हाल में लंबी दूरी तय करके अंबिकापुर पहुंचे ग्रामीण खाली हाथ वापस लौटे  

अंबिकापुर। सरगुजा जिला व संभाग में कई इलाकों में किसानों को यूरिया खाद के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। निजी दुकानों से यूरिया की कालाबाजारी किसी से छिपी नहीं है। यूरिया के थोक विक्रेता ग्रामीण इलाके के दुकानदारों को महंगे दाम में यूरिया बेच रहे हैं, इसके बाद गांव के फुटकर दुकानदार किसानों को 400-500 रुपये प्रति बोरी तक यूरिया की बिक्री करने में लगे हैं। सही दाम पर यूरिया के तलाश में निकले किसानों को यूरिया की जगह ठोकर मिल रही है। बारिश की राह देखते किसान धान की रोपाई में लगे हैं, जिसके लिए यूरिया खाद का होना जरूरी है।

बताया जा रहा है कि सरगुजा जिले में यूरिया खाद की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में की गई है, लेकिन निजी दुकानदार थोक में यूरिया लेने के बाद उसे किसानों को न बेचकर बिचौलियों को बेच रहे हैं और बिचौलिए गांव ले जाकर किसानों को 267 रुपये प्रति बोरी का यूरिया 400-500 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से बेच रहे हैं। ऐसे में किसानों को सही दाम पर यूरिया नहीं मिल रहा है। सहकारी समितियों से सिर्फ उन्ही किसानों को यूरिया मिल रहा है, जिन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लोन ले रखा है। नगद में यूरिया खरीदने वाले किसानों को यूरिया के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं अधिकारी यूरिया खाद के लिए किसी प्रकार की किल्लत नहीं होने की बातों को बल दे रहे हैं। इनका कहना है कि यूरिया की किल्लत बताकर भ्रम की स्थिति निर्मित की जा रही है। सहकारी समितियों के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद का वितरण किया गया है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक खाद की कमी का जो कारण सामने आ रहा है वह जिले से सटे अन्य जिले के किसानों द्वारा यूरिया खाद क्रय करके ले जाना है।

यूरिया की बिक्री पॉस मशीन के जरिए
सरकार ने नियम तय किया है कि यूरिया की बिक्री पॉस मशीन के जरिए की जाएगी। मशीन में किसान आधार कार्ड के माध्यम से फिंगर लगाएगा, इसके बाद उसके मांग के हिसाब से मशीन में यूरिया खाद की मात्रा दर्ज की जाएगी। किसानों के जागरूक नहीं होने की वजह से दुकानदार वास्तविक रूप से जितना यूरिया खाद बेचते हैं, उससे अधिक बिक्री दर्ज करने में पीछे नहीं हैं। किसान को वास्तविक रूप से बेचे गए यूरिया के बाद मात्रा में की गई हेराफेरी और कागजों में बेचे गए यूरिया की कालाबाजारी हो रही है। इसी यूरिया खाद को अवैध तरीके से 400 से 500 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से खपाया जा रहा है। जिला प्रशासन ने अधिकारियों को इसकी जांच करने निर्देश हैं, लेकिन जांच, कार्रवाई सवालों के घेरे में है।

सरकारी आंकड़ों में 16200 मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत
सरगुजा जिले में 16 हजार 200 मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है, अब तक सरगुजा में 13 हजार 792 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण व 12 हजार 417 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण हुआ है। ऐसे में 1374 मीट्रिक टन यूरिया सहकारी समिति व दुकानों में स्टॉक अनुसार उपलब्ध होगा। अधिकारी अधिकारी पर्याप्त मात्रा में खाद का स्टॉक होने की बात पर जोर दे रहे हैं, लेकिन सहकारी समिति के मैनेजर और कर्मचारी खाद की किल्लत बता रहे हैं।

ग्रामीणों की जुबानी
अंबिकापुर में दूरदराज के क्षेत्रों से यूरिया खाद की खरीदी करने आए शंकर दास, करन मिर्धा, चितरंजन ने बताया कि उन्हें जिस मात्रा में यूरिया खाद की जरूरत है, उचित दाम में सहकारी समितियों से नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में यूरिया की कमी को पूरा करने के लिए वे दुकानों का चक्कर काटने विवश हैं, जहां 400 से 500 रुपये तक में यूरिया बेचा जा रहा है। तीन दिन पहले 10 किलोमीटर का सफर तय करके यूरिया खाद के लिए अंबिकापुर आए शंकर दास ने बताया कि यहां भी सहकारी दुकान में यूरिया नहीं मिलने पर उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया गांव में 450 से 500 रुपये तक यूरिया लोग खरीद रहे हैं।

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