रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी) अंतर्राज्यीय कन्हर बैरियर में परिवहन विभाग का चेक पोस्ट खुलने के बाद एक बार फिर विवाद होने लगा है परिवहन आयुक्त के द्वारा दैनिक वेतन भोगियों को रखने के लिए अनुशंसा अभी तक नहीं की गई है परंतु परिवहन नाका खुलने के साथ ही दैनिक वेतन भोगी काम करना प्रारंभ कर दिए हैं जिसे लेकर परिवहन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि पूर्व में संचालित परिवहन चेक पोस्ट में निजी कर्मचारि रखने को लेकर कई बार विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के आदेश के बाद अंतरराज्यीय कन्हर में परिवहन विभाग का चेक पोस्ट प्रारंभ किया गया है परिवहन चेकपोस्ट प्रारंभ होते के साथ ही यह निजी कर्मचारियों के गिरफ्त में आ गया है यहां सिर्फ निजी कर्मचारियों का बोलबाला स्थापित हो चुका है जबकि अभी तक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के रखने के लिए परिवहन आयुक्त के द्वारा कोई भी अनुशंसा नहीं की गई है ऐसे में परिवहन विभाग के द्वारा कैसे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को रखा गया है यह समझ से परे है।


कैसे होगा वेतन भुगतान- परिवहन चेकपोस्ट में आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों को रखा गया है जिनसे कार्य करवाया जा रहा है ऐसे में सवाल उठता है कि इन सभी का वेतन भुगतान कैसे होगा जबकि अभी तक परिवहन आयुक्त के द्वारा वेतन भोगी कर्मचारी रखने के लिए अनुशंसा नहीं की गई है।


निजी कर्मचारी करते हैं वाहन के कागजात चेक – परिवहन चेकपोस्ट का सारा काम निजी कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है जबकि नियमानुसार निजी या दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी वाहनों के कागजात नही देख सकते। चेक पोस्ट प्रभारी तुलसीराम भगत ने बताया की दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की ड्यूटी सिर्फ नाका उठाने एवं गिराने के लिए लगाई गई है वही वाहन मालिकों ने बताया कि लगातार निजी कर्मचारियों के द्वारा वाहन के कागजात की जांच के नाम पर परेसान किया जा रहा है।


परिवहन आयुक्त को लिखा गया है पत्र- परिवहन चेक पोस्ट प्रभारी तुलसीराम भगत ने कहा कि परिवहन आयुक्त को 6 दैनिक वेतनभोगी भोगी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए पत्र लिखा गया है परंतु अभी तक वहां से रखने के लिए अनुशंसा नहीं की गई है।

विवादित निजी कर्मचारी हुए में तैनात- पूर्व में जब आरटीओ चेकपोस्ट संचालित था तब जो निजी कर्मचारी यहा कार्य करते थे जो हमेशा अवैध वसूली के लिए विवादों में रहते थे। यहां तक की वर्षों कार्य करने के बाद भी दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में उनका भुगतान नहीं होता था फिर भी उनका रुतबा आरटीओ अधिकारी से भी बढ़कर रहता था। फिर से उन्ही कर्मचारियों के तैनात हो जाने से एक बार फिर विवाद बढ़ सकता है।

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