पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि जिस महिला की सर्जरी का परिदृश्य लाइव कार्यशाला में चिकित्सक व नर्सिंग स्टॉफ देख रहे हैं, उस महिला का चार माह पूर्व विवाह हुआ है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी करके उक्त महिला का नया जीवन मिल रहा है। गर्भाशय में 10 सेंटीमीटर से बड़े गठान का लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद यह महिला पुन: मां बन सकती है, जिससे उसके गृहस्थ जीवन की खुशहाली बनी रहेगी। उन्होंने कहा ऐसे मामलों में अधिकतर बच्चादानी निकालने की स्थिति बन जाती है। लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन से इंफेक्शन का चांस एक प्रतिशत से कम रहता है। इस दौरान मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉ.शैलेंद्र गुप्ता भी उपस्थित थे।
डॉ.बियाट्रिस का योगदान उल्लेखनीय-
डॉ.संदीप दवे ने कहा कि होलीक्रॉस अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर को मूर्तरूप देने में डॉ.बियाट्रिस का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जब वे होलीक्रॉस अस्पताल पहुंचे तो आशीर्वाद देने के लिए वे पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि वे अपने एक दिवसीय प्रवास के दौरान यहां लगभग 10 ऑपरेशन करेंगे, जिसका कोई शुल्क मरीज के स्वजनों को नहीं देना पड़ेगा। लेप्रोस्कोपिक से जटिल से जटिल सर्जरी की जा सकती है, इससे अवगत कराने के लिए ही लाइव कार्यशाला आयोजित की गई है, चिकित्सकों के द्वारा किए जा रहे सवाल उनके लिए काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा होलीक्रॉस अस्पताल का ओटी सर्वसुविधायुक्त है। यहां के चिकित्सक हों या स्टॉफ नर्स सभी का पूरा सहयोग उन्हें मिल रहा है। स्वच्छता के मामले में अस्पताल वास्तव में अग्रणी है।
जटिल ऑपरेशन के समय आती हैं डॉ.बियाट्रिस याद-
मिशन अस्पताल की सर्जन डॉ.मधु ने इस मौके पर डॉ.बियाट्रिस को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने होलीक्रॉस अस्पताल को जो पहचान दिलाई है, उसे भुलाया नहीं जा सकता है। वे भले ही सेवानिवृत्त हो गई पर मरीजों का जटिल ऑपरेशन करना हो, तो उन्हें जरूर याद करते हैं। उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में वर्ष 1995 से लेप्रोस्कोपिक सर्जरी डॉ.बियाट्रिस के द्वारा किया जाता रहा है। उन्होंने अपने सेवाकाल में अस्पताल में जो सुविधाएं विकसित की, उसका परिणाम है कि यहां छत्तीसगढ़ के जाने-माने रोबोटिक लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ.संदीप दवे का सान्निध्य उन्हें प्राप्त हुआ है। इनके द्वारा दी जा रही निश्शुल्क लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का लाभ बीते 13 जुलाई से भर्ती महिला सहित अन्य मरीजों को मिलेगा।
सर्जिकल रोबोट एक सेल्फ पॉवर्ड मशीन-डॉ.संदीप दवे ने बताया कि सर्जिकल रोबोट एक सेल्फ पॉवर्ड, स्वत: संचालित तथा कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित मशीन है, इसकी चार भुजाएं होती हैं, जिसमें सर्जरी के औजार एवं कैमरा फिट रहते हैं। कंप्यूटर में सर्जन स्वयं अपने द्वारा की जाने वाली विशिष्ट सर्जरी का संपूर्ण प्रोग्रामिंग बनाकर लगा देते हैं। रोबोट सर्जन के आदेशों का पालन ठीक उसी प्रकार करता रहता है जैसे एक सेवक मालिक का। इसलिए सर्जन और रोबोट के संबंध को कहा जाता है। रोबोट स्वयं कोई निर्णय नहीं लेता बल्कि वह सर्जन द्वारा दिए जाने वाले आदेशों का पालन करता है। रोबोटिक सर्जरी तीन हिस्सों में विभाजित रहती है, कन्सोल, रोबोटिक आर्म, सर्जरी के औजार। सर्जन कन्सोल पर बैठते हैं और मरीज ऑपरेशन टेबल पर लेटता है। कन्सोल तारों के माध्यम से रोबोट की भुजाओं से जुड़ा रहता है। आवश्यक औजारों को रोबोट की भुजाओं में लगाकर मरीज के शरीर में आवश्यकता अनुसार छोटे-छोटे छेदों के भीतर से प्रविष्ट करा दिया जाता है। एक बार सेटअप तैयार हो चुकने के पश्चात सर्जन कन्सोल से अपने हाथ कलाई और उंगलियों की हरकत को रियल टाइम में रोबोट की भुजाओं को एक वीडियो गेम की तरह संचालित करता है। इस प्रक्रिया में रोबोट एक मध्यस्थ का कार्य करता है। फाइबर ऑप्टिक केबल तथा सोक्रेटस जैसे टैली कंप्यूनिकेशन सिस्टम के जरिए इस प्रकार की सर्जरी दुनिया के किसी भी भाग में बैठा हुआ सर्जन सुदूर स्थित किसी सुसज्जित अस्पताल में भी मरीज की सर्जरी कर सकता है जिसे टैलीप्रजेन्स सर्जरी कहा जाता है।

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