जिम्मेदारों की उदासीनता से आहत नगरवासियों ने कहा-ग्रामीण क्षेत्रों में है मुक्तिधाम


बलरामपुर। नगर विकास के दावों को गिनती गिनाकर ढिंढोरा पीटने वालों के लिए शर्मनाक पहलू यह है कि जिला मुख्यालय में बलरामपुर में आज तक मुक्ति धाम नहीं है। नगर के लोग किसी स्वजन के मौत होने पर सिंदूर नदी में खुले आसमान के नीचे शव दाह करने के लिए मजबूर हैं।
नगर के लोगों का कहना है कि इस मुद्दे को कई बार जनप्रतिनिधियों के सामने उठाया गया, लेकिन हर बार सिर्फ बहुत जल्द मुक्तिधाम निर्माण होने का आश्वासन मिला। यह जुमला कब हकीकत बनेगा, इस इंतजार में नगर के लोग हैं। बरसात के दौरान जब जमीन कीचड़ से भर जाता है, तब खुले में अंतिम संस्कार करना किसी त्रासदी से कम नहीं होता। न स्थान सुरक्षित होता है, न ही किसी तरह की सुविधा मिल पाती है। शव दाह की घड़ी में भी लोगों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है।
मुख्यालय में उपेक्षा का दंश
यह विडंबना ही है कि बलरामपुर जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में मुक्तिधाम का निर्माण किया गया है, लेकिन जिला मुख्यालय जहां से लोक कल्याण की योजनाओं का क्रियान्वयन होता है, वहां दिया तले अंधेरा जैसी स्थिति बनी हुई है। नगर के जागरूक नागरिकों ने सवाल उठाया कि जब छोटे-छोटे गांवों में मुक्ति धाम बन सकता है, तो जिला मुख्यालय को क्यों नजरअंदाज़ किया जा रहा है। इससे नगरवासियों की भावनाएं आहत हो रही हैं।
नगर के लोगों का कहना है
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जिले में लगभग 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवा दे रहे वरिष्ठ पत्रकार संजय गुप्ता का कहना है कि चिंताजनक विषय है कि जिला मुख्यालय होने के बाद भी यहां एक मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो पाया है। जिला को गठन हुए वर्षों बीत गए, लेकिन किसी की मौत के बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा नहीं मिल पाई है। नगर पालिका उपाध्यक्ष दिलीप सोनी ने कहा कि मुक्तिधाम की विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री रामविचार नेताम से मांग की गई है, और आश्वासन भी मिला है। श्री नेताम लगातार बलरामपुर के विकास कार्यों के लिए तत्पर रहते हैं, हमें भरोसा है कि यह सुविधा नगर के लोगों को जल्द ही मिलेगी। वरिष्ठ नागरिक नन्हेलाल गुप्ता ने कहा कि आज लगभग सभी ग्राम पंचायतों में मुक्तिधाम की सुविधा है, लेकिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बलरामपुर जिला मुख्यालय इससे अछूता है। ऐसा लगता है कि जिला मुख्यालय के नागरिकों की पीड़ा और सम्मान का कोई मूल्य नहीं है। इस विषय को प्राथमिकता देने और अतिशीघ्र मुक्तिधाम निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। नगर के वरिष्ठ नागरिक राजू सिंह ने कहा कि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद राम के कार्यकाल में बलरामपुर नगर के लिए एक मुक्तिधाम के निर्माण हेतु भूमि का नक्शा और प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। दुर्भाग्यवश वर्षों बीतने के बाद भी नगर को एक व्यवस्थित मुक्तिधाम नहीं मिल पाया है। जिम्मेदार लोगों की उदासीनता और लापरवाही का खामियाजा नगरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। नगर पुरोहित सुरेंद्र मिश्रा ने बलरामपुर जिला मुख्यालय में सुव्यवस्थित मुक्तिधाम नहीं रहने से लोगों को अंत्येष्टि के समय कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में कीचड़, और जलभराव जैसी स्थितियां बनती हैं। कई बार शवों के दाह संस्कार के बीच अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे अवरोध की स्थिति बनती है, या शव बह जाने का खतरा बन जाता है। यह न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत दुखद है। नगर में तत्काल एक समुचित और सुरक्षित मुक्तिधाम का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।

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