पहले शालीनता से पूछताछ कर टटोल रही नब्ज, झूठ बोलने पर हो रही सख्त
अंबिकापुर। शहर में बढ़ती अपराधिक वारदातों को देखते हुए पुलिस, चुनौती बने बदमाशों और चोरों को खंगालने में लगी है। पुलिस उन सभी मोहल्ले, टोलों में जाकर ऐसे बदमाशों के घरों में दस्तक दे रही है, जिनकी गतिविधियां पूर्व से संदिग्ध रही हैं या फिर वे जेल रिटर्न हैं। बकायदा थाने लाकर इनकी परेड ली जा रही है। इनसे पूछताछ के साथ वर्तमान में चल रही गतिविधियों का डाटा संकलन किया जा रहा है। इनमें चोरी, मारपीट, रहजनी सहित विभिन्न मामलों में शामिल रहे आरोपी और संदेही शामिल हैं।
पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज अंकित कुमार गर्ग और पुलिस अधीक्षक सरगुजा योगेश कुमार के द्वारा त्योहारों के मद्देनजर सक्रिय रहने वाले अपराधियों के निगरानी की हिदायत जिले की पुलिस को दी गई है। इसके पालन में पुलिस टीम ऐसे सभी आरोपियों को खंगाल रही है। इसी क्रम में शहर कोतवाली पुलिस, गांधीनगर थाना पुलिस और मणिपुर थाना पुलिस भी अपने-अपने इलाके के नामचीन गुंडा, बदमाशों के घरों में दस्तक दे रही है, जो पूर्व में अपराधों में संलिप्त रहे हैं। न्यायिक अभिरक्षा में जाने और वहां से रिहा होने के बाद इनकी गतिविधियों का परीक्षण पूछताछ करके पुलिस कर रही है। इसी क्रम में शनिवार को कोतवाली पुलिस ने एक दर्जन से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया और पूछताछ करके इनसे जेल से छूटने के बाद की गतिविधियों के बारे में जाना। थाना प्रभारी मनीष सिंह परिहार ने बताया कि पूछताछ के बाद सभी का नाम, पता और उनके द्वारा बताए गए कार्यों का ब्यौरा पुलिस ने अपने रिकार्ड में दर्ज किया है। जांच प्रक्रिया के दौरान अगर इनके द्वारा बताई गई बातों में भिन्नता पाई जाती है, तो पुलिस इनके विरूद्ध कठोर कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने बताया शनिवार को एक दर्जन से अधिक लोगों को थाना तलब किया गया और सात लोगों के विरूद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। पूछताछ के लिए ऐसे संदेहियों को थाने में लाया गया था, जो मारपीट, हत्या, हत्या का प्रयास, चोरी, लूट, छिनैती, वाहन चोरी जैसे अन्य मामलों में शामिल रहे हैं। इनका फिंगर प्रिंट भी लिया जा रहा है, जिससे शहर में हुई अन्य ऐसी वारदात जिसका पुलिस पर्दाफास नहीं कर पाई है, उसमें इनकी संलिप्तता का पता लगाया जा सके।
तस्दीक में सहूलियत के लिए ले रहे फिंगरप्रिंट
कोतवाली थाना के टीआई मनीष सिंह परिहार ने बताया कि पुलिस अपने अभियान के तहत पूर्व में विभिन्न अपराधों में शामिल रहे जिन आरोपितों को थाने ला रही है, उनका फिंगर प्रिंट नैफिस साफ्टवेयर भी ले रही है। इनके फिंगरप्रिंट से अन्य घटित वारदातों में इनकी संलिप्तता तो नहीं, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है। किसी अपराध में लिए गए फिंगर प्रिंट से इनमें से किसी के फिंगर का मिलान होता है, तो पुलिस को अपराध की गुत्थी सुलझाने में सहूलियत मिलेगी। उन्होंने बताया कि कोतवाली थाना पुलिस ने इस साफ्टवेयर में अभी तक लगभग 600 लोगों का फिंगरप्रिंट लिया गया है। इस साफ्टवेयर में पूरे भारत के संदेही बदमाशों का फिंगरप्रिंट रहने से संबंधित थाना क्षेत्र में घटित अपराधों के तस्दीक में सहूलियत मिलेगी।

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