दतिमा मोड़- श्री सीमेंट कंपनी द्वारा संचालित होने वाली कोल माइंस का लोगो ने पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया है। कोल खदान हेतु कुल ब्लॉक 807.91 हेक्टर और प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र खदान पट्टा सामान्य है। इस ब्लॉक के लिए खनन योजना और खदान बंद करने की कोल मंत्रालय द्वारा अनुमोदित किया गया है कोयला भूमिगत खनन से किया जाएगा। जिसका मानक उत्पादन क्षमता 0.36 मिलियन टन प्रतिवर्ष है एवं शीर्ष क्षमता 0.54 मिलियन टन अधिकतम है। खदान की कुल अवधि 15 वर्ष तक होगी। इस दौरान कंपनी द्वारा 807.91 हेक्टेयर जमीन पर कोयला खनन का कार्य किया जाएगा।
गौरतलब हो कि सूरजपुर जिले के ग्राम दतिमा में प्रस्तावित कोल माइंस जिसका आवंटन भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में श्री सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को हुआ था। उसकी पर्यावरण संरक्षण जन सुनवाई स्वीकृति के लिए आयोजित लोक सुनवाई
के दौरान ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए बहिष्कार कर खनन परियोजना का विरोध किया है। इस जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण विभाग के संबंधित अधिकारी, श्री सीमेंट के कार्यक्रम अधिकारी बी.ड़ी मिश्रा व प्रमोद द्विवेदी सहित सूरजपुर जिला प्रशासन से अपर कलेक्टर जगरनाथ वर्मा, एसडीएम शिवानी जायसवाल भैयाथान एसडीएम सागर सिंह, पुलिस विभाग से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष महतो उपस्थित रहे। दतिमा में अंडर ग्राउंड कोयला खदान के लिए मंगलवार को आयोजित जम्बूरी ग्राउंड में पर्यावरण जनसुनवाई का ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध किया है। बारी-बारी से लोगो ने माइक के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराया। इस जनसुनवाई कार्यक्रम का लोगों को जानकारी नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में लोग नहीं पहुंच पाये अन्यथा विरोध का स्वर और भी बुलंद हो सकता था। कोल माइंस के द्वारा आज तक ग्राम पंचायत को प्रभावित भू विस्थापितों को सूची उपलब्ध नही कराई गई है। जिसके कारण लोगों में आज भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आयोजित कोल माईनस व भू विस्थापित के मध्य किसी प्रकार का आपसी सामंजस्य नही बन पाई। कोल माइंस से होने वाले नुकसान की ओर जिला प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल का ध्यान आकृष्ट कराया और माइंस पर पेसा एक्ट के उल्लंघन का आरोप भी इलाके के ग्रामीणों ने लगाया है। जनसुनवाई में क्षेत्र के पक्ष एवं विपक्ष के नेता ग्रामीणों के साथ खड़े नजर आए उन्होंने भी खदान नहीं खोलने पुरज़ोर विरोध किया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकिन भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की उपस्थिति रही। ज्ञात हो कि दतिमा कोल माइंस से ग्राम राई, लक्ष्मणपुर, खरसुरा, कुन्दा, गागीकोट भी प्रभावित होगी। पर्यावरण संरक्षण के अधिकारी जब दतिमा में जन-सुनवाई के लिए पहुँचे, तो  स्थानीय रहवासियों ने साफ़ कह दिया है कि उन्हें किसी भी कीमत पर इस इलाके में कोयला खदान नहीं चाहिए। भारी विरोध के बाद सुनवाई रद्द कर अधिकारियों को खाली हाथ लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने एक स्वर में कोयला खदान का विरोध किया, कहा कि खदान से प्रभावित होने वाला क्षेत्र कृषि प्रधान है। इस पर अधिकतर आदिवासी समाज के लोग खेती-बाड़ी करके परिवार चलाते हैं। खेती ही यहां लोगों के आजीविका की साधन है। ग्रामीणों ने कहा कि खदान खुलने से खेती की जमीन को नुकसान होगा। लोगों के समक्ष परिवार के जीवन यापन की गंभीर समस्या आ जाएगी। पानी की समस्या होगी। ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान खदान का विरोध किया। गाँववालों ने पहले ही कह दिया था, कि वे इस इलाके में अब और कोयला खदान नहीं चाहते। पहले से आस पास में कई अन्य कई निजी माइंस संचालित हो रही है।  इन खदानों की वजह से प्रदूषण की स्थिति भयावह है। ऐसे में अब एक और कोयला खदान यहाँ नहीं चाहिए।
जलस्त्रोत पर भी होगा असर
ग्रामीणों का कहना है कि खदान से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में नदी नाले भी हैं। खदान खुलने पर नदी नालों के अस्तित्व पर संकट आ जाएगा। प्रभावित क्षेत्र में जल संकंट भी गंभीर हो जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि खदान के लिए कीमती वृक्षों की कटाई होगी इससे जंगल उजड़ जाएगा।

Categorized in: