-सुनील दास

लोकसभा चुनाव में नेता भी चुनाव लड़ रहे हैं और नेता के परिवार के लोग भी चुनाव लड़ रहे हैं। किसी के लिए पार्टी की जीत सबसे ज्यादा अहम है तो किसी के लिए परिवार के लोगों की जीत ज्यादा अहम है।कहीं परिवार की सीट पर तीसरी चौथी पीढी चुनाव लड़ रही है। कहीं दूसरी तीसरी पीढ़ी चुनाव लड़ रही है। परिवार की सीट है इसलिए जीतना जरूरी है। इसलिए परिवार की जीत के लिए कांग्रेस व सपा के मुखिया ने पार्टी को परिवार को जिताने लगा दिया है। बड़े-बड़े नेता परिवार के लोग को परिवार की सीट पर जितान लगा दिए गए हैं। वहीं भाजपा के बड़े नेता पार्टी को जिताने के लिए अलग अलग राज्यो में प्रचार कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के दो बड़े नेताओं का उदाहरण लें तो राज्य के सबसे बड़े कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को कांग्रेस ने राहुल गांधी को जिताने के लिए रायबरेली भेज दिया है। वही भाजपा ने राज्य के सीएम विष्णुदेव साय सहित तमाम नेताओं का पार्टी के प्रचार के लिए आसपास के राज्य ओडिशा, झारखंड भेजा है। कांग्रेस पूर्व सीएम को परिवार की सीट जीतने में लगाती है और भाजपा अपने सीएम को पार्टी को जिताने में लगाती है।यह अंतर जनता को दिखाई देता है कि कौन परिवार को महत्व देता है और कौन पार्टी के महत्व देता है।

यह अंतर भी जनता को दिखाई देता है पीएम मोदी जब अपने संसदीय क्षेत्र में रोड शो करते हैं तो जनता कैसे उनका स्वागत करती है, कैसे अपनी खुशी जाहिर करती है। इतनी भीड़ दिखती है कि लगता है पूरा काशी स्वागत मे उमड़ पड़ा है। इस भीड़ से पता चलता है कि जनता अपने नेता को कितना प्यार करती है।एक सांसद अपने क्षेत्र में विकास के हर तरह के काम करवाता है तो जनता उसे इसी तरह प्यार करती है। पीएम मोदी अपने क्षेत्र की जनता से बहुत प्यार करते हैं यही वजह है कि जब भी मौका मिलता है काशा आते हैं लोगों से मिलते हैं, विकास कार्य करवाते हैं। दस साल में काशी कितना बदल गई है,इसे नेता को बताने की जरूरत नहीं पड़ती है।इसे जनता खुद बताती है।

जब जनता क्षेत्र के विकास को खुद बताती है तो नेता को फिर वहां चुनाव जीतने के लिए नामांकन भरने आना पड़ता है,चुनाव जीतने के लिए प्रचार करने  के लिए नहीं आना पड़ता है। पीएम मोदी को भरोसा है कि काशी की जनता उन्हे ही जिताएगी,वहीं राहुल गांधी को रायबरेली से जीत का भरोसा नहीं है।क्योकि कांग्रेस ने रायबरेली के विकास के लिए ऐसा कुछ नहीं किया है कि जनता उसे बताए। रायबरेली से राहुल गांधी की हार का डर इसी वजह से है कि रायबरेली का वीआईपी क्षेत्र होने के बाद वैसा विकास नहींं हुआ है जैसा होना था। जैसे काशी का विकास हुआ है वैसा रायबरेली का विकास हुआ होता तो राहुल गांधी को भी हार का डर नहीं होता। बड़े-बड़े कांग्रेस नेताओं को वहां लगाने की जरूरत न होती।

जैसे पीएम मोदी को काशी में जीतने के लिए किसी बड़े भाजापा नेता के प्रचार की जरूरत नहीं है। पीएम मोदी देश या काशी में अपने काम के दम पर चुनाव जीतते है,इसलिए उनको हार का जरा भी डर नहीं होता है। जिस पार्टी ने अपने क्षेत्र में विकास के काम ही नहीं कराएं है, उनको हार का डर होना स्वाभाविक है। जिनको अपनी पार्टी व अपने काम पर भरोसा होता है,वह अपनी जीत का दावा करते हैं जिन लोगों को अपनी पार्टी की मेहनत व काम पर भरोसा नहीं होता है, वह दूसरे की हार की बात करत हैं। यह अंतर भी जनता को साफ दिखाई देता है।

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