अंबिकापुर। आंकड़ों के तराजू पर किसानों की सांसें तौलती मानसून के बीच सोमवार की शाम को हल्की बारिश से लोगों को कुछ राहत मिली। रोजाना तेज धूप और छांव को देखते किसानों की ही नहीं आम लोगों की भी टकटकी आसमान पर लगी रहती थी। मौसम में बदलाव का संकेत जरूर मिलता लेकिन बारिश की बूंद भी देखने को नहीं मिल रही थी। रविवार की शाम शहर से लगे असोला क्षेत्र में एक सीमित परिधि में बूंदाबांदी चंद पलों के लिए हुई, इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई। इधर मानसूनी बारिश नहीं होने पर शासन-प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है।
मौसम विज्ञानी एएम भट्ट का कहना है कि वर्षा की आवृत्ति और मात्रा की दृष्टि से जून के महीने में बहुधा असमानता देखी जाती है। जून का महीना ग्रीष्म और पावस के संक्रांति का महीना होता है। इसमें वायुमंडल में ग्रीष्म की गर्म लहरों के साथ तप चुकी धरती की तपिश के कम होने की प्राकृतिक घटना होती है। इसी महीने में महासागरीय नम तरंगें मानसून के रूप में आगे बढ़ती हुई संपूर्ण भारतवर्ष तक पहुंचती हैं। कभी ये तरंगें कुछ हिस्सों में मूसलाधार वर्षा करती हुई अपना मार्ग प्रशस्त करती हैं तो कई बार हल्की मध्यम वर्षा करती हुई आगे बढ़ती दिखती हैं। इसे हम किसी क्षेत्र के लंबी अवधि के वर्षा आंकड़ों से समझ सकते हैं। अभी तक संभाग में सर्वाधिक वर्षा कुसमी और सबसे कम शंकरगढ़ विकासखंड में दर्ज की गई है, दोनो बलरामपुर जिले में हैं। अंबिकापुर नगर के वर्षा के आंकड़ों में जून में बारिश पिछले 50 वर्षों में वर्षा विचलन 18.4 मिमी (2016) से 835.3 मिमी (1994) के बीच रहा है। महज जून की वर्षा से पूरे ऋतु की वर्षा को परिभाषित नहीं किया जा सकता। क्योंकि सन 2016 में जून में न्यूनतम वर्षा के बावजूद कुल मानसून वर्षा का आंकड़ा मानसून औसत से अधिक रह कर 1331.6 मिमी था। हालांकि 1994 की शुरुआती रिकार्ड वर्षा का क्रम लगातार बना रहा और कुल मानसून वर्षा 2051.6 मिमी के उच्चतम रिकार्ड मान तक पहुंच गया था। जुलाई में जब मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका होता है, इसके सभी सहायक कारक आकार ले चुके होते हैं। सोमाली जेट बन चुका होता है, मानसून द्रोणिका बन चुकी होती है, गुजरात के पास अरब सागर में अपतटीय द्रोणिका प्रभावी हो चुकी होती है, पछुआ कमजोर पड़ कर अफगानिस्तान के पार ही रहने लगता है। खाड़ी में नियमित न्यून वायुदाब का बूस्ट मिलने लगता है और बादलों को अपना आगे का रास्ता मालूम पड़ चुका होता है, तब जुलाई में नियमित वर्षा अवस्वम्भावी हो जाता है। ऐसे में अगर जुलाई में वर्षा की मात्रा में कमी आ जाए तो वह निश्चय ही पेशानी पर बल डालने का कारण बन जाता है। 50 वर्षीय अवधि में अंबिकापुर में जुलाई माह में वर्षा का औसत 398 मिमी है, जबकि जुलाई में वर्षा का विचलन 146.1 मिमी (2020) से 836.0 मिमी (2001) के बीच रहा है। इनमें 22 वर्षों में औसत से अधिक और 4 वर्षों में 200 मिमी से कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि शेष वर्षों में 200 से 400 मिमी के बीच वर्षा हुई है। इन चार वर्षों में जुलाई में 200 मिमी से भी कम वर्षा हुई है, वे वर्ष सन 1976 (158.0मिमी), 2002 (151.7मिमी), 2020 (146.1मिमी), 2022 में (164.1मिमी) हैं। 2022 में जुलाई में वर्षा की मात्रा में यह चौथी सबसे बड़ी गिरावट है, जबकि 01 जून से 31 जुलाई की अवधि में अर्थात आधा मानसून गुजर जाने की स्थिति में यह दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। 1976 (285.2मिमी), 2022 (289.2मिमी)।
खेतों में वर्षा की स्थिति का नजरी आंकलन प्रारंभ करने के निर्देश

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