शहर के सिद्धार्थ अस्पताल का मामला, डॉक्टर ने कहा बच्चे को कुछ नहीं होगा यह मेरी जिम्मेदारी

अबिकापुर। शहर के एक निजी अस्पताल में दो माह के बच्चे को एक्सपायरी टीका लगा दी। इसकी जानकारी भी बच्चे के अभिभावकों को नहीं दी, जब अभिभावक घर जाकर देखे तो वे भागे-भागे वापस अस्पताल लौटे और डॉक्टर से चर्चा की। डॉक्टर ने पहले अपनी गलती मान ली, लेकिन उसने किसी प्रकार से लिखित में देने से इंकार कर दिया और बच्चे की पूरी फाइल लेकर घर चले गए और वहां के नर्सों से नया फाइल बनवाकर माता-पिता को दे दी। काफी देर तक अस्पताल में अभिभावक डटे रहे, लेकिन डॉक्टर अपने घर से बाहर नहीं निकले।
चिकित्सकों को जमीन का भगवान माना जाता है, लेकिन जब डॉक्टर ही किसी के जिंदगी से खिलवाड़ करे तो उनपर इंसान कैसे विश्वास करेगा। गांधीनगर निवासी श्वेता सिंह व उनके पति पवन सिंह अपने दो माह के बच्चे को लेकर रोटा वायरस सहित एक अन्य टीका लगवाने संजय पार्क मार्ग स्थित सिद्धार्थ अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने इसके लिए बकायदा ४ हजार रुपए का भुगतान भी किया। डॉक्टर द्वारा टीका लगा दिए। टीका लगने के बाद बच्चे को लेकर उसके अभिभावक घर लेकर लौट गए, लेकिन जब घर में रेपर देखे तो उनके होश उड़ गए। डॉक्टर ने तीन माह एक्सपायरी रोटा वायरस टीका लगा दिया था। सभी वापस अस्पताल लौटे और इसकी जानकारी डॉक्टर को दिए तो, उनके द्वारा पहले तो इंकार कर दिया गया। बाद में उन्होंने अभिभावकों से फाइल लेकर पूरी पर्ची बदलवाया दिए। इसके बाद अपने घर जो अस्पताल में ही है,चले गए।
उन्होंने टीका लगाने से भी पूरी तरह से इंकार कर दिया और कहा कि आपलोग अस्पताल में टीका लगवाने नहीं आए हैं। मामला बिगड़ता देख पहले तो वहां के नर्सों ने अभिभावकों को फटकार लगाने से भी नहीं परहेज की।

समझाने का भी किया गया प्रयास
डॉक्टर अपने मित्रों को अस्पताल बुला लिया और उन्होंने समझाने का भी प्रयास अभिभावकों को शुरू कर दिया। लेकिन बच्चे के भविष्य का सवाल था। इसकी वजह से वे नहीं माने। बाद में कुछ लोगों ने अभिभावकों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

लिखित मेंंं शिकायत दिए जाने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ.पीएस सिसोदिया, सीएमएचओ

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