जांच में पाया गया बिना पंजीयन के डॉक्टर कर रहा था इलाज, कोतवाली में अपराध दर्ज


अंबिकापुर. एक निजी अस्पताल के डॉक्टर द्वारा इलाज में लापरवाही व गलत तरीके से ब्लड चढ़ाने से एक बालिका की मौत हो गई थी। इस मामले में बच्ची के पिता ने शिकायत जिला मु य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी व पुलिस से की थ्ज्ञी। जांच में चिकित्सक द्वारा इलाज में लापरवाही व आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा बिना पंजीयन के ही डॉक्टर इलाज कर रहा था। जांच रिपोर्ट आने के बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान परीक्षण अधिनियम १९८७ की धारार २४ के तहत अपराध दर्ज कर किया गया है।


जानकारी के अनुसार अमरेश कुमार दुबे ग्राम कदमपारा थाना प्रतापपुर का रहने वाला है। ९ दिसंबर २०२० में इसकी १२ वर्षीय बेटी अदिति दुबे की तबियत खराब होने पर वह इलाज के लिए अंबिकापुर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां पर पदस्थ डॉक्टर आशीष जायसवाल द्वारा बच्ची का इलाज किया गया। बच्ची को खून की कमी व सिकल सेल से पीडि़त होने पर डॉक्टर द्वारा ब्लड चढ़ाने की सलाह दी गई। परिजन ब्लड चढ़वाने के लिए तैयार हो गए। ब्लड चढ़ाने के कुछ देर बाद बच्ची की तबियत बिगडऩे लगा। और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। बच्ची को ऑक्सिजन लगाया गया। तबियत में कुछ सुधार होने पर उसे पुन: उसी ब्लड को चढ़ाना शुरू किया गया। इसके बाद बच्ची की और ज्यादा तबियत विगड़ गई। बच्ची का शरीर पूरी तरह से काली पड़ गई। इस स्थिति में डॉक्टर ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए वहां से रेफर कर दिया। परेशान परिजन ने बच्ची को इलाज के लिए दूसरे निजी अस्पताल लाए पर यहां चिकित्सकों ने बच्ची की स्थिति को गंभीर देखते हुए बाहर रेफर कर दिया। परिजन ११ दिसंबर २०२० को रांची ले गए। यहां इलाज चल ही रहा था कि १२ दिसंबर की बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद उसके पिता अमरेश दुबे ने डॉक्टर आशीष जायसवाल पर इलाज में लापरवाही व गलत तरीके से ब्लड चढ़ाने का आरोप लगाया था। वह इसकी शिकायत सीएमएचओ व कोतवाली में की थी। जिला मु य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जांच के लिए टीम का गठिन किया गया था। जांच के बाद पाया गया कि डॉक्टर आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा बिना पंजीयन के ही डॉक्टर द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा था। वह बच्ची की मौत मामले में इलाज में लापरवाही व गलत तरीके से ब्लड चढ़ाने का मामला सामने आया था। जांच में डॉक्टर दोषी पाए जाने पर कोतवाली में डॉक्टर के खिलाफ छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान परीक्षण अधिनियम १९८७ की धारार २४ के तहत अपराध दर्ज कर किया गया है।

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