मानव तस्करी की आशंका, रॉयल बस में गढ़वा से सवार होकर निकले थे, चल रही पूछताछ

अंबिकापुर। झारखंड से कर्नाटक जाने के लिए निकले 16 लड़कियों और 3 लड़कों को चाइल्ड लाइन की टीम ने, मानव तस्करी के संदेह पर रोककर अपनी सुपुर्दगी में लिया है। सभी झारखंड के गढ़वा से दुर्ग जाने वाली रायल बस में सवार होकर रवाना हुये थे। मिली सूचना पर अंबिकापुर के बस स्टैंड में चाइल्ड लाइन की टीम ने रोक लिया। इनमें 6 से अधिक नाबालिग हैं। सभी कर्नाटक में काम करने के लिए जाना बता रहे हैं, लेकिन इन्हें कहां जाना था, यह बता पाने में वे विफल रहे। टीम इनके उम्र का सत्यापन के लिए प्राथमिक शिक्षा संबंधी दस्तावेज की भी प्रतीक्षा कर रही है। इन्हें कौन कर्नाटक ले जा रहा था, यह भी अस्पष्ट है। बस में सवार लड़के-लड़कियों का टिकट किसी दूसरे युवक ने कटवाया था, जो बस में सवार नहीं था। अंबिकापुर से रायपुर पहुंचने के बाद इन्हें कर्नाटक का सफर तय करना था।

जानकारी के मुताबिक, गढ़वा से अंबिकापुर जाने वाली रॉयल बस में गुरूवार की रात 16 लड़कियां एवं 3 लड़के सवार होकर अंबिकापुर की ओर आ रहे थे, इनमें कई नाबालिग लड़कियां भी शामिल हैं। इनकी गतिविधि एवं बातचीत संदिग्ध लगने पर बस के एक सवार ने एमएसएसव्हीपी संस्था के मनोज भारती को इसकी सूचना दी। मानव व्यापार के संदेह पर जिला बाल संरक्षण ईकाई से विक्रमांक, चाइल्ड लाइन से दिलीप जगते सहित कोआर्डिनेटर, एमएसएसव्हीपी के मनोज भारती की टीम, पुलिस बल के साथ बस स्टैंड पहुंची। देर रात करीब 11 बजे बस के पहुंचते ही टीम बस में सवार लोगों की तस्दीक करना प्रारंभ कर दी। इनमें एक महिला बच्चों के साथ सवार मिली, जो कर्नाटक जा रही थी, अन्य लड़के-लड़कियों में कुछ नाबालिग थे। बातचीत के बाद संतोषप्रद उत्तर नहीं मिलने पर टीम ने सभी को बालिका एवं बालक गृह में सुरक्षा की दृष्टि से रखा था। इन्हें कौन ले जा रहा है, किस काम के लिए वे जा रहे थे, यह बताने में सभी असमर्थ थे। शुक्रवार को सभी की बाल कल्याण समिति के समक्ष काउंसलिंग हुई। अधिकारियों ने इनके स्वजनों से संपर्क किया है, और उम्र की पुष्टि के लिए इनके शैक्षणिक दस्तावेजों को मांगा है।

बस में सवार एक युवक ने बताया कि, वह कर्नाटक में पहले भी काम करने जा चुका है, लेकिन पहली बार जिंस कंपनी में पैकिंग का काम करने जा रहा है। युवक ने बताया कि दूसरी कंपनी में उसे काम करने के एवज में प्रतिदिन उन्हें 500 रुपये मिलता था। पूछताछ में लड़कियां यह भी नहीं बता पाईं कि वे कर्नाटक के किस शहर में काम करने जा रही हैं। कुछ लड़कियों ने निजी घरों में काम करने के लिए जाने और काम के बदले अच्छी पगार दिलाने का आश्वासन मिलने की बात कही। लड़कियों और उनके स्वजन से जिन लोगों ने बात की, उनका पता नहीं चल पाया है, और न ही वे बस में सवार मिले। इनमें कितने नाबालिग हैं, इसकी पुष्टि शैक्षणिक व अन्य दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही हो पायेगी। संभावना जताई जा रही है कि मानव तस्करी के काम में लगे दलालों के मार्फत लड़के-लड़कियों को अच्छे काम और पगार का झांसा देकर ले जाया जा रहा होगा। बहरहाल इनके स्वजनों से पूछताछ के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा कि इन्हें कौन, किस उद्देश्य से लेकर कर्नाटक जा रहा था।

बयान

चाइल्ड लाइन ने सूचना पर रेस्क्यू करके 16 लड़कियों और 3 लड़कों को अपनी सुपुर्दगी में लिया है। सीडब्ल्यूसी की टीम इनका काउंसनिंग कर रही है। काउंसलिंग के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन्हें ले जाने वाला कौन था। उम्र के सत्यापन के लिए इनका शैक्षणिक प्रमाणपत्र मांगा गया है। झारखंड के सीडब्ल्यूसी से पत्राचार करके इनके सामाजिक स्थिति का आंकलन किया जायेगा। प्रकरण पुलिस में जाने पर पता चलेगा कि वे गिरोह के माध्यम से या स्वेच्छा से जा रहे थे।

जे.आर. प्रधान, जिला कार्यक्रम अधिकारी, सरगुजा

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