ब्यूरो कार्यालय बलरामपुर

प्रतापपुर विधानसभा की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले ने जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उबाल ला दिया है। इस प्रकरण को लेकर अब तक दो बार बलरामपुर जिला मुख्यालय में जमकर हंगामा हो चुका है। पिछली सुनवाई की तिथि पर हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि जिला संयुक्त कार्यालय के 500 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू करनी पड़ी, वहीं बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 343 को जाम कर दिया था।
हालांकि अगली तिथि पर सुनवाई को लेकर समाज और प्रशासन के बीच सामंजस्य बना रहा अब एक बार फिर सबकी निगाहें आज टिकी हुई हैं, जिसे इस मामले की अंतिम सुनवाई बताया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि आज को कोर्ट ने अंतिम सुनवाई के लिए समय दिया है और समाज के अधिवक्ता द्वारा पिछली तिथि पर ही सभी आवश्यक दस्तावेज न्यायालय में जमा कर दिए गए हैं।
बसंत कुजूर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा,
“यदि आज न्यायालय द्वारा किसी भी प्रकार का भेदभाव किया जाता है, तो समाज के लोगों के साथ बैठकर आगे की रणनीति तय की जाएगी और उसी के अनुरूप कदम उठाए जाएंगे। उस स्थिति में उत्पन्न होने वाली हर समस्या की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।”
उन्होंने जाति प्रमाण पत्र के मूल प्रश्न को उठाते हुए कहा कि स्पष्ट किया जाए कि जाति प्रमाण पत्र पति की ओर से बनता है या पिता की ओर से। यदि पति की ओर से जाति प्रमाण पत्र बनने का कोई प्रावधान है, तो न्यायालय यह बताए कि संविधान के किस अनुच्छेद में इसका उल्लेख है। और यदि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, तो तत्काल विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाण पत्र शून्य घोषित कर इसकी जानकारी उच्च न्यायालय को दी जाए।”
फिलहाल पूरे जिले की नजरें आज की सुनवाई पर टिकी हैं। यह दिन न केवल इस विवाद का भविष्य तय करेगा, बल्कि प्रशासन और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता की भी बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है

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