एक-एक करके तीन घरों को ढहाने की सरगुजा संभाग में पहली कार्रवाई  

प्रतापपुर। मासूम रिशु के अपहरण और हत्या के मामले में आरोपियों से जुड़े घरों को तोड़ने बुलडोजर तो नहीं चला लेकिन सरकारी जमीन में किए गए निर्माण को मानव श्रम के मार्फत हटवाया गया। इस दौरान प्रतापपुर तहसीलदार, सीएमओ और बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी रही। नगर पंचायत के अमले और राजस्व विभाग के कोटवारों ने एक-एक करके तीन घरों को जमींदोज कर दिया। अपराध पर अंकुश लगाने अपराधियों के घर तोड़ने की सरगुजा संभाग में पहली कार्रवाई की गई है।

नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक चार में रहने अशोक कश्यप के 10 वर्षीय पुत्र रिशु का अपहरण 29 जनवरी को पड़ोस के ही दो युवकों ने कर लिया था और उसी दिन उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। इसके बाद प्रतापपुर में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था और आरोपियों से जुड़े सभी घरों को तोड़ने की मांग उठने लगी थी। नगर में तनाव की स्थिति भी थी। बच्चे के स्वजनों ने घर नहीं टूटने तक पुलिस से मिली अस्थियों का अंतिम संस्कार करने से भी मना कर दिया था। इधर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को देखते हुए मंगलवार को प्रतापपुर तहसीलदार ने अतिक्रमण हटाने का आदेश किया था और पुलिस बल की मांग की थी। बुधवार की सुबह तहसीलदार पुष्पराज, नगर पंचायत की सीएमओ श्रीमती एक्का के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल की कड़ी निगरानी के बीच नगर पंचायत के कर्मचारियों और राजस्व विभाग के कोटवारों ने पहले आरोपी शुभम सोनी के पिता कमलेश सोनी और उसके चाचा कन्हैया सोनी का घर तोड़ना शुरू किया। इसे पूरी तरह से तोड़ने के बाद चाचा राजेश सोनी पुनश्च विशाल ताम्रकार के पिता राजेंद्र ताम्रकार के घर को ध्वस्त कर दिया। इनके घर टूटने के बाद अब वहां सिर्फ मलवा बचा है। घरों को तोड़ने में बड़ी संख्या में कर्मचारी लगे थे। बता दें अपराधियों के घर तोड़ने की शुरुआत उत्तरप्रदेश से हुई है। प्रतापपुर में भी मासूम रिशु के हत्यारों से जुड़े घरों को तोड़ने की सरगुजा संभाग में पहली कार्रवाई हुई है। हालांकि अतिक्रमण हटाने के नाम पर यह कार्रवाई की गई है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग बैरीकेड के बाहर खड़े थे, जो इस पल के साक्षी बने। पुलिस बल की मौजूदगी के कारण यह कार्रवाई शांतिपूर्वक संपन्न हुई। इस दौरान राजस्व अमले के साथ पुलिस विभाग से एसडीओपी अरुण नेताम, डीएसपी नंदिनी ठाकुर, थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह धुर्वे, चंदौरा प्रभारी प्रमोद पांडेय, खड़गवां थाना प्रभारी योगेंद्र जायसवाल सहित अन्य उपस्थित थे।

स्थगन आदेश के कारण दो घरों में नहीं आई आंच  
प्रशासन ने आरोपियों के घर को ध्वस्त करने के पहले नियमानुसार इन्हें नोटिस दिया था। नोटिस तामिल करने के बाद तहसील कार्यालय में जवाब प्रस्तुत करने का समय दिया गया। जवाब प्रस्तुत करने के बाद जुर्माना लगाकर तीन दिवस के अंदर घर खाली करने नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद भी घर का सामान खाली नहीं करने पर बुधवार को स्थानीय प्रशासन ने नगर पंचायत, पुलिस बल की संयुक्त टीम के साथ पहले घरों में रखे सामान को बाहर निकलवाया, इसके बाद मजदूरों के माध्यम से आरोपियों के घर को गिराया गया। इस दौरान दो घर के स्वामियों ने कमिश्नर सरगुजा से घर को नहीं गिराने का स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था, जिस कारण इनके घरों को नहीं गिराया गया है।

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