दूषित पानी सप्लाई और महापौर के वक्तव्य पर भड़के कांग्रेसियों ने निगम का दफ्तर घेरा  

राज्यपाल के नाम सौंपे गए ज्ञापन में इस्तीफा, बर्खास्तगी की मांग

अंबिकापुर। नगर पालिक निगम की लापरवाही से निगम क्षेत्र में दूषित पेयजल सप्लाई के कारण फैली पीलिया बिमारी एवं अब तक कथित रूप से हुई दो की मौत को लेकर जहां एक ओर नगर के लोग दहशत में हैं, वहीं कांग्रेस इसका जिम्मेदार सीधे महापौर और संबंधित एमआईसी सदस्य को ठहराते हुए इस्तीफा, बर्खास्तगी एवं दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध कारवाई की मांग कर रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक के नेतृत्व में कोठीघर से काफी संख्या में निकले कांग्रेसजनों ने नगर निगम के गौरव पथ में स्थित नवीन प्रशासनिक भवन को घेरकर जमकर हल्ला बोला। कांग्रेसजन भारी-भरकम पुलिस बल की मौजूदगी के बीच दम-खम दिखाते कूदते-फांदते, गेट को धकेलते अंदर प्रवेश कर गए। इन्होंने जमकर नारेबाजी की और निगम की महापौर के द्वारा मोमिनपुरा इलाके में भ्रमण के दौरान दिए गए वक्तव्य को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए माफी मांगने कहा और जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस जिला अध्यक्ष व निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने संयुक्त रूप से यहां मौजूद जिम्मेदारों को रामेन डेका, महामहिम राज्यपाल, छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन पत्र सौंपा। इधर स्वास्थ्य विभाग ने पीलिया से खटिकपारा में 13 वर्षीय बालक एवं जनपदपारा में 40 वर्षीय व्यक्ति की पीलिया से मृत्यु को नकार दिया है, और कहा है कि दोनों की मृत्यु अन्य बीमारियों के कारण हुई है।

बता दें निगम क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति का दायित्व नगर पालिक निगम अंबिकापुर के पास है। कांग्रेस का आरोप है कि वर्ष के प्रारंभ से ही शहर के कई वार्डों में दूषित पेयजल की निरंतर सप्लाई निगम द्वारा की जा रही है, इसकी उचित सूचना देने के बावजूद कोई सकारात्मक कदम निगम के द्वारा नहीं उठाया गया। निगम प्रशासन की लापरवाही के कारण शहर के अधिकांश हिस्सों में साफ-सफाई का काम भी प्रभावित हो रहा है। नतीजतन शहर के बड़े हिस्से में पीलिया बीमारी का प्रकोप देखने को मिल रहा है, इससे दो लोगों की मृत्यु हो गई है, और कई नागरिक बीमार हैं। कांग्रेस का आरोप है कि उचित कदम उठाने के बजाय नगर पालिक निगम की महापौर इस मामले में बयानबाजी कर रही हैं कि इस मामले में षड्यंत्र की बू आ रही है, जो बेहद असंवेदनशील है। निगम की कार्यप्रणाली से शहर के नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उचित कदम उठाने के बजाय महापौर का यह रवैया बेहद खेदजनक, गैरजिम्मेदाराना और महापौर पद और प्रतिष्ठा के विपरीत है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने कहा है कि शहर के नागरिकों ने विजय दिलाकर निकाय की जवाबदेही महापौर को दी है, जिससे पल्ला झाड़ने का प्रयास इनके द्वारा किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें महापौर पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। राज्यपाल से मांग की गई है कि निगम की महापौर और पेयजल सप्लाई व्यवस्था से जुड़े एमआईसी सदस्य को इस्तीफा देने के लिए निर्देशित किया जाए, इस्तीफा नहीं देने की स्थिति में उन्हें बर्खास्त किया जाए। साथ ही निगम के दोषी कर्मचारियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाए। इस दौरान इंद्रजीत सिंह धंजल, शंकर प्रजापति, सतीश बारी सहित काफी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित थे।

 

मौतों की उच्च स्तरीय जांच की जाए-शफी अहमद

प्रशासन भले ही बालक और युवक की मौत का कारण अन्य बीमारी से होना मान रहा हो, नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद का कहना है कि निगम प्रशासन के कारण शहर में भय का वातावरण बना हुआ है, लापरवाही के कारण दोनों की जान गई है। निगम में बहुमत के साथ बैठी महापौर झगड़ा करने जैसा जवाब देती हैं। वे खुद बता रही हैं, कचरे का ढेर है, नालियां जाम पड़ी हैं। ट्रिपल इंजन की सरकार के बीच निगम में इनकी सत्ता है, इसके बाद भी सफाई व्यवस्था लचर बनाकर रखा गया है और दूसरे पर दोषारोपण किया जा रहा है। उन्होंने कहा अक्षम जनप्रतिनिधियों को इस्तीफा दे देना चाहिए, और सक्षम अधिकारियों को बैठकर व्यवस्था में सुधार करना चाहिए। पीलिया से जो दो मौतें हुई हैं, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। शहर के लोगों को कतकालो और तकिया के जिस फिल्टर प्लांट से पानी सप्लाई किया जा रहा है, इसमें जितने कर्मचारी लगे हैं, इनसे अलग-अलग कमरे में पूछताछ किया जाए तो सामने आ जाएगा कि एलम, ब्लीचिंग, क्लोरीन की मात्रा में कितना चोरी की गई है। जो आशंका व्यक्त की जा रही है, वह प्रमाणित होगा।

 

कार्यालय संचालन की शुरूआत में ही नए भवन का घेराव

नगर निगम के नए प्रशासनिक भवन में शिफ्टिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, अभी सामानों की खेप पहुंच ही रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, और कार्यालयीन सामानों को व्यवस्थित किया जा रहा है। इसके पहले ही घेराव शुरू हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि महापौर को सिर्फ एक ही इलाके की एक-दो गली में पीलिया नजर आ रहा है, जबकि शहर के अन्य इलाके में भी केस सामने आ रहे हैं। जिनकी मौत पीलिया से होना सामने आया है, वे शहर के अलग-अलग क्षेत्र के हैं। इधर निगम के कर्मचारी भी चार माह से वेतन नहीं मिलने को लेकर निगम के प्रशासनिक भवन का घेराव करने की रणनीति बना रहे हैं। इनका कहना है कि समय पर वेतन नहीं मिलने से उन्हें काफी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

 

बच्चे की मौत, डेथ रिव्यू में पीलिया की पुष्टि नहीं-स्वास्थ्य विभाग

पीलिया से एक बच्चे की मृत्यु होने की जानकारी सामने आने पर कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सरगुजा द्वारा प्रकरण का परीक्षण एवं विस्तृत डेथ रिव्यू किया गया। जांच में पाया गया कि दिव्यांश उम्र 13 वर्ष को 23.02.2026 को उपचार हेतु राजमाता देवेन्द्र कुमारी चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान मरीज के ब्लड, यूरिन, एल.एफ.टी., विडाल एवं सी.बी.सी. सहित आवश्यक चिकित्सकीय जांच कराई गई। प्राप्त जांच रिपोर्ट के अनुसार दिव्यांश को पीलिया (जॉन्डिस) रोग होने की पुष्टि नहीं हुई है। अत: पीलिया से मृत्यु होने संबंधी समाचार तथ्यात्मक नहीं पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आमजन से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की बीमारी अथवा स्वास्थ्य संबंधी सूचना के लिए आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करें, अफवाहों पर ध्यान न दें। जिले में पीलिया की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा सतत निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

 

47 रक्त नमूनों की जांच, 01 में पीलिया का लक्षण

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मोमिनपुरा इलाके में विगत 02 से 03 माह की अवधि में 40 से 45 पीलिया के प्रकरण पाए गए थे। इसके पश्चात् निगम द्वारा 23 एवं 24 फरवरी को प्रभावित क्षेत्रों के विभिन्न घरों से कुल 35 जल नमूने एकत्रित कर शासकीय मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर में ई-कोलाई बैक्टीरिया की जांच हेतु भेजे गए। 25 फरवरी को प्राप्त जांच रिपोर्ट के अनुसार 35 में से 34 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए, केवल 01 नमूना स्वीकार्य सीमा से ऊपर पाया गया। इसके अतिरिक्त जल नमूनों को परीक्षण हेतु पीएचई विभाग की एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं, सूरजपुर एवं रायपुर भेजा गया है, जिनकी रिपोर्ट प्राप्त होना शेष है। स्वास्थ्य विभाग ने 23 फरवरी को प्रभावित क्षेत्रों में शिविर लगाकर 63 संदिग्ध महिला एवं पुरुषों के रक्त नमूने लिए गए। 47 व्यक्तियों के रक्त परीक्षण उपरांत केवल एक व्यक्ति में पीलिया के लक्षण पाए गए। 24 फरवरी को 32 अतिरिक्त रक्त नमूने लिए गएं, जिनकी रिपोर्ट अभी अप्राप्त है।

 

नगरीय क्षेत्र में संक्रमण या महामारी की स्थिति नहीं

प्रशासन का दावा है कि निगम द्वारा शहर में संचालित 02 फिल्टर प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन 32.5 एमएलडी शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इनका दावा है कि जल के गुणवत्ता की नियमित जांच फिल्टर प्लांट एवं विभिन्न वार्डों में प्रतिदिन की जा रही है। वर्तमान में नगरीय क्षेत्र में किसी प्रकार की व्यापक संक्रमण अथवा महामारी की स्थिति नहीं है। निगम द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर सफाई अभियान, नाली सफाई, जल प्रदाय नेटवर्क में संभावित लीकेज की पहचान एवं सुधार कार्य किया जा रहा है। साथ ही अन्य वार्डों से भी जल नमूने लेकर परीक्षण की प्रक्रिया जारी है। नगर पालिक निगम ने नागरिकों से किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

 

मौसमी बीमारी के 04 एवं टायफाइड के 02 प्रकरण मिले

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नगरीय निकाय क्षेत्र में पीलिया के संभावित फैलाव को ध्यान में रखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष डोर-टू-डोर सर्वे अभियान का संचालन संचारी रोग नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता एवं एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. वर्षा राजपूत की निगरानी में किया गया। सर्वे अभियान अंतर्गत मोमिनपुरा, खटिकपारा एवं झंझटपारा (नमनाकला) क्षेत्रों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस कार्य में शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय अंबिकापुर की नर्सिंग छात्राओं की सहभागिता करते हुए संदिग्ध मरीजों के सैंपल एकत्रित किए गए। सर्वे दौरान क्षेत्र में मौसमी बीमारी के 04 एवं टायफाइड के 02 प्रकरण पाए गए। वर्तमान में क्षेत्र की स्थिति सामान्य है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों से अपील की गई है कि पीलिया के लक्षण जैसे आंखों एवं त्वचा का पीला पड़ना, कमजोरी, भूख न लगना, उल्टी अथवा बुखार होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं तथा स्वच्छ पानी का उपयोग करें।

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