प्रोटोकॉल में कार्यक्रम का उल्लेख नहीं, हर बार सुर्खियों में रहता है सामूहिक विवाह  

गिरिजा ठाकुर

अंबिकापुर। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजनांतर्गत शहर में होने वाला कार्यक्रम किसी न किसी मसले को लेकर सुर्खियों में रहता है। पूर्व में विभाग के द्वारा विवाह के लिए आने वाले जोड़ों को दिए जाने वाले उपहार स्वरूप सामग्रियों में भारी घालमेल सुर्खियां बनी रहती थी। वहीं पिछले सामूहिक विवाह समारोह में विभागीय मंत्री की गैर मौजूदगी सुर्खियां बटोर रही थीं, इस बार मुख्य अतिथि मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रोटोकॉल में अंबिकापुर के हॉकी स्टेडियम में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह का शामिल न होना सुर्खियों में है। ऐसी बड़ी त्रुटियां जिम्मेदार अधिकारियों के गैर जिम्मेदराना रवैया के कारण हुईं या आयोजन को एक साजिश के तहत फीका बनाया गया, इसे लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। सामूहिक विवाह आयोजन स्थल तक मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का अंबिकापुर पहुंचने के बाद भी नहीं जाना कहीं न कहीं उनकी उपेक्षा को भी इंगित करा रहा है।

कार्यक्रम में अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल, लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष ललन प्रताप सिंह सहित अन्यान्य नेता तो जरूर नजर आए लेकिन सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो के अलावा कलेक्टर और सांसद सरगुजा की गैर मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे थे। बात करें सांसद सरगुजा की तो वे दिल्ली में हैं, इसलिए नहीं आए। भाजपा सरगुजा के कुछ जिला पदाधिकारी भी कार्यक्रम स्थल तक जाने के बाद दरवाजे से ही निकल लिए। इधर मंत्री का कार्यक्रम स्थल के करीब पहुंचने के बाद लौटने के पीछे जो कारण बताया जा रहा है कि वह अचानक किसी बैठक के लिए फोन आने से जुड़ा है, जिस कारण वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुइंर्। हालांकि यह बात किसी को पच नहीं रही है। इसके पहले कई दिनों रायपुर सहित स्थानीय स्तर पर महिला एवं बाल विकास व समाज कल्याण विभाग की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का अंबिकापुर में आयोजित वृहद मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजनांतर्गत सामूहिक विवाह में शामिल होना और 366 जोड़ों को आर्शीवाद देना सुनिश्चित था। इधर चर्चा इस बात की हो रही है कि सामंजस्य की कमी के कारण पहले तो काफी देर से शुरु हुआ वहीं अव्यवस्थाओं से खफा होकर मंत्री संभवत: आयोजन स्थल के दरवाजे से युगल जोड़ों को बिना आर्शीवाद दिए लौट गईं। वहीं 16 जनवरी के कार्यक्रमों का जो निर्धारण प्रोटोकॉल में किया गया था उसमें मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में शामिल होने का उल्लेख ही नहीं था। बता दें कि शासन की ओर से सामूहिक विवाह के आयोजन में प्रति जोड़े के खर्च के लिए 10 हजार रुपये निर्धारित किया था। ऐसे में 366 जोड़ों के विवाह के लिए दिए गए 36 लाख 60 हजार रुपये से आयोजन स्थल पर हुई तैयारियां फीकी नजर आ रही थी।

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