जेल मुख्यालय के द्वारा नियुक्त जांच अधिकारी ने इसके पहले की गहन पूछताछ
कैदी के पत्नी द्वारा रुपये का लेनदेन करने के आरोपों की पुष्टि के लिए जांच शुरू
अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड से सुरक्षा में सेंध लगाकर भागे, सेंट्रल जेल अंबिकापुर में आजीवन कारावास की सजा काट रहे भगोड़े कैदी को मणीपुर पुलिस, गुरूवार की शाम अपने कब्जे में लेकर वापस अंबिकापुर आ गई थी। कैदी को जेल प्रबंधन के सुपुर्द कर दिया गया था। शुक्रवार को कैदी से जांच के लिए उच्च स्तर पर नियुक्त सूरजपुर जेल अधीक्षक ने लम्बी पूछताछ की और केंद्रीय जेल रायपुर पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ रवाना कर दिया है। कैदी के फरार होने से बाद से अभी तक का जिस प्रकार नाटकीय घटनाक्रम सामने आया है, इससे उसके स्वजन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। इलाज के दौरान 6 अक्टूबर को शौचालय जाने के बहाने बंदी को चकमा देकर फरार होने और कैदी के द्वारा बिलासपुर कलेक्टर के समक्ष आत्मसमर्पण करने को लेकर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है, वह चाहता को सरगुजा कलेक्टर के समक्ष भी खुद को सरेंडर करके अपनी बातों को रख सकता था।
जानकारी के मुताबिक बिलासपुर के मस्तुरी अंतर्गत ग्राम मल्हार निवासी मुकेश कांत को हत्या के मामले में वर्ष 2013 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2023 में उसे बिलासपुर जेल से सेंट्रल जेल अंबिकापुर शिफ्ट किया गया था। तबियत खराब होने पर उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड में भर्ती कराया गया। 6 अक्टूबर की सुबह वह ड्यूटी पर तैनात आरक्षक से कैदी टॉयलेट जाने के लिए कहा और जेल वार्ड के पिछले दरवाजे के सामने स्थित टायलेट से मौका देखकर फरार हो गया। इसकी भनक लगने पर हड़कंप की स्थिति बन गई। कैदी का पता नहीं चलने पर मणीपुर थाने में फरार कैदी के विरूद्ध अपराध दर्ज किया गया था। पुलिस फरार कैदी की खोजबीन कर रही थी, लेकिन वह बिलासपुर पहुंच गया था, और 7 अक्टूबर को बिलासपुर कलेक्टर के समक्ष पत्नी के साथ जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। इस दौरान कलेक्टर के समक्ष दिए गए पत्र में केंद्रीय जेल में कैदी का जीवन खतरे में बताते हुए, उसे बिलासपुर जेल में शिफ्ट करने का आग्रह किया गया था। यही नहीं कैदी की पत्नी ने अंबिकापुर जेल के कर्मचारियों पर लेनदेन का गंभीर आरोप लगाया है। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर कैदी को सिविल लाइन पुलिस, बिलासपुर जेल ले गई। बजाया जा रहा है कि यहां से उसे थाने ले जाने के लिए कहा गया। उहापोह की स्थिति के बीच पुलिस, हत्या के सजायाफ्ता मुजरिम को घर भेज दी थी। फरार कैदी के बिलासपुर में होने की खबर मिलने पर अंबिकापुर पुलिस जब उसे लेने पहुंची तो वह इसकी भनक लगने पर दर्द निवारक दवा के साथ कथित रूप से सैनीटाइजर का सेवन कर लिया, जिस पर बिलासपुर जेल प्रबंधन और थाने के जिम्मदारों की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगने लगा। कैदी को सिम्स बिलासपुर अस्पताल में लाया गया, यहां चिकित्सक उसका इलाज किए, लेकिन उसकी स्थिति सामान्य हो गई। पूरी तरह से स्वस्थ्य और तंदरूस्त कैदी को लेकर मणीपुर थाना पुलिस गुरूवार को शाम करीब 7 बजे अंबिकापुर पहुंची, और उसे केंद्रीय जेल प्रबंधन के सुपुर्द किया, जहां खाना खाने के बाद वह आराम फरमाया।
फरार कैदी से जांच अधिकारी ने की पूछताछ
केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरूद्ध सजायाफ्ता कैदी मुकेश कांत के अस्पताल से भागने और कलेक्टर बिलासपुर के समक्ष आत्मसमर्पण के बाद उसकी पत्नी अमरीका बाई कुर्रे, निवासी ग्राम छोटी कोनी बिलासपुर के द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को जेल मुख्यालय रायपुर ने गंभीरता से लिया है, और इसकी जांच के लिए सूरजपुर जेल के अधीक्षक अक्षय तिवारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। शुक्रवार को अक्षय तिवारी केंद्रीय जेल पहुंचे, और फरार हुए बंदी का विस्तार से कथन लिए। कैदी के द्वारा दी गई जानकारी के बाद उसकी पत्नी से रुपये के लेनदेन से संबंधित बैंकिंग डिटेल की मांग की जाएगी। इसके साथ ही आरोपित कर्मचारियों के बैंकिंग खाता का डिटेल मंगवाकर इसकी पुष्टि की जाएगी कि महिला ने कब, किसको, कितना रुपये किस काम के एवज में दिया। इससे जुड़े अन्य सभी बिंदुओं की गहन जांच की जाएगी। कैदी के फरार होने में स्थानीय स्तर पर किसका सहयोग मिला, इस पर भी जांच अधिकारी की नजर है।
कैदी की पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
सजायाफ्ता कैदी मुकेश कांत की पत्नी ने कलेक्टर बिलासपुर के नाम लिखित शिकायत पत्र में उल्लेख किया है कि उसने शंकर तिवारी को 5000 रुपये, अभिषेक शर्मा को 10 हजार रुपये, अखिलेश सिंह, लोकेश टोप्पो, ललईबाबा को 30 हजार रुपये, अनिल बाबा गुप्ता को 5000 रुपये, विजय बहादुर को 1500 रुपये, विजय बहादुर के बेटे को 10 हजार रुपये, मनोज सिंह को 11 हजार रुपये, सौरभ शर्मा को 10 हजार रुपये, संजय खैरवार को 10 हजार रुपये, रमेश साहू को 2 हजार रुपये, निलेश केरकेट्टा को 2000 रुपये, चंद्र प्रकाश लहरे को 12 हजार रुपये देना बताया है। महिला ने इन्हें दिए गए रुपये का प्रमाण भी दिया है। सभी पेमेंट ऑनलाइन दिए गए हैं, जिसका स्क्रीनशॉट शिकायत के साथ दिया गया है।
बेटी के श्राद्ध में जाने के बाद 3 साल 3 माह रहा फरार
बताया जा रहा है कि सजायाफ्ता कैदी मुकेश कांत, बिलासपुर जेल में शिफ्ट होने के बाद 18 जुलाई 2023 को बंदियों से मारपीट करके चोट पहुंचाने के बाद विवादों के घेरे में आया। 5 जनवरी 2020 को बेटी के श्राद्ध में जाने के बाद तीन साल 3 माह फरार रहा। 27 अप्रैल 2015 को हत्या की नियत से एक बंदी पर हमला किया था। 16 अप्रैल 2024 को पुन: एक बंदी से मारपीट किया। बैरक में तलाशी के दौरान 3 पैकेट तम्बाकू मिला। 8 जून 2018 को कार्य में लापरवाही बरतने पर उसके विरूद्ध कार्रवाई की गई थी।
बयान
अस्पताल से फरार हुए कैदी को मणीपुर पुलिस की टीम गुरूवार की शाम को लेकर अंबिकापुर पहुंची थी। कैदी पूरी तरह से स्वस्थ हालत में जेल आया था। सुनियोजित तरीके से फरार हुए कैदी और उसकी पत्नी के द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए जेल मुख्यालय की ओर से जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। कैदी के विरूद्ध बिलासपुर जेल में वर्ष 2020 में बेटी के श्राद्ध के नाम पर जाने और 3 साल 3 माह फरार रहने सहित आधा दर्जन मामले दर्ज हैं। कैदी अनुशासन प्रिय नहीं था, उसे कार्रवाई का भय बने रहता था, जिस कारण वह बिलासपुर जेल में शिफ्ट होने की नियत से संभवत: बिलासपुर कलेक्टर के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसकी पत्नी के द्वारा जेल के कर्मचारियों को रुपये देने का आरोप लगाया गया है। रुपये का लेनदेन किस मकसद से किया गया, यह जांच का विषय है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उसके विरूद्ध कार्रवाई होगी।
अक्षय सिंह राजपूत, अधीक्षक
केंद्रीय जेल अंबिकापुर

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