बिश्रामपुर। नगर पंचायत बिश्रामपुर द्वारा एसईसीएल की लीज भूमि पर वर्ष 2007 में अधोसंरचना मद व मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना मद से वार्ड क्रमांक 10 में निर्मित कराए गए प्रतिक्षालय भवन व उसके आहता एवं गायत्री मंदिर के समीप बने व्यवसायिक परिसर को न्यायालय के निर्देश का हवाला देकर एसईसीएल का सुरक्षा अमला स्थानीय पुलिस कर्मियों को लेकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार को एसईसीएल की टीम जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने वार्ड क्रमांक 10 में कंपनी के लीज होल्ड एरिया में खसरा क्रमांक 311 में 4500 वर्ग फीट में बने सामुदायिक भवन के पास पहुंची और ध्वस्तीकरण कार्य शुरू कर दिया और आधे घंटे में सामुदायिक भवन और पार्षद निधि से बने उसके चाहर दिवारी को ध्वस्त कर दिया। इस कार्यवाही की नगर पंचायत अमले को भनक तक नहीं लगी। यहां कार्यवाही पूरी कर टीम गायत्री मंदिर के बाजू जेएमक्यू कॉलोनी मार्ग पर कंपनी की लीज भूमि खसरा क्रमांक 380 पर मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत वर्ष 2007 में बने व्यवसायिक परिसर 16 नग दुकानों के ध्वस्तीकरण की कार्यवाही जब शुरू हुई, तब नगर पंचायत के अधिकारी मौके पर पहुंचे और इधर उधर फोन लगाकर किसी तरह कार्यवाही रुकवाया।बताया जा रहा है कि नगर पंचायत ने पांच दिन की मोहलत मांगी है, जिस पर प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद कार्यवाही रुकी। नगर पंचायत का गठन वर्ष 2003 में हुआ था। पूरा नगर पंचायत क्षेत्र एसईसीएल के लीज भूमि में स्थित है। नगर पंचायत के पास खुद की भूमि नहीं होने से शासन द्वारा प्रतिवर्ष विकास कार्य के लिए जारी किए जाने वाले विकास व निर्माण कार्य के करोड़ो रुपए लीज भूमि में अब तक फूंके जा चुके हैं। वर्ष 2007 में उक्त दोनों निर्माण कार्य के लिए राशि जारी होने और काम भी लगभग पूरा होने के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने न्यायालय से स्थगन आदेश लेकर काम रुकवा दिया और अब ये दोनों भवन आधा अधूरा निर्माण के चलते खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। तब के प्रकरण में पांच माह पूर्व गत दिनों 10 मई को तृतीय व्यवहार न्यायाधीश डीएस बघेल के न्यायालय ने एसईसीएल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नगर पंचायत को चार माह के भीतर निर्माण के कार्य को अपने खर्च पर तोड़कर भूमि को वादी को सौंपने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके नगर पंचायत प्रबंधन ने न्यायालय के निर्देश पर ध्यान नहीं दे रही थी, जिसके बाद प्रबंधन ने तीन दिन पूर्व नगर पंचायत प्रबंधन को सूचना देकर आज ध्वस्तीकरण की कार्यवाही शुरू कर दी है। नगर पंचायत प्रबंधन का कहना है कि उसे अदालत से पहले दो बार स्थगन मिल चुका था। वर्तमान में प्रबंधन ने अचानक केस की फाइल खुलवाई है और वर्तमान में न्यायालय के सुनवाई की उन्हें भनक तक नहीं लगी और न ही इस मामले में उन्हें सुनवाई के दौरान कोई नोटिस मिला। साथ ही फैसले की जानकारी भी नहीं लगी। उन्हें तीन दिवस पूर्व एसईसीएल की चिट्ठी जरूर मिली थी।

वर्तमान में लीज भूमि में चल रहे डेढ़ करोड़ के कार्य

ज्ञात हो कि एक ओर प्रबंधन बेदखली कार्यवाही शुरू किया है, वहीं दूसरी तरफ नगर पंचायत द्वारा वार्ड क्रमांक एक में एसएलआरएम सेंटर के बाजू में 55 लाख की लागत से इंडोर स्टेडियम व 40 लाख रुपए का जीम सेंटर सहित अलग अलग वार्डों में लाखों के निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। उक्त सभी कार्य एसईसीएल की भूमि पर ही हो रहे हैं।

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