नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस पार्षदों के साथ तकिया-कतकालो प्लांट का किया औचक निरीक्षण

कहा-घोर लापरवाही से बिगड़ी शहर की पेयजल व्यवस्था

अंबिकापुर। नगर निगम क्षेत्र में पिछले कई दिनों से पेयजल संकट गहराने, आधे घंटे की जगह 5-10 मिनट ही पानी मिलने और कई वार्डों में गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायतों के बाद कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों के दल ने शुक्रवार को शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले तकिया एवं कतकालो फिल्टर प्लांट का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में जलापूर्ति व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आने के बाद कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन और सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि प्लांट का एक अहम मड पंप लंबे समय से खराब पड़ा है। फिल्टर बेड की कई महीनों से सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण वहां काई और घास जम गई है। जलापूर्ति विशेषज्ञों के अनुसार इससे जल शोधन क्षमता पर सीधा असर पड़ता है और सप्लाई होने वाले पानी की गुणवत्ता भी बिगड़ती है। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि अनुबंध के अनुसार दोनों प्लांटों में तीन शिफ्टों में कुल 32 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन मौके पर तकिया और कतकालो दोनों प्लांट मिलाकर सिर्फ 6 कर्मचारी ही कार्यरत मिले। जल शोधन के लिए जरूरी एलम (फिटकरी) का भी पर्याप्त स्टॉक नहीं था। नियमानुसार तीन महीने का स्टॉक होना चाहिए, जबकि मौके पर केवल 3 से 4 दिन का स्टॉक ही मिला। बरसात में नदी का पानी अधिक मटमैला होने से एलम की खपत बढ़ जाती है। कांग्रेस ने आशंका जताई कि एलम की कमी के कारण ही कई बार गंदा पानी सप्लाई हो रहा है।

क्षमता से आधा भी नहीं हो रहा उत्पादन

निरीक्षण के दौरान लॉग बुक और मौके की स्थिति देखने पर पता चला कि समस्या सिर्फ बिजली कटौती नहीं है। तकिया फिल्टर प्लांट की स्थापित क्षमता 17.5 एमएलडी है, लेकिन यहां से रोजाना मात्र 10 से 11 एमएलडी पानी ही शोधित करके सप्लाई किया जा रहा है। इसी तरह कतकालो प्लांट की क्षमता 18 एमएलडी होने के बावजूद यहां से केवल 12 से 13 एमएलडी पानी ही मिल रहा है। इस तरह दोनों प्लांट अपनी क्षमता से लगभग 40 प्रतिशत कम उत्पादन किया जा रहा है।

क्लैरिफ्लोकुलेटर और स्पेयर पार्ट्स की किल्लत

विशेषज्ञों ने बताया कि पानी की आपूर्ति कम होने का एक बड़ा कारण क्लैरिफ्लोकुलेटर का बंद होना भी है। कुल 6 क्लैरिफ्लोकुलेटर में से तकिया प्लांट के दोनों और कतकालो का एक यूनिट लंबे समय से बंद है। इस तरह 50 प्रतिशत यूनिट ही नहीं चल रहा है। इसके अलावा कतकालो प्लांट में कोई उपकरण खराब होने पर उसके पुर्जे पुणे या मुंबई से मंगाने पड़ते हैं, जिससे मरम्मत में हफ्तों लग जाते हैं। छोटे-छोटे आवश्यक स्पेयर पार्ट्स का भी स्थानीय स्तर पर कोई भंडारण नहीं है। बिजली गुल होने पर उपलब्ध जनरेटर का भी उपयोग नहीं किया जा रहा है।

सत्ता पक्ष की उदासीनता से पेयजल व्यवस्था बदहाल

नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि नगर निगम प्रशासन और सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि लगातार बिजली कटौती को जल संकट का कारण बता रहे थे, लेकिन निरीक्षण से स्पष्ट हो गया है कि असली कारण रख-रखाव में लापरवाही, स्टाफ की कमी और संसाधनों का अभाव है। उन्होंने कहा ‘सत्ता पक्ष की उदासीनता के कारण शहर की पेयजल व्यवस्था बदहाल हो गई है। क्षमता के अनुरूप जल शोधन नहीं होने से हजारों नागरिक परेशान हैं। गंदा पानी मिलने से लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। यह पूरी स्थिति प्रशासनिक विफलता और मिलीभगत को दर्शाती है। समय रहते सुधार किए होते तो शहरवासियों को यह संकट नहीं झेलना पड़ता।’

कलेक्टर से करेंगे शिकायत  

कांग्रेस पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को कलेक्टर से मुलाकात करके निरीक्षण की पूरी रिपोर्ट सौंपेगा। प्रतिनिधिमंडल दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, फिल्टर प्लांट की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार और शहर में नियमित एवं स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग करेगा। निरीक्षण दल में पार्षद पपिंदर सिंह, हसन खान, जे. कुजूर, निमन राशि एक्का, शुुभम जायसवाल, मो. बाबर, कलीम खान, मेघा खांडेकर, मो. अख्तर चम्मा, मिला तिर्की, लुकस एक्का सहित सभी कांग्रेस पार्षद उपस्थित थे।

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