बारिश में कुछ वार्डों में भर्ती मरीजों को पानी से बचाने स्वजन कर रहे मशक्कत

अंबिकापुर। बारिश शुरू होते ही उत्तर छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल की छत टपक रही है। अस्पताल भवन की हालत वैसे भी जर्जर है। कई वार्डों में छत से टपकते पानी को रोकने ऊपर से शेड लगाए गए हैं, लेकिन हालात में बदलाव पूरी तरह से नहीं आ पाया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल के लिए नए भवन की जरूरत महसूस की जा रही है। बारिश का पानी टपकने से मरीजों और उनके स्वजन के साथ ही यहां सेवा देने वाले चिकित्सकों और स्टाफ को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बता दें कि पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण अस्पताल के 6 वार्ड वाले पुराने टीबी वार्ड की दुर्गति तो हो ही गई है, मुख्य भवन में भी टपकते पानी का नजारा देखने को मिल रहा है। टाइल्स की चिकनाई के कारण फर्श में फिसलन की स्थिति बन रही है। आए दिन मरीज और उनके संबंधी गिर रहे हैं। स्वच्छकों के द्वारा साफ-सफाई का ध्यान तो रखा जा रहा है, लेकिन अनवरत मरीजों का आना-जाना लगे रहने से सफेद टाइल्स बदरंग नजर आ रहे हैं। खासकर बुजुर्ग, गंभीर मरीज और चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी वाली है। टपकती छत के साथ दीवारों में नमी से भर्ती मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा है। एक मरीज के संबंधी कमलेश चौबे ने कहा अस्पताल की स्थिति खराब है, वार्ड में पानी टपक रहा है। बैठने के लिए जगह तलाशना पड़ रहा है। अस्पताल का यह भवन भगवान भरोसे है। पानी के निरंतर टपकने से छत से प्लास्टर का स्लैब कब गिर जाए, कोई भरोसा नहीं है। बिजली के बोर्ड तक पानी से तर हैं, करंट का भय बने रहता है। सरगुजा संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में ऐसे हालातों का नजर आना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा अलार्म है।

इलेक्ट्रानिक सामान तक सुरक्षित नहीं

अस्पताल परिसर में स्थित सरगुजा संभाग के एमडीआर, टीबी चिकित्सालय भवन, जिला क्षय उन्मूलन केन्द्र में तो हालात ऐसे हैं कि वार्ड में भर्ती किए गए मरीजों को हटाने की नौबत बन रही है। टपकते पानी के कारण यहां रखे इलेक्ट्रॉनिक सहित अन्य सामान भी सुरक्षित नहीं हैं। बिजली के बोर्ड तक पानी से तर हो गए हैं, करंट का खतरा हर पल मंडरा रहा है। डॉक्टर शैलेंद्र गुप्ता ने कहा कि दो-तीन दिन से हो रही मूसलाधार बारिश में अच्छे से अच्छे नवनिर्मित मकान भी चूने की कगार पर हैं। रही बात 6 वार्ड के पुराने भवन की, तो यह पहले से ही जर्जर स्थिति में है। इसकी सूचना संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को भी दी गई है।

मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि, पिछले साल ही जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए सीजीएमएससी को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने आधा-अधूरा काम किया। पानी टपकने से बचाने के लिए ऊपर शेड जैसा कुछ लगाया गया था, लेकिन उससे कोई फायदा पहुंचा कि नहीं, नहीं बोल सकते। उन्होंने स्वीकारा कि, वार्ड और भर्ती मरीजों को परेशानी हो रही है, लेकिन इन्हें असुविधा न हो इस पर अस्पताल प्रशासन की नजर है। मरीजों के लिए बैकअप में आइसोलेशन वार्ड में व्यवस्था रखी गई है। थोड़ी भी कठिनाई की स्थिति में मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट भी कर दिया गया है।

पुराने भवनों का पुख्ता मरम्मत जरूर

मेडिकल कॉलेज अस्पताल संभाग का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहां सरगुजा संभाग के अलावा सीमावर्ती जिलों से भी मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। ऐसे में भवन की जर्जर स्थिति सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी है। हर साल बारिश में यही समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। इससे रख-रखाव व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। समय रहते वार्डों के छत से पानी टपकने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई होती, तो ऐसे हालात नहीं बनते। मरीजों के संबंधियों ने कहा कि जर्जर भवनों की पुख्ता मरम्मत की ओर प्रशासन को ध्यान देना होगा, ताकि मरीजों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में इलाज की सुविधा मिल सके।

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