अंबिकापुर। बेरोजगारों को इंटरनेशल टूर, लग्जरी वाहन में घूमने का सब्जबाग दिखाकर करोड़ों रुपये बटोरने से क्षुब्ध सैकड़ों युवा-युवतियों का जत्था आक्रोशित होकर सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा। कंपनी के कथित कर्ताधर्ता भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे थे, जो खुद का भांडा फूटते देख पिछले दरवाजे से कार छोड़कर निकल लिए। सैकड़ों की संख्या में युवा-युवतियों के कोतवाली थाना पहुंचने की खबर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोतवाली थाना पहुंचे, वहीं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में पहुंच कर नारेबाजी करने में लगे युवक-युवतियों की बातों को सुनने के बाद इन्हें लिखित में शिकायत करने और वैधानिक कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया। युवक-युवतियों का कहना है कि नौकरी व अच्छा पगार मिलने का झांसा देकर उनसे 14 हजार रुपये से 70 हजार रुपये तक लिए गए हैं। बच्चों की ख्वाहिश पूरी करने किसी ने खेत गिरवी रख दिया, तो किसी ने स्व सहायता समूह से लोन लेकर रकम, पुराने जेवर बेचने के बाद मिली रकम इनके भेंट चढ़ा दी।

शहर के गांधीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत जवाहर मार्केट नवापारा में लंबे समय से वर्चुअल फैशन अशिष्ट प्राइवेट लिमिटेड का संचालन किया जा रहा है। इनके कर्ताधर्ता के द्वारा सैकड़ों की संख्या में सरगुजा संभाग के विभिन्न जिले के बेरोजगारों को सुनहरे भविष्य का ख्वाब दिखाकर किसी से 14 हजार तो किसी से 25, 35 हजार से 70 हजार रुपये तक ले लिया। इन्हें चार दिवस प्रशिक्षण देकर पर्सनालिटी में बदलाव लाने की ऐसी घुट्टी पिलाई गई कि वे झांसे में आ गए। रुपये हासिल करने के बाद कंपनी के कर्ताधर्ता ने अपने नीचे चार लोगों को जोड़ने कहा। इनके नीचे जो जुड़ते, उन्हें चार-चार लोगों को जोड़ना था। इसके पहले 15 हजार से 25 हजार रुपये तक की नौकरी देने का प्रलोभन दिया गया था। यहां सैकड़ों युवा-युवतियों का रेला देखकर बेरोजगारी दूर होने की आस में पहुंचने वाले इनके झांसे में आते चले गए। इसके बाद खुद में बदलाव लाने घर-परिवार के सदस्यों पर दबाव बनाकर जमा पूंजी भी लुटा डाली। सोनी राजवाड़े पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम की तलाश में इनके चंगुल में फंस गई। इसका कहना है कि उसने 70 हजार रुपये समूह से कर्ज लेकर दिए हैं। कंपनी में ताला लग जाए लेकिन उसे रुपये वापस चाहिए। उसे समझ में नहीं आ रहा है, कैसे कर्ज की भरपाई होगी। राजपुर की उर्मिला ने 35 हजार रुपये से अधिक इनके आगे भेंट चढ़ा दिया। इसके लिए स्वजन को खेत गिरवी रखना पड़ गया। बैकुंठपुर की राजकुमारी व पार्वती बिजनेस पार्टनर हैं, इन्हें जॉब मिलेगा कहते हुए 14-14 हजार लिए गए थे। चार माह से अधिक हो गए वेतन नहीं मिला। चंद्रावती के स्वजन ने 70 हजार रुपये देने के लिए घर का बकरा-बकरी तक बेच दिया। इन्हें माह में 25 हजार रुपये देने कहा गया था, एक बार 11 हजार देने के बाद नौ माह से वेतन के इंतजार में है। बरगीडीह की तृषा ने 70 हजार रुपये दिए, इसके लिए उसके स्वजन को जमीन बेचनी पड़ी। लुण्ड्रा की अनिता मानिकपुरी कहती है कि नौकरी हासिल करने के लिए वह घर वालों से लड़-झगड़कर 14 हजार रुपये हासिल की थी। ऐसी ही कई दास्तान इन बेरोजगार युवक-युवतियों के सीने में दफन है। इन्हें नौकरी के साथ अतिरिक्त और अच्छी आमदनी के लिए आश्वस्त किया गया था। भविष्य में आलीशान मकान, स्वयं का फोर व्हीलर, इंटरनेशल टूर में जाने का ख्वाब दिखाया गया था। बता दें वर्चुअल फैशन अशिष्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर गोरखधंधा करने में लगे विनय व सुनील जायसवाल के विरूद्ध पूर्व में भी प्रशासन ने कार्रवाई की थी। कार्रवाई से जैसे-तैसे बरी होने के बाद वे पुन: पुराने ढर्रे में आंशिक बदलाव लाकर गोरखधंधा शुरू कर दिए। सुर्खियों में आए कंपनी संचालकों के बदलते रूख को देखने के बाद युवा-युवतियों का समूह कई दिनों से पुलिस अधिकारियों का चक्कर काट रहा है।

नौकरी की जगह थमा दिया कपड़ा
पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे राधा, पूर्णिमा, दीपक, तुषार, किरण, राजेंद्र, फूलसुंदरी, राजकुमार, दिनेश कुमार यादव, संजय सिंह, अखिलेश में से अधिकांश ने 35 से 70 हजार रुपये इनके हवाले कर दिया। इन्हें 15 से 25 हजार रुपये तक की नौकरी, प्रमोशन देने की बात कही गई थी, बाद में ये कपड़ा बेचने से ही नहीं उबर पाए। कपड़ा भी ऐसा जिसकी कीमत सुनकर कोई लेने को तैयार नहीं होता था। जीवंती पैकरा, रजनी पैकरा, वृहस्पति पैकरा, अर्जुन सिंह, अमृत कुजूर, शिवराम, अंजली देवांगन भी 14 से 35 व 70 हजार रुपये इन्हें भेंट चढ़ा दिए। यही नहीं अपने परिचितों को भी अच्छी आमदनी के लोभ में अपने नीचे जोड़ डाला। इसके एवज में चंद रुपये मिले, जिससे वे खुद को ठगा महसूस करने लगे। घर, परिवार से अर्जित रुपये को हासिल करने के बाद इन्हें दो-चार सौ रुपये का कपड़ा बेचने के लिए दिया जाने लगा, जिसकी कीमत हजारों में रहती थी। युवक-युवतियों ने रुपये वापस करने कहा तो उन्हें धिक्कार भरी नजरों से कंपनी के कर्ताधर्ता देखने लगे। इन हालातों के बीच शहर के आसपास सहित सरगुजा संभाग के जशपुर, कोरिया, बलरामपुर, सूरजपुर जिले तक के युवक-युवतियों के सामने स्थिति ऐसी हो गई कि वे न तो घर की ओर वापस रूख कर सकते थे और न ही इनके चंगुल से निकलकर कहीं जा सकते थे।

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