गिरजा ठाकुर
अंबिकापुर। हृदय रोग की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर आइएमए अंबिकापुर द्वारा एंजीओप्लास्टी पर कार्यशाला का आयोजन एसएमसी हॉस्पिटल रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.सतीश सूर्यवंशी और डॉ.रुपेश श्रीवास्तव का व्याख्यान हुआ। वर्तमान में हृदय रोग की संख्या में 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पहले हार्ट अटैक की बीमारी 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के मरीजों में होती थी अब हार्ट अटैक की बीमारी 18 वर्ष जैसी कम उम्र में भी हो रहा है। कम उम्र में हो रहे हार्ट अटैक का कारण धूम्रपान का सेवन, अनियमित खानपान व दिनचर्या है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 संक्रमण या वैक्सीन से हृदय रोग की घटना का कोई संबंध नहीं है। हृदयाघात हृदय की खून की गलियों में थक्का जमने के कारण होता है। तात्कालिक उपचार में खून पतला करने वाली व कोलेस्ट्रोल कम करने की दवाई का उपयोग से हृदयाघात की गंभीरता कम हो जाती है। हृदय की नली में खून का थक्का 80 प्रतिशत से ज्यादा होने पर केवल दवाइयों के सेवन से हृदयाघात को रोका नहीं जा सकता। एंजीओप्लास्टी आवश्यक होती है। वर्तमान में एंजीओप्लास्टी सुरक्षित है। मरीजों की एंजीओप्लास्टी के बाद सामान्यत: तीन दिन बाद छुट्टी कर दी जाती है। अंबिकापुर के स्थानीय कैथ लैब में 100 से ज्यादा एंजीओप्लास्टी सफलता पूर्वक की जा चुकी है। मंच का संचालन आईएमए सचिव डॉ.योगेंद्र गहरवाल व डॉ.दिव्या ने किया। कार्यक्रम में आइएमए अध्यक्ष डॉ.अंजु गोयल, समन्वयक डॉ.शैलेंद्र गुप्ता, डॉ.एनपी शर्मा, डॉ.मंजू शर्मा, डॉ.आरएन परीडा, डॉ.अमित यादव, डॉ.संजय सिंह, डॉ.संतोष सिंह, डॉ.अशोक, डॉ.रितेश गुप्ता, डॉ.मनोज गुप्ता, डॉ.दीपिका, डॉ.संजय सिंह उपस्थित रहे।

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