महगई(मिथलेश जायसवाल)- विकासखंड उदयपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत सलका में जल संसाधन विभाग द्वारा 12 करोड़ की लागत से बांध निर्माण कराया जा रहा है। जो ठेकेदार की मनमानी व अधिकारियों की लापरवाही से घटिया निर्माण का भेंट चढ़ता दिख रहा है। जल संसाधन विभाग में किसानों को सिंचाई उपलब्ध कराने हेतु मशीनों द्वारा बांध निर्माण कराया जा रहा हैं जिसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया हैं। विभाग के कुछ अधिकारियों के द्वारा निर्माण कार्य मे अनियमितता बरतते हुए शासकीय राशि का दुरुपयोग खुलेआम किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ अधिकारियों के द्वारा ठेकेदारों की तरह कार्य किया जा रहा है।

इस डेम निर्माण कार्य में अत्यंत लापरवाही व कोताही बरती जा रही है गांव में ही कई लोगों की जमीन इस डेम के डूबान क्षेत्र में आ जाने से ग्रामीण अपना जमीन तो खोनी पड़ रही है, जमीन कि मुआवजा राशि भी नहीं मिल रही और नहीं मुआवजे के लिए प्रशासन के तरफ से कोई एक्शन लिया जा रहा है ना तो कोई सर्वे की गई है ना ही किसी प्रकार की आकलन की गई है। जिससे ग्रामीणों की जमीन के बदले मुआवजा की की बात हो सके।

इस मामले में कुछ ग्रामीण एसडीएम कार्यालय उदयपुर को ज्ञापन भी सौंपा है पर इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, विभागीय अधिकारियों की भारी लापरवाही से भ्रष्टाचार का शक्ल ले चुका इस डेम के निर्माण कार्य में मिट्टी के ऊपर की जा रही पिचिंग का कार्य में गुणवत्ता हीन धूसकी पत्थर का प्रयोग किया जा रहा है जोकि निर्माण स्थल से 15 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी क्षेत्र में अवैध रूप से पत्थर को तुड़वा कर दर्जनों ट्रैक्टर के माध्यम से ढुलाई कर लाया जा रहा है। विगत 1 महीने से लगातार सैकड़ों ट्रैक्टर धुस्की पत्थर अवैध उत्खनन कर लाया जा रहा है। पिचिंग का कार्य इतना महत्वपूर्ण है कि यही डेम में दरार आने व टूटने से बचाता है, फिर भी ठेकेदार द्वारा मनमाने तरीके से लोकल मजदूरों को ठेके में लगाकर कार्य को कराया जा रहा है जिससे कार्य की गुड़वत्ता में भारी कमी दिखने लगी है, पीचिंग का यह कार्य ठोस रूप में नहीं हो पा रहा, जैसे ही मजदूर इस कार्य को स्टेप बाय स्टेप करते हैं वैसे ही पथर भरभरा कर गिरने लगता है।

इस निर्माण कार्य में ठेकेदार के खिलाफ ग्रामीणों को यह भी आरोप लग रहा है कि वह डेम से पानी सिंचाई के लिए जिस नहर के माध्यम से ग्रामीणों तक पानी पहुंचाना है वह भी जमीन लेवल से काफी नीचे खुदाई कर बनाया जा रहा है जिससे आने वाले दिनों में ग्रामीणों को इस डेम से सिंचाई के लिए किसी प्रकार का लाभ होता नहीं दिख रहा है, डेम के ही आसपास कुछ हिस्सों में सीमेंट कंक्रीट से पुल व रास्ते बनाए जा रहे हैं उसमें भी घटिया सामग्रियों का प्रयोग व मटेरियल रेशीयो में भी गड़बड़ी की जा रही है।

इस मामले में ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार शिकायत अधिकारियों तक की जा चुकी है पर ऐसा लगता है कि राजस्व विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारि गहरी निद्रा में खोए हुए हैं।

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