रायपुर। 22 अप्रैल का दिन चिरमिरी के रहने वाले अग्रवाल परिवार के लिए दो विपरीत यादों का संगम बन गया है। इसी तारीख को 2025 में पहलगाम की वादियों में उनके चारों ओर मौत का तांडव हुआ था। लेकिन ठीक एक साल बाद, 22 अप्रैल 2026 को उनके घर एक नन्हे बेटे का जन्म हुआ है। परिवार ने उसका नाम ‘पहल’ रखा है, जिसका अर्थ है नई शुरुआत। यह नाम न केवल उनके बेटे का है, बल्कि उस डर को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का एक संकल्प भी है।

वह दिन याद कर कांप जाती है रूह
कारोबारी अरविंद अग्रवाल, उनकी पत्नी पूजा और साढ़े चार साल की बेटी समृद्धि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसारन घाटी घूमने गए थे। अचानक शुरू हुई अंधाधुंध गोलीबारी में 26 लोगों की जान चली गई। अफरा-तफरी में परिवार बिखर गया। अरविंद बताते हैं, ‘आज भी वह दिन याद कर रूह कांप जाती है।’

बेटी और पत्नी को बचाया कश्मीरीयों ने
दहशत के उन पलों में इंसानियत की जीत हुई। अग्रवाल परिवार के स्थानीय मित्र नज़ाकत अहमद शाह ने छोटी समृद्धि को आतंकियों से बचाने के लिए उसे अपनी बेटी बताया। वहीं, एक स्थानीय घुड़सवार ने घायल पूजा को जंगली रास्तों से सुरक्षित बाहर निकाला और फटे कपड़ों के बदले नए कपड़े दिए, जिसका उसने बाद में एक पैसा भी नहीं लिया।

बेटे के आने से परिवार की हीलिंग शुरू
बेटे ‘पहल’ के आने से परिवार की हीलिंग शुरू हो गई है। हालांकि, बेटी समृद्धि के मन में अब भी बंदूकों का खौफ है, लेकिन परिवार अब फिर से पहलगाम जाने की योजना बना रहा है। अरविंद कहते हैं, ‘ईश्वर ने हमें इसलिए बचाया क्योंकि वह चाहते थे कि हम यह दिन देखें। अब हम अपने बेटे ‘पहल’ के साथ उस जगह जाएंगे, ताकि उस डर को हमेशा के लिए खत्म कर सकें।’

 

 

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