इन वाहनों के बीमा, फिटनेस तक नहीं हो रही जांच

प्रतापपुर। शक्कर कारखाना के शुरू होते ही सड़क पर ओवरलोड वाहनों की बाढ़ आ गई है। ये ओवरलोड वाहन दुर्घटना का सबब बने हुए हैं। ट्रक व अन्य बड़े मालवाहक जब रास्ते में हिलोर मारते निकलते हैं तो राहगीर डर से इधर-उधर खिसक लेते हैं। इन ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। गन्ने का सीजन शुरू होने के बाद से ही ओवरलोड ट्रक ही नहीं ट्रैक्टर भी धड़ल्ले से गन्ना परिवहन में लगे हैं। क्षमता से अधिक परिवहन के बाद भी इन पर नजर डालने वाला कोई नहीं है।
मां महामाया शक्कर कारखाना केरता में किसान गन्ना की खेप लेकर रोजाना पहुंच रहे हैं। ट्रक-ट्रैक्टर के चालकों द्वारा ओवरलोड वाहनों को दौड़ाया जाता है। ट्रकें और ट्राला सड़क मेें निकलने के बाद इनके खतरनाक हिचकोले देखकर राहगीर और छोटे वाहन चालक सहम जाते हैं। सड़क सुरक्षा माह के बावजूद इन ओवरलोड वाहनों पर लगाम नहीं लग पा रहा है, जबकि जिला व पुलिस प्रशासन का इस माह को मनाने का उद्देश्य ही यातायात व परिवहन विभाग के नियमों का पूरी तरह से पालन कराना है। देखने को मिल रहा है कि बिना रिफ्लेक्टर के ट्रक या ट्राली में गन्ने की ढुलाई हो रही है। इनके बीमा व फिटनेस का हाल क्या होगा, यह इन मालवाहकों की स्थिति को देखने मात्र से पता चल जाता है। बाइक सवारों को आसानी से रोक लेने वाली पुलिस को गन्ने से भरे ओवरलोड वाहन दिखाई ही नहीं देते या फिर इन पर ध्यान देने की जरूरत ही महसूस नहीं की जा रही है। परिवहन विभाग के अधिकारी भी ऐसे वाहनों की सुध लेना जायज नहीं समझ रहे हंै। ऐसे ओवरलोड वाहन कब किसकी जान ले बैठेंगे, कहना मुश्किल है। आए दिन दुर्घटनाओं में राहगीरों के घायल होने और मौत जैसी खबरें सामने आती हैं इसके बाद भी खतरा का सबब बने वाहनों पर जिम्मेदारों का कोई नियंत्रण देखने को नहीं मिल रहा है। कई बार हालात ऐसे बनते हैं कि ट्रक व ट्राली में ओवरलोड गन्ना सड़क पर गिरने लगते हैं। अगर साइड लेते समय गन्ना किसी बाइक सवार या अन्य वाहनों पर गिर जाए तो बड़े हादसे की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

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