पूर्व मंत्री और अजजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने प्रशासन के रवैये को सवालों के घेरे में लिया

अंबिकापुर/मैनपाट। तहसील मैनपाट के ग्राम सरभंजा में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना के संबंध में आयोजित जनसुनवाई का स्थानीय ग्रामीणों एवं आदिवासी समाज ने भारी संख्या में उपस्थित होकर जोरदार विरोध किया। ग्रामीणों का कहना था कि ग्राम सभा की पूर्व अनुमति एवं सहमति के बिना आयोजित यह जनसुनवाई पूरी तरह असंवैधानिक, गैर-कानूनी तथा आदिवासी समाज के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस दौरान उपस्थित अपर कलेक्टर पर जनता की आपत्तियां नहीं सुनने का भी आरोप लगा। ग्रामीणों ने कहा जनसुनवाई के नाम पर औपचारिकता निभाई जा रही है।

बारिश के बीच जनसुनवाई में पहुंचे पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और छत्तीसगढ़ राज्य अजजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक भानु प्रताप सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले ग्राम सभा की स्वतंत्र, पूर्व एवं सूचित सहमति, लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 244, पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम, 1996, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 तथा संविधान का अनुच्छेद 275 अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य केवल विकास करना नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की भूमि, जल, जंगल, संस्कृति, परंपरा और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

आपत्तियां लेने से इंकार करने का आरोप

भानु प्रताप सिंह ने कहा कि, ग्राम सभा अनुसूचित क्षेत्रों में सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। उसकी अनुमति के बिना आयोजित कोई भी जनसुनवाई कानून और संविधान की भावना के विपरीत है। प्रशासन यदि ग्राम सभा को दरकिनार करके निर्णय लेता है तो यह केवल प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने अपर कलेक्टर से बाहर आकर ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत आवेदन, आपत्तियां एवं ज्ञापन स्वीकार करने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित लोगों की बात विधिवत अभिलेख में दर्ज हो सके, किंतु उन्होंने इंकार कर दिया। प्रशासन के इस रवैये को उन्होंने प्राकृतिक न्याय, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के सिद्धांतों के विपरीत करार दिया। उन्होंने कहा लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाकर विकास नहीं किया जा सकता। ग्राम सभा की सहमति के बिना किसी भी खनन परियोजना को आगे बढ़ाना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। उन्होंने ग्राम सरभंजा की जनसुनवाई को तत्काल निरस्त करने की मांग प्रशासन से की है, और ग्राम सभा की स्वतंत्र सहमति प्राप्त किए बिना किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि या परियोजना को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया है।

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