प्रतापपुर। एक तरफ वन विभाग जंगलों को बचाने और पौधे लगाने जगह-जगह वन महोत्सव का आयोजन कर ग्रामीणों को प्रेरित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हरे-भरे बेशकीमती पेड़ों को काटकर जमीन पर कब्जा करने का सिलसिला जारी है। इसे रोकने में विभाग सफल नहीं हो पा रहा है, यही वजह है कि कभी वृक्षों से आच्छादित घने जंगल आज वीरान होकर मैदान में तब्दील हो रहे हैं।
वन परिक्षेत्र प्रतापपुर के ग्राम चंदौरा खुटनपारा के जंगल में लगभग सौ से डेढ़ सौ एकड़ जमीन पर अवैध अतिक्रमण जारी है। ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग के कर्मचारियों को इसकी सूचना दी लेकिन इनकी निष्क्रियता ही सामने आई है, जिससे बड़े वन भू-भाग में अतिक्रमण जारी है। पेड़ों को सुखाने के लिए ग्रामीण पहले हरे-भरे वृक्षों के निचले भाग के छाल वाले भाग को काट देते हैं, जिससे वृक्ष का ऊपरी भाग पानी, ऑक्सीजन सहित अन्य पोषक तत्व के नहीं पहुंचने से एक-दो माह में सूख जाता है। वृक्ष को सूखने के बाद काटकर गिरा दिया जाता है। कब्जाधारी ग्रामीणों में यह क्रम निरंतर जारी है। वन परिक्षेत्र में इस प्रकार के दर्जनों साल के वृक्षों को सूखने के लिए छोड़ दिया गया है। वहीं वन भूमि पर कब्जा के लिए ग्रामीण जुताई कर रहे हैं। वन विभाग सब कुछ जानकर भी अनजान बना हुआ है। बता दें कि शासन जब से वन भूमि पर काबिज आदिवासी वर्ग के लोगों को पट्टा प्रदान कर रही है, तब से आदिवासी वर्ग सहित अन्य वन भूमि पर कब्जा के लिए हरे-भरे वृक्षों की कटाई में गुरेज नहीं कर रहे हैं।
लकड़ी तस्कर सक्रिय
क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जे के लिए काटे गए वृक्षों की लकडिय़ां तस्करों को बेच दी जाती हैं। सूत्रों का कहना है कि रात के अंधेरे में लकड़ी तस्कर बेशकीमती लकड़ी को विभिन्न साधनों से पार कर देते हैं, जिसकी किसी को कानों-कान खबर नहीं लग पाती है। कुछ मामलों में विभाग के जिम्मेदार अनजान बने रहते हैं।

Categorized in: