स्वास्थ्य मंत्री के गृहक्षेत्र का हाल, सरगुजा जिले के लिए छह मुक्तांजलि वाहन पर्याप्त नहीं  

गिरजा ठाकुर


अंबिकापुर। राजमाता श्रीमति देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर में अधेड़ की मौत के बाद शव ले जाने के लिए मुक्तांजलि वाहन नहीं मिल पाई, न ही अस्पताल प्रबंधन कोई वाहन उपलब्ध करा पाया। चार घंटे शव वाहन का इंतजार करने के बाद स्वजन आठ किलोमीटर की दूरी तय करने ऑटो में शव लेकर रवाना हुए। इसके पहले मुक्तांजलि वाहन की उपलब्धता के लिए स्वजन 1099 में डॉयल करते रह गए, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। अन्य माध्यमों से मुक्तांजलि के प्रभारी से बात करने पर पता चला सभी शव वाहन व्यस्त हैं, इंतजार करना पड़ेगा। विडंबना ही कहा जाए, यह वाक्या वहां का है, जहां स्वयं प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मंत्री टीएस सिंहदेव का निवास है।
जानकारी के मुताबिक अंबिकापुर से लगभग आठ किलोमीटर के फासले पर स्थित ग्राम सरगवां में पावर हाऊस के पास रहने वाले दुर्योधन सिंह 53 वर्ष घर के पास ही गिर पड़े थे, जिसमें उन्हें चोटें आई थी। स्वजन शारीरिक तकलीफ को देखते हुए नौ अक्टूबर को उन्हें शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, यहां उन्हें भर्ती कर लिया गया था। 10 अक्टूबर की दोपहर लगभग एक बजे अंदरूनी चोट का परीक्षण करने चिकित्सक की सलाह पर पीडि़त का एक्स-रे कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट सामान्य आई थी। इलाज के बीच भर्ती मरीज की अचानक देर रात लगभग 11 बजे मौत हो गई। इसकी जानकारी स्वजनों को मिली, तो वे शव घर तक ले जाने के लिए मुक्तांजलि वाहन प्राप्त करने हाथ-पांव मारते रह गए। 1099 में कॉल करने पर नेटवर्क की समस्या आड़े आई। इसके बाद अन्य संपर्क माध्यमों से मुक्तांजलि के प्रभारी संभागीय प्रभारी शैलेंद्र से मोबाइल पर संपर्क करने पर उनके द्वारा सभी वाहनों के शव परिवहन में दूर-दराज के क्षेत्रों में रवानगी की जानकारी देते हुए कम से कम दो घंटे इंतजार करने कहा गया। इनके द्वारा सीतापुर-बतौली क्षेत्र से वाहन के रवाना होने की जानकारी दी गई। स्वजन घर के मुखिया की मौत के बाद शोकाकुल थे, फिर भी उन्होंने देर रात तीन बजे तक शव वाहन का इंतजार किया, बाद में एक हजार रुपये किराए का ऑटो करके शव लेकर गंतव्य की ओर रवाना हुए।
अस्पताल से नहीं मिली वाहन सुविधा
शासकीय अस्पताल में किसी की मौत के बाद शव ले जाने के लिए निश्शुल्क मुक्तांजलि वाहन की सुविधा शासन के द्वारा सुलभ कराई गई है। किसी कारणवश शव वाहन नहीं मिल पाने की स्थिति में अल्टरनेट वाहन की सुविधा अस्पताल से मिल सकती है, लेकिन अस्पताल से भी शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाने की स्थिति में स्वजनों की मुसीबत बढ़ जाती है और उन्हें निजी वाहन की व्यवस्था करने विवश होना पड़ता है।
सरगुजा जिले में छह मुक्तांजलि वाहन
मुक्तांजलि के प्रभारी शैलेंद्र का कहना है कि सरगुजा जिले में शव परिवहन के लिए छह मुक्तांजलि वाहन हैं। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल में आए दिन मरीज दम तोड़ते हैं। स्थिति यह बन जाती है कि शव परिवहन के लिए नंबर लगाकर कई बार गरीब ग्रामीण इंतजार करते हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए कम से कम छह मुक्तांजलि वाहन की जरूरत महसूस की जा रही है।
सीएम ने सम्मान सहित शव व स्वजनों को पहुंचाने दिए हैं निर्देश
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शासकीय अस्पतालों में उपचार के दौरान मृतकों के शव को ससम्मान उनके घर तक ले जाने के लिए पर्याप्त शव वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इस संबंध में उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किया है। जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी जिला कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग एवं स्वयंसेवी संस्थाओं से समन्वय कर पर्याप्त संख्या में शव वाहनों की व्यवस्था करें ताकि मृतक एवं शोकाकुल स्वजनों को ससम्मान उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था हो सके। कई शासकीय अस्पतालों में स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा शव वाहनों की व्यवस्था की गई है, लेकिन शोकग्रस्त परिवार को समय पर मृतक के शव को घर ले जाने के लिए वाहन मुहैया नहीं हो पाता है।

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