बाल कल्याण समिति ने सात बच्चों को तमिलनाडु से लाकर स्वजनों को किया सुपुर्द


अंबिकापुर। सूरजपुर जिले के दुर्गम दुरस्थ क्षेत्र बिहारपुर के बच्चों को कुछ ऐजेन्टों के द्वारा पैसे का लालच देकर तमिलनाडु के सेलम जिला ले जाया गया था। बाल संरक्षण की टीम तमिलनाडु ने सूरजपुर की टीम को इसकी सूचना दी। यहां गए बच्चों का नाम पता मंगाया गया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने तत्काल गृह सत्यापन होने पर बाल संरक्षण की टीम को तमिलनाडु भेजा और वहां के जिला बाल संरक्षण इकाई एवं होम्स से संपर्क कर उन्हें यहां लाने हेतु स्कार्ट नियुक्ति किया। इसी बीच कुछ बच्चों में कोरोना पाजीटिव के लक्षण आए और उनका आना एक बार निरस्त कर दिया गया। कोरोना संक्रमण दर कम होने तथा बच्चों के स्वस्थ्य होने पर उन्हें स्कार्ट टीम सूरजपुर लेकर आई। जिला कलेक्ट्रेट में सभी बच्चों व स्टाप का कोविड टेस्ट कराया गया। सभी के रिपोर्ट निगेटिव आने के पश्चात् जिला कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रवेश सिंह5 सिसोदिया से सभी बच्चों का परिचय लिया और कहा कि सभी को काम यहीं मिल जाएगा, अधिक लाभ के लालच में बाहर ना जाएं। सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति सूरजपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सभी बच्चों को उनके अभिभावक के सुपुर्द किया गया। सभी बच्चों को समझाइश दी गई कि अब किसी भी काम से बाहर ना जाएं। उनके परिवार के लिए रोजगार की व्यवस्था यहीं की जाए। बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाए। उन्हें शिक्षा से दूर ना किया जाए। बच्चों को सुपुर्द करने में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष किरण बघेल, सदस्य राजेश शर्मा, कविता सिंह, फरीदा खान, घनश्याम राजवाड़े, जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल, संरक्षण अधिकारी सुश्री प्रियंका सिंह, परामर्श दाता जनेन्द्र दुबे, हरगोविन्द चक्रधारी, चाइल्ड लाइन ओड़गी से राधा यादव, अनवरी खातुन, ग्राम पंचायत पासल के सरपंच रविशंकर एवं सभी बच्चों के अभिभावक उपस्थित थे। जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने बताया की बच्चों का फालोअप अब करते रहेंगे तथा उनके द्वारा उन्हें शिक्षा से जोड़ने की कार्रवाई की जाएगी। बच्चों को तमिलनाडू से सूरजपुर लाने वालों में भगाराम एस, महेश्वरन, रामचन्दन, महेन्द्ररन एसटी, धनुवासन उपस्थित थे।

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