युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया बच्चों के भविष्य को अंधकार में डालने वाला
अंबिकापुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शिक्षा न्याय पहल प्रारंभ करके वर्तमान सरकार द्वारा जिस तरह से लगभग 45 हजार पदों को समाप्त करने की मुहिम चालू की है, उसका पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया है। इसी तारतम्य में सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय, राजीव भवन में छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सरकार के युक्तियुक्तकरण की पहल का बड़ा प्रभाव सीधे तौर पर शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और गुणवत्ता पर पड़ने वाला है। पैसा बचाने के लिए जो सरकार बच्चों का भविष्य अंधकारमय करे, उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है। सरकार को त्रुटिपूर्ण युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया बंद करनी चाहिए।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री का इस विषय में कथन उन्होंने सुना, दोनों ने कहा कि हम जो कह रहे हैं वह शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए कह रहे हैं। इसे सुनने के बाद लगा कि मेरी बुद्धि में कुछ कमी आ गई होगी, या मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि प्राथमिक स्कूल में दो की जगह एक शिक्षक रखने पर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी कैसे? कैसे एक शिक्षक को हटाकर आप बेहतर ज्ञान दिया जा सकता है? पहले पहली से पांचवी क्लास तक की पढ़ाई होती थी, हर विषय के अलग शिक्षक आते थे और यहां पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई एक हेडमास्टर और एक शिक्षक से कराने की कवायद शुरू है, जबकि इन प्राथमिक शालाओं के 5 क्लास में 18 विषय हैं। दो टीचर पांच क्लास में 18 विषय पढ़ाएंगे। इसके साथ ही हेडमास्टर को और भी तमाम कार्यालयीन जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। दो क्लास को एक साथ बैठाने पर दोनों को शिक्षक को आधा-आधा समय देना पड़ेगा। ऐसे में तो शासकीय स्कूल के बच्चों में शिक्षा का स्तर और कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की सोच जिस क्षेत्र में खर्च करने की है, वहां के लिए आय का स्रोत सृजन नहीं कर पा रही है। सरकार राजस्व बढ़ाने का विकल्प भी नहीं तराश पा रही है। जिस प्रकार निजी व्यवसायी, व्यवसाय प्रभावित होने पर कर्मचारियों की छटनी करता है, वही काम सरकार कर रही है। व्यवसायी के दृष्टिकोण से चलकर सरकार सेवा नहीं कर सकती है। शिक्षा और स्वास्थ्य सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है, इससे समझौता नहीं कर सकते। पत्रकारों से चर्चा के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, पूर्व अध्यक्ष राकेश गुप्ता, डॉ. जेपी श्रीवास्तव, हेमन्त सिन्हा, मो. इस्लाम, अनूप मेहता, अशफाक अली, दुर्गेश गुप्ता सहित अन्य उपस्थित थे।
10,463 स्कूल बंद होने से रोजगार पर लगेगा ग्रहण
टीएस सिंहदेव ने कि छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने मोदी की गारंटी के नाम पर जो घोषणापत्र जारी किया था, उसमें प्रदेश की जनता, विशेष तौर पर बेरोजगारों से यह वादा किया गया था कि प्रदेश में शिक्षकों के 57 हजार पद भरे जाएंगे। यह भी वादा था कि, शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए बंद पड़े स्कूलों को खोला जाएगा। अपने इन वादों पर प्रदेश की भाजपा सरकार ने आज तक कोई कदम नहीं उठाया है। इसके विपरीत सरकार शिक्षा विभाग में नए सेटअप के नाम पर युक्तियुक्तकरण की नई नीति लेकर आ गई है, प्रदेश में 10,463 स्कूल सीधे तौर पर बंद हो जाएंगे, 45 हजार से अधिक शिक्षकों के पद समाप्त हो जाएंगे। स्कूलों के बंद होने से न केवल शिक्षकों के पद समाप्त हो रहे हैं, स्कूलों में कार्यरत रसोइया, भृत्य, स्वीपर, महिला समूहों के रोजगार पर भी ग्रहण लगेगा।
आंगनबाड़ी में मिलनी चाहिए नर्सरी, केजी वन-टू जैसी शिक्षा
शिक्षा में कमी कहां से आ रही है बच्चों में, इस पर प्रकाश डालते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने आंगनबाड़ी में बच्चों को नर्सरी, केजी वन, केजी टू जैसी शिक्षा उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि ये हमारे मेनीफेस्टो में था, इसे लेकर कुछ बात हुई, फिर बात आगे नहीं बढ़ी। कांग्रेस की अगली सरकार आती है तो उन्हें आंगनबाड़ियों में औपचारिक शिक्षा उपलब्ध कराने की पहल करनी चाहिए। इसके बाद निजी स्कूलों से कंप्टीशन की स्थिति बनेगी, दोनों का स्तर बराबर हो इसके लिए सरकार को निश्चित रूप से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा स्वामी आत्मानन्द स्कूल खोलने का कांसेप्ट जो पिछली सरकार का था, उसको और डेव्हलप करना चाहिए। हर हायर सेकेंडरी स्कूल स्वामी आत्मानन्द स्कूल के तर्ज का होना चाहिए। स्कूल में शिक्षक बढ़ाने की सोच रखनी चाहिए न कि घटाने की। ये व्यवसाय नहीं है कि सरकार पैसा बचाए। पूरे छत्तीसगढ़ के प्रायमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे इससे प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा वर्ष 2015 में 32 हजार 800 प्रायमरी स्कूल थे, अब बढ़े ही होंगे, घटे नहीं होंगे। इतने स्कूलों में प्रायमरी शिक्षा लेने वाले बच्चों के भविष्य का ध्यान सरकार को रखना होगा, क्योंकि हर कोई निजी स्कूल में बच्चों को प्राथमिक ज्ञान नहीं दिलवा सकता। ग्रामों में तो शासकीय स्कूल ही अभिभावकों के लिए बड़ा सहारा होता है।
जिद्द मत कीजिए, निर्णय वापस लीजिए
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार को जो भी सलाह दे रहा है वो गलत दे रहा है। गलत दिशा में ये सरकार जा रही है। ठीक इसी तरह 45 हजार शिक्षकों को हटाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की बात करना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा जिद्द मत कीजिए अपने निर्णय को वापस लीजिए।
कांग्रेस का चरणबद्ध आंदोलन आज से
सरकार ने प्राथमिक स्कूलों के कक्षा पहली से पांचवीं तक के लिए मात्र दो शिक्षकों के सेटअप को मंजूरी दी है। सरकार के इस अदूरदर्शितापूर्ण निर्णय से पूरे प्रदेश में शासकीय स्कूलों में अध्ययन की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। छत्तीसगढ़ एक गरीब राज्य है। यहां की अधिकांश आबादी शिक्षा के लिए शासकीय स्कूलों पर आश्रित है। शासकीय स्कूलों की खराब गुणवत्ता की वजह से छत्तीसगढ़ के गरीब अपने बच्चों की शिक्षा के लिए निजी शिक्षा संस्थानों की ओर अग्रसर नहीं हो सकते। प्रदेश सरकार की इस जनविरोधी नीति के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शिक्षा-न्याय के नाम से चरणबद्ध आन्दोलन चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत 5 से 7 जून तक पूरे प्रदेश में जिला स्तरीय प्रेस वार्ता, 9 से 11 जून तक विकासखंड स्तर पर ब्लॉक शिक्षा कार्यालय का घेराव एवं 16 से 25 जून तक जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय का घेराव कार्यक्रम रखा गया है। एक से 10 जुलाई तक बंद होने वाले स्कूलों के सामने कांग्रेसजन प्रदर्शन करेंगे।

Categorized in: