अंबिकापुर। सायबर ठगी के मामले में उपयोग किए गए म्यूल एकाउंट धारकों में कुछ ऐसी संस्थाओं का नाम सामने आया है, जिनमें बड़ी राशि का लेनदेन किया गया है। भारतीय सायबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल के द्वारा मामले को सामने लाने के बाद सूरजपुर थाना पुलिस ने दोनों संस्थानों के संचालकों के विरूद्ध केस दर्ज किया है और अग्रिम कार्रवाई कर रही है। दोनों संस्थानों के म्यूल एकाउंट में सवा करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन होना बताया जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय से सायबर ठगी में उपयोग किए गए म्यूल एकाउंट के खाता धारकों के विरूद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में सायबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल के माध्यम से विभिन्न बैंक शाखाओं में संचालित लेयर-1 एवं फर्जी मोबाइल नंबरों पर कार्रवाई करने की सूची डॉ. ध्रुव गुप्ता महानिरीक्षक एसआईबी, सीसीटीएनएस, सायबर क्राइम पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर के कार्यालय से वैधानिक कार्रवाई हेतु सूरजपुर के पुलिस अधीक्षक को प्राप्त हुआ है। पुलिस सूचीबद्ध म्यूल एकाउंट के धारकों की जांच के क्रम में विभिन्न खाता नम्बरों में किए गएा ट्रांजेक्शन का डिटेल प्राप्त की तो सामने आया कि देश के अलग-अलग राज्यों से संबंधित साइबर क्राइम में कुल 72,76,413 रुपये की ठगी विभिन्न बैंकों के म्यूल एकाउंट से की गई है। उक्त एकांउट नंबर के खाताधारक डी-एन चक्रधारी एज्युकेशन डव्हलपमेंट एसोसिएधन नामक संस्था के डायरेक्टर देवनारायण चक्रधारी पिता पवन कुमार और महेश कुमार पिता जगदीश प्रसाद निवासी बांसापारा सुरजपुर हैं। पुलिस ने संस्था के डारेक्टर सहित दोनों के विरूद्ध धारा 317(4), 318 (2), 61(2)(ए) का अपराध घटित होना पाया और इनके विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है। दूसरे मामले में जन सेवा शिक्षा एवं सामाजिक उत्थान नामक संस्था, जिसके ट्रस्टी गोलुनारायण चक्रधारी पिता पवन कुमार, देवनारायण चक्रधारी पिता पवन कुमार सूरजपुर एवं महेश कुमार पिता जगदीश प्रसाद के द्वारा सुनियोजित तरीके से अवैध धन अर्जित करने के उददेश्य से अपने बैंक एकाउंट को सायबर ठगी के अपराध में उपयोग करने हेतु संबंधित अपराधी गिरोह को देना पाया गया है। इनके विभिन्न खातों में 52,57000 हजार रुपये का लेनदेन होना पाया गया है। सूरजपुर थाना पुलिस ने इनके विरूद्ध भी धारा 317(4), 318 (2), 61(2) (ए) का अपराध पंजीबद्ध करके विवेचना में लिया है।

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