अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में दूसरे दिन अमेरिका की एसोसिएट साइंटिस्ट व साउथ अफ्रीका के प्रोफेसर ऑनलाइन शामिल हुए  
गिरजा ठाकुर
अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित मानविकी, विज्ञान और तकनीकी विषयक त्रि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन कुलपति प्रो.अशोक सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भविष्य में हम मानविकी से संबंधित साहित्य जैसे विषय पर आधारित संगोष्ठी आयोजित करेंगे, जिसमें कबीर, सूर, तुलसी के साहित्य में मानव मूल्यों की खोज की जा सके। उन्होंने कहा कि संस्थाओं में अकादमिक गतिविधियों से रचनात्मकता का विस्तार होता है। विश्वविद्यालय में दीक्षांत का कार्य और पीएचडी का कार्य शुरू होना अकादमिक गतिविधियां हैं। विश्वविद्यालय में पहला अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार होना, विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि हम विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाएंगे, जिसमें आप सबका सहयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीचर लाइफ-टाइम टीचर होता है। इसलिए समय के साथ टीचर को अपडेट होना चाहिए। अध्यापकों को निरंतर लेखन-प्रकाशन भी करते रहना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में अन्य मानविकी विभाग को भी शीघ्र खोलने की घोषणा की, जो आधारभूत विषय है।  
अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की मुख्य वक्ता और अमेरिका की प्रोसेस डेवलपमेंट की एसोसिएट साइंटिस्ट अलंकृता सिंह ने ड्रग, प्रोडक्ट, प्रोसेस और डेवलपमेंट के विषय में बताया। उन्होंने टेबलेट और कैप्सूल के उत्पाद और निर्माण की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए उत्पादों का वर्गीकरण किया और बताया कि टेबलेट और कैप्सूल के उत्पादन की प्रक्रिया कैसे होती है? एसोसिएट साइंटिस्ट ने कहा कि दवाइयों के बारे में संपूर्ण विवरण एफडीए को भेजना अनिवार्य है। एफडीए के अनुमोदन बाद ही दवाइयों का निर्माण किया जाता है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय ट्राइबल यूनिवर्सिटी, अमरकंटक के पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष डॉ.तरुण कुमार ठाकुर ने पीपीटी के माध्यम से पौधा, जंगल और व्यक्ति पर मौसम (क्लाइमेट) का प्रभाव को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विकास के दौर में आज हमारी जैवविविधता का कहीं न कहीं विघटन हो रहा है। हमको सतत विकास प्रणाली का उपयोग कर विकास करना होगा, जिससे हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग सतत और सही ढंग से कर सकें। औषधीय पौधों से भरा हुआ अमरकंटक और सरगुजा का क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि 2052 में भारत में कोयला समाप्त हो जाएगा, इसलिए अभी से उसके विकल्प की खोज करनी होगी, जिससे देश में विद्युत ऊर्जा की कमी न हो। साउथ अफ्रीका के डरबन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के केमिस्ट्री विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एसएके मिश्रा ने नैनो तकनीकि के ऊपर अपना व्याख्यान दिया, कहा कि नैनो तकनीकि की मदद से पानी का शुद्धिकरण कर सकते हैं। कार्य परिषद के सदस्य एवं विशिष्ट वक्ता डॉ.राजेश श्रीवास्तव ने टेक्नोलॉजी और प्रबंधन पर अपना विचार देते हुए कहा कि कोरोना के कारण हमारे जीवन की कार्यप्रणाली बाधित हो गई थी, किंतु टेक्नोलॉजी के विकास से दूसरे आयाम की खोज हो जाने के कारण से हम ज्ञान का प्रसार और आदान-प्रदान कर ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी को संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, साउथ अफ्रीका, भूटान आदि विभिन्न देशों के विद्वान सुन देख पा रहे हैं। टेक्नोलॉजी के कारण डिजिटल मार्केटिंग वर्क-फ्रॉम होम हो गया है। कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर एसके श्रीवास्तव ने सूक्ष्म शक्ति (माइक्रो एनर्जी) का मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रभाव और बचाव विषयक व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक जगीश चन्द्र बसु रेडियो विज्ञान के पितामह और सूक्ष्म तरंग के स्तंभ हैं, जिन्होंने मोबाइल नेटवर्क जैसी आवश्यकता का आविष्कार बहुत पहले कर दिया था। विवि के कुलसचिव बिनोद कुमार एक्का ने कहा कि हमारा सरगुजा क्षेत्र जनजाति अथवा अत्यंत पिछड़ा क्षेत्र जरूर है, लेकिन यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है। हम लोग संस्कृति और समाज के लिए जीने वाले हैं, जिसमें समाज का भला हो, वही हमें कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन खेमकरण अहिरवार ने किया। तकनीकि सत्र में अनेक संस्थाओं के अध्येताओं ने अपने शोध पत्र पढ़े।  इस अवसर पर विवि के जनसंपर्क अधिकारी डॉ.राजकुमार उपाध्याय ‘मणिÓ, आनंद कुमार, मुकेश कुमार नाग, डॉ.जुनैद खान, डॉ.सुषमा केरकेट्टा, डॉ.मनोज कुमार झारिया, डॉ.धीरज यादव, असीम केरकेट्टा, डॉ.आशीष कुमार, डॉ.अमृता कुमारी पंडा, डॉ.अर्नब बनर्जी, डॉ.जयस्तु दत्ता, समन नारायण उपाध्याय, उप-कुलसचिव अन्ताराम चौरे, सहायक कुलसचिव  रामजी मंडावी सहित सभी अध्यापक-अधिकारी उपस्थित थे। 

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