महापौर ने कहा-बिना किसी पक्षपात के करेंगे 48 वार्डों का विकास, विपक्ष रहा असंतुष्ट
अंबिकापुर। नगर पालिक निगम में नई सरकार के पदभार ग्रहण करने के बाद दूसरी सामान्य सभा गुरूवार, 16 अक्टूबर को कंपनी बाजार में स्थित सरगुजा सदन में हुई। 28 अप्रैल 2025 के बाद, छह माह के अंतराल में हुई सामान्य सभा को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक व हंगामे की स्थिति बनी। एक पार्षद ने अपनी बातों को सदन में रखने के साथ सत्ता पक्ष का बखान करना शुरू किया, जिस पर नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने नाराजगी जाहिर की, और आधे घंटे से अधिक कुछ ऐसा हंगामा हुआ कि सदन में मौजूद पक्ष-विपक्ष के अधिकांश पार्षदों के साथ महापौर अपने-अपने स्थान पर खड़े रहकर नोकझोंक का हिस्सा बन गए। सामान्य सभा में संपत्ति व समेकित कर में हुई आंशिक बढ़ोतरी को प्रस्तुत करने के साथ निगम के नियमित आय के लिए बनाई गई कार्ययोजना से अवगत कराया गया।
प्रश्नकाल के प्रारंभ में निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने 6 माह बाद सामान्य सभा करने को लेकर आपत्ति जताते हुए नियमों की अनदेखी को जनता की समस्याओं से बचकर भागने की नीति बताया। उन्होंने कहा बैठक ही नहीं होंगी तो विपक्ष कमियों और समस्याओं को कैसे सामने लाएगा। पूर्व की बैठक में बारिश में होने वाली समस्याओं को लेकर पक्ष-विपक्ष द्वारा चर्चा की गई, दूसरी बैठक होते तक पूरा बारिश का मौसम बीत गया। उन्होंने विकास कार्यों के मामले में कांग्रेस पार्षदों के वार्डों से भेदभाव करने का आरोप लगाया, जिस पर सत्तापक्ष ने प्राथमिकताएं तय करके काम तय करने की बात कही। सड़कों की दुर्दशा को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा आम लोग परेशान होकर निगम और नेताओं को गालियां दे रहे हैं। दीपावली पूर्व ठेला-गुमटियों को हटाने की कार्रवाई की गई, इस दौरान ठेला संचालकों से कर्मचारियों ने गलत व्यवहार किया, जिन पर कार्रवाई होनी चाहिए। केन्द्र सरकार को नगर विकास योजना के लिए मात्र एक पेज का दस्तावेज भेजे जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई और निगम के अफसरों व सत्ता पक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने निगम में बैठे लोक निर्माण विभाग के अमला पर सदन को गलत जानकारी देकर गुमराह करने का खुला आरोप लगाया, और भेजे गए प्रस्तावों की कमेटी बनाकर जांच कराने पर जोर दिया।
विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए निगम के लोक निर्माण विभाग प्रभारी मनीष सिंह खड़े हुए, उन्होंने कहा कि ठेला-गुमटी के कारण यातायात की समस्या आ रही थी, इन्हें पूर्व में भी नोटिस दिया गया था इसके बाद कार्रवाई हुई है। थाना चौक पर कुछ लोगों द्वारा शासकीय भूमि पर पक्का निर्माण कर लिया गया था। खराब सड़कों के बारे में उन्होंने कहा कि सड़कें एक दिन में ही खराब नहीं हुई हंै। कांग्रेस के कार्यकाल में जब यहां से डिप्टी सीएम थे, तब भी हमने शासन से मिलने वाली राशि की कमी और समस्याओं को देखा है। उन्होंने कहा कि इस बार बारिश भी ज्यादा हुई और आम लोगों को राहत दिलाने के कार्यों को प्राथमिकता देने के कारण सामान्य सभा की बैठक में विलम्ब हो गया। उन्होंने सड़कों के मुद्दे पर मिल-जुलकर पक्ष-विपक्ष से काम करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत निगम को विकास कार्यों के लिए 23 करोड़ की राशि मिली है इसके तहत महामाया द्वार चौक से महामाया मंदिर तक कारीडोर का निर्माण कराया जाएगा।
पार्षद ने कहा-कई शिकायतें पोर्टल पर इंद्राज नहीं
लोक निर्माण विभाग के प्रभारी ने राज्य शासन द्वारा चलाए गए सुशासन तिहार को लेकर उठे सवाल का जवाब देते हुए बताया कि सुशासन त्यौहार के दौरान निगम क्षेत्र में 6500 के करीब आवेदन आए थे, जिनमें से 617 शिकायत से संबंधित थे। प्राप्त आवेदनों में 5053 निकाय के मामलों से संबंधित थे। इनमें से 5039 आवेदन शासन को भेजा गया। पार्षद मेराज रंगरेज ने आरोप लगाया कि सुशासन तिहार में प्राप्त कई शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल पर इंद्राज नहीं की गई है, तो उसका निराकरण कैसे होगा। इस मामले में विपक्ष ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। इस पर महापौर मंजूषा भगत ने जांच कराने की बात कही। मेराज रंगरेज ने उनके वार्ड के लिए स्वीकृत 10 लाख के टेंडर को निरस्त करके 8 लाख का टेंडर स्वीकृत करने को भी सवालों के घेरे में लिया।
जिम्मेदारी तय करके करें कार्रवाई-शफी
नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि सुशासन तिहार के तहत अधिकारियों की ड्यूटी सुनिश्चित की गई थी। किस अधिकारी ने आवेदन प्राप्त किया, इसकी जानकारी लेकर जिम्मेदारी सुनिश्चित करते हुए संबंधित के विरूद्ध कार्रवाई की जाए। उन्होंने कड़े लहजे में यह भी कहा कि हमर सरकार तुंहर द्वार, सुशासन तिहार के शिविर वार्ड-वार्ड में लगाए गए थे, यहां जनता ने घंटों समय दिया, क्या यह कैंप आम नागरिकों को परेशान करने के लिए लगाया गया था?
कांग्रेस के शासन में निगम का इलाका था नरक
महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि सदन की कार्रवाई शुरू होने के बाद से वे सबकी बातों को सुन रही हैं। विपक्ष की बातों का सम्मान करते हुए उन्होंने कहा जब शहर में कांग्रेस की सरकार थी, तो निगम का इलाका नरक से कम नहीं था। उन्होंने पूर्व के कार्यकाल को भी देखा है। उन्होंने विपक्ष को आश्वस्त किया कि बिना किसी भेदभाव के पूरे शहर का विकास होगा। नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि निगम में कांग्रेस की सत्ता के समय स्वीकृत 23 करोड़ के कार्यों में से 16 करोड़ से ज्यादा की राशि से वर्तमान में कार्य कराए जा रहे हैं। एक ओर जहां भाजपा पार्षदों के वार्डों में 2.5 करोड़ तक के काम हो रहे हैं, वहीं कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में नाम मात्र का कार्य दिया गया है। जब वे भाजपा व कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में स्वीकृत कार्यों की सूची को पढ़ना शुरू किए, तो सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी ने उन्हें रोका। बैठक में पार्षद राहुल त्रिपाठी ने शहर में 11 करोड़ की लागत से नालंदा की तर्ज पर पुस्तकालय स्वीकृत होने पर शासन का आभार जताया। पार्षद शिवमंगल सिंह ने भी शासकीय भूमि के चिन्हांकन सहित अन्य मुद्दों को सामने लाया। इस दौरान पक्ष व विपक्ष में बीच काफी वाद-विवाद की स्थिति बन गई।
शहरवासियों के हित के लिए मास्टरप्लान जरूरी
वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने नए मास्टर प्लान की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि 2021 में कोरोना काल के कारण इस पर काम नहीं हो पाया। 2011 में बना मास्टर प्लान विसंगतियों से भरा है। उन्होंने कहा यह पक्ष-विपक्ष का नहीं बल्कि शहर के हित का मामला है। उन्होंने कहा यह काम टाउन एंड कंट्री प्लानिंग का है। नया मास्टर प्लान नहीं बनने के कारण इस बारिश में भयावाह स्थिति का लोगों को सामना करना पड़ा। उन्होंने अमृत मिशन योजना को भी सवालों के घेरे में लिया, जिससे शहर के आधे वार्ड के लोगों को ही पानी मिल पा रहा था, और शहर की आधी आबादी बांकी डैम के पानी के भरोसे है। उन्होंने कहा कि अमृत मिशन-2 को अभी तक क्यों मंजूरी नहीं मिली, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। महापौर मंजूषा भगत ने मास्टर प्लान का स्वागत करते हुए इसे शासन को भेजने के लिए कहा।

Categorized in: