जीत…बहुमत…इसके बाद विधायक नहीं बड़ी जिम्मेदारी के आस में उपमुख्यमंत्री

गिरिजा ठाकुर 

अंबिकापुर। मतदान की समाप्ति के बाद जहां एक ओर जीत-हार को लेकर मंथन चल रहा है, वहीं हाईप्रोफाइल सीट अंबिकापुर विधानसभा के दावेदार टीएस सिंहदेव ने चुनाव परिणाम की घोषणा के पूर्व ही सीएम बनने की इच्छा व्यक्त कर दी है। उन्होंने कहा है कि दो तिहाई से कम बहुमत आने पर उन्हें निराशा होगी। सरकार बनने पर टीम का कप्तान कौन होगा, सवाल पर वे कह रहे हैं कि कप्तान का फैसला आलाकमान करेंगे। वे चाहेंगे कि मंत्रीमंडल का हिस्सा बनें। विधायक के रूप में काम नहीं करना चाहेंगे। वे कहते हैं सीएम नहीं बनने की स्थिति में आगे चुनाव लड़ने का कोई औचित्य नहीं है, न लड़ेंगे। जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसे निभाने की कोशिश करेंगे। मतगणना पूर्व दिया गया इनका बयान कांग्रेस की राजनीति में खलबली मचाने के लिए काफी है। अंबिकापुर विधानसभा सीट से जीत व छत्तीसगढ़ में बहुमत के बाद आलाकमान इन्हें हासिए पर रखता है, तो क्या होगा इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में बड़ी अंकीय राशि से अंबिकापुर विधानसभा की सीट से जीत हासिल किए टीएस सिंहदेव को विधानसभा क्षेत्र की जनता छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में देख रही थी। सरगुजा की 14 सीटों को कांग्रेस की झोली में डालने के बाद इनके मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावनाएं थीं। जनता टकटकी लगाए इस इंतजार में रही कि कब मुख्यमंत्री की कुर्सी में सिंहदेव बैठेंगे। ऐसा भी क्षण इस दौर में देखने को मिला कि मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल अनुरूप व्यवस्था की बात अंबिकापुर में वरिष्ठ पुलिस व प्रशासन के अधिकारी करने लगे थे। दिल्ली में कांग्रेस के आलाकमान तक मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए चल रही जद्दोजहर के बीच भूपेश और टीएस के सैकड़ों समर्थक भी रायपुर, अंबिकापुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों से दिल्ली में डटे थे। दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन की बनी स्थिति के बाद सरगुजा की जनता को उस समय निराशा हाथ लगी, जब मुख्यमंत्री की कुर्सी भूपेश बघेल को सौंप दी गई। इसके बाद ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री का नया शिगूफा छोड़ा गया। ढाई साल बीतने का जनता बेसब्री से इंतजार की, लेकिन पांच साल बीतने की पारी आने पर चंद महीने के लिए टीएस सिंहदेव को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दे दी गई। पदेन दायित्व को इन्होंने विधिवत संभाला, लेकिन जनता इससे संतुष्ट नहीं थी। वायदे के अनुरूप इन्हें ढाई साल पूरा होने पर मुख्यमंत्री की जवाबदेही नहीं दी गई। पुन: विधानसभा चुनाव 2023 में टीएस सिंहदेव की आलाकमान से करीबी सामने आई। चुनाव समाप्त होने के बाद अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा प्रत्याशी

के बीच कड़ी टक्कर जैसी बातें होते 24 घंटे नहीं हुए हैं कि टीएस सिंहदेव ने सिर्फ विधायक नहीं बल्कि बड़े ओहदे की इच्छाशक्ति को सामने ला दिया है।
पहले तो टीम किसकी बनेगी देखना है

कप्तानी की बात पर टीएस सिंहदेव कहते हैं कि वे टीम का सदस्य बनना चाहेंगे। पहले जीत फिर बहुमत जरूरी है। टीम बनेगी विपक्ष की बनेगी या पक्ष की बनेगी यह देखना है। इस उम्र में और इस समय में आ के विधायक के रूप में नहीं समझता कि मैं वैसा योगदान कर पाऊंगा। वे बड़ी सहजता से यह भी कहने से नहीं चूक रहे हैं कि विधायक किसी और को होना चाहिए। मंत्रीमंडल के सदस्य के रूप में अवश्य काम करना चाहूंगा, आगे जो जिम्मेदारी मिले।

किसके कितने ठाठ, आंकलन कर रहे सिंहदेव
उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने मतदान की समाप्ति के दूसरे दिन चुनावी समीकरण में किसके कितने ठाठ इसका आंकलन करना शुरू कर दिया है। वे अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र के हर पोलिंग में मतदाताओं की संख्या, किए गए मतदान का आंकलन करने के साथ कार्यकर्ताओं से रिपोर्ट हासिल कर रहे हैं। साथ ही वे यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि जिन्हें मैदानी स्तर पर जिम्मेदारी दी गई वे कितना खरा उतरे। संपर्क के मामले में अग्रिम पंक्ति में रहे टीएस सिंहदेव चौथी बार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिए हैं। हालांकि इस बार प्रदेश में कांग्रेस सरकार की वापसी को लेकर नपा-तुला भाव ही वे सामने ला रहे हंै। स्वयं की जीत को लेकर उनका मानना है कि अब तक सामने आई रिपोर्ट में वे अंबिकापुर विधानसभा से आगे हंै। अंबिकापुर, लखनपुर व उदयपुर के ग्रामीण क्षेत्र की रिपोर्ट आने के बाद जीत का अंतर कितना होगा, स्पष्ट होने की बात वे कर रहे हैं।

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