अंबिकापुर। शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद शनिवार को सुबह से उमस भरी गर्मी से लोग बेचैन रहे। शनिवार को दोपहर 2 बजे से मौसम का मिजाज बदला और टिप-टिप पानी के साथ मद्धिम और तेज बारिश हुई, जिससे मौसम ठंडक लिए रहा। पिछले वर्ष 2024 में केरल में 30 मई, 8 जून को सुकमा के रास्ते छत्तीसगढ़ और 23 जून को उत्तर छत्तीसगढ़ में मानसून की धमक हुई थी। इस वर्ष प्री-मानसून की स्थिति नौतपा के पहले बन गई है। आज 25 मई से नौतपा शुरू होगा, जो 2 जून तक चलेगा। इसके एक दिन पहले तक बने हालात मानसून के आगमन का पूर्वाभास करा रहा है। आसमान में बादल छाए हैं और हो रही अल्प, मध्यम और तेज बारिश के कारण तापमान में काफी गिरावट महसूस की जा रही है। हालांकि सुबह धूप-छांव के बीच उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेचैन कर रखा था। पाट क्षेत्रों में मौसम का नजारा देखने लायक रहा।
मौसम वैज्ञानिक एएम भट्ट का कहना है कि मानसून के सामान्य आगमन तिथि से 8 दिन पहले ही केरल और मिजोरम में दक्षिण-पश्चिम मानसून की जोरदार धमक हो गई है। पूरे दक्षिण अरब सागर
के साथ पश्चिम-मध्य और मध्य-पूर्वी अरब सागर, लक्ष्यद्वीप, केरल, माहे, कर्नाटक के कुछ हिस्से, पूरा मालदीव, कोमरीन, तमिलनाडु का अधिकांश क्षेत्र और संपूर्ण दक्षिण-पश्चिम और मध्य पूर्वी बंगाल की खाड़ी, पश्चिम मध्य और उत्तरी बंगाल की खाड़ी के कुछ क्षेत्र और उत्तर पूर्वी भारत के मिजोरम के कुछ हिस्से मानसून की धमक में समाहित हो गए हैं। अगले 2-3 दिन में इसके आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। मध्य अरब सागर, संपूर्ण गोवा, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक के कुछ और हिस्से, संपूर्ण तमिलनाडु, सिक्किम और हिमालयन पश्चिम बंगाल भी इससे अछूता नहीं है। केरल के तटीय क्षेत्रों में स्थित 14 मौसम वेधशालाओं मिनीकॉय, अमिनी, तिरुअनंतपुरम, पुनलुर, कोल्लम, अल्पाउजा, कोट्टायम, कोच्चि, त्रिसूर, कोजीकोड, थलसेरी, कन्नूर, कुडलु और मैंगलोर में से 60 प्रतिशत वेधशाला अर्थात कम से कम 9 वेधशालाओं में 10 मई के बाद लगातार दो दिन 2.5 मिमी या अधिक की वर्षा होती है और निम्न अन्य दो शर्तें भी पूरी होती हैं तब दूसरे दिन केरल में मानसून के आगाज की घोषणा कर दी जाती है। दो अन्य शर्तों में वायु क्षेत्र भूमध्यरेखा से 10 डिग्री उत्तरी अक्षांस और 55 डिग्री पूर्व से 80 डिग्री पूर्व देशांतर के सम्पुट क्षेत्र में पश्चिमी हवा की गहराई लगातार 600 हेक्टा पास्कल पर स्थिर हो तथा 5 से 10 डिग्री उत्तर और 70 से 80 डिग्री पूर्वी देशांतर में 925 हेक्टा पास्काल के क्षेत्र में अर्थात सतही वायु गति 15 से 20 नॉट की रहनी चाहिए और 5 से 10 डिग्री उत्तरी अक्षांस और 70 से 75 डिग्री पूर्वी देशांतर के क्षेत्र में बहिर्गामी दीर्घ विकिरण तरंगों का स्तर 200 वॉट प्रति वर्ग मीटर से कम होना चाहिए। शनिवार को केरल में ये तमाम शर्तें पूरी हो गई हैं।

Categorized in: